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इतना सब कह चुकने के बाद एक मूल प्रश्न खड़ा होता है कि पैसा है क्या? किस चीज को हम पैसा कहें? कोई भला आदमी बहुत पैसे वाला है तो यह पैसा है क्या? अमुक व्यक्ति के पास बहुत रुपया है, यह रुपया है क्या? यानी रुपया-पैसा, धन-दौलत, रकम-वित्त, कुछ भी कहें, यह जानना ज़रूरी है कि इसका स्वरूप क्या है, इसकी रूपरेखा क्या है?

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जन संवाद यात्रा : अब गांधी और मार्क्स नहीं, ज़मीन चाहिए

इस व़क्त देश में यात्राओं का दौर चल रहा है. मुद्दे तमाम हैं, भ्रष्टाचार से लेकर राजनीति तक, लेकिन इसमें समाज का वह अंतिम व्यक्ति कहां है जिसके उत्थान के लिए गांधी जी ने इस देश को एक ताबीज दिया था?

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भ्रष्टाचार : सम्प्रभुता पर हमला

सामान्यत: भ्रष्टाचार को एक व्यक्ति के अपराध के रूप में देखा जाता है. इस भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कई एजेंसियां भी बनाई गईं. मसलन, हर एक विभाग में विजिलेंस डिपार्टमेंट, केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो और उनके समकक्ष विभाग, जो दोषी लोगों के खिला़फ कार्रवाई करते हैं, लेकिन सबसे ब़डा सवाल यहां यह है कि आ़खिर जब कोई मामला सामने आता है तभी इस प्रकार की सक्रियता क्यों दिखाई देती है?

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मैं ज़िंदा हूं!

कभी-कभी ऐसा होता है कि जिसे हम मुर्दा समझते हैं, वह असल में जीवित होता है. एक दक्षिण अफ्रीकी व्यक्ति की जब नींद खुली तो उसने खुद को मुर्दाघर के फ्रीजर में पाया. क़रीब एक दिन पहले उसके परिवारवालों ने सोच लिया था कि वह मर गया है. स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता शिज्वे कुपेलो ने बताया कि यह व्यक्ति अचानक उठ बैठा.

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व्यक्ति और समाज

मान लीजिए देश की समस्त संपत्ति आपके हाथ में सौंप दी जाए और कह दिया जाए कि आप उचित ढंग से उसका वितरण कर दीजिए. आप बंटवारा किस ढंग से करेंगे? एक बार आप अपने परिवार के आदमियों और इष्ट मित्रों को भूल जाइए, क्योंकि आप वितरणकर्ता हैं. तो लाज़िमी तौर पर आपको पक्षपात रहित होकर सर्वसाधारण को एक समान मानकर वितरण करना होगा. आपको पंच परमेश्वर का बाना पहनना होगा.

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हम सीमित सोच की बेड़ियों में बंधे है

आज एक कहानी से बात की शुरुआत करते हैं. एक बार एक व्यक्ति को हाथी ख़रीदना था, वह महावत के पास पहुंचा. वहां कई बड़े-बड़े हाथी बंधे खड़े थे, लेकिन उस व्यक्ति को बहुत हैरानी हुई कि उन हाथियों को बांधने वाली वे बेड़ियां लोहे की नहीं, बल्कि पतली रस्सी की थीं, जिन्हें वे हाथी कभी भी तोड़ सकते थे. उस व्यक्ति ने महावत से पूछा, ये इतनी पतली रस्सियों से कैसे टिके रहेंगे?

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