प्रणब मुखर्जी को बधाई देनी चाहिए. उन्हें बधाई इसलिए नहीं देनी चाहिए कि वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, बल्कि उन्हें इसलिए बधाई देनी चाहिए, क्योंकि वह देश में जीवित उन चंद लोगों में से हैं, जिन्हें राजनीतिज्ञ कह सकते हैं.
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यह आलेख कॉरपोरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा दिए गए एक भाषण और नए कंपनी बिल-2011 पर आधारित है. वीरप्पा मोइली ने बंगलुरु में हुए एक सम्मेलन, जिसका विषय था-भारत में कॉरपोरेट्स का भविष्य, में बोलते हुए नए कंपनी बिल-2011 और कॉरपोरेट्स की सामाजिक ज़िम्मेदारी यानी सीएसआर पर अपने विचार रखे थे.
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कुछ दिनों पहले दिल्ली में बीसवां अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला समाप्त हुआ. दरअसल यह मेला एक साहित्यिक उत्सव की तरह होता है, जिसमें पाठकों की भागीदारी के साथ-साथ देशभर के लेखक भी जुटते हैं और परस्पर व्यक्तिगत संवाद संभव होता है. इस बार के मेले की विशेषता रही किताबों का ताबड़तोड़ विमोचन और कमी खली राजेंद्र यादव की, जो बीमारी की वजह से मेले में शिरकत नहीं कर सके. एक अनुमान के मुताबिक़, इस बार के पुस्तक मेले में हिंदी की तक़रीबन सात से आठ सौ किताबों का विमोचन हुआ.
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समाजवादी अर्थव्यवस्था की प्रतिष्ठा से पहले इसे ठीक से समझना होगा. जब तक इसके विपरीत पक्ष पूंजीवाद को हम सही मायनों में समझ नहीं लेते, तब तक समाजवाद का तात्विक अर्थ समझना कठिन है.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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