अब बंदर नारियल तोड़ेंगे

केरल में श्रमिकों की कमी के कारण अब बंदरों को पेड़ों से नारियल तोड़ने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है. पेड़ों पर चढ़ कर नारियल तोड़ना खतरनाक होने के साथ श्रम साध्य कार्य है. नारियल तोड़ने वाले श्रमिकों में कमी का प्रभाव राज्य के नारियल व्यवसाय पर पड़ा है.

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दूध की कीमत का सवालः मुनाफे में कंपनियां घाटे में किसान

अनाज पैदा करने वाले किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते अक्सर देखा गया है, लेकिन ऐसा पहली मर्तबा हुआ, जब दूध की सही क़ीमत निर्धारित करने को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों एवं ग्वालों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन किया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ग्वाला गद्दी समिति एवं दूध उत्पादक किसानों की मांगों को जायज़ क़रार देते हुए टीम अन्ना ने भी इसका समर्थन किया.

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सेलिना को जुड़वा बच्चे!

अचानक शादी कर लेने की वजह से सुर्ख़ियों में आई सेलिना जेटली मां बनने वाली हैं. उन्होंने ऑस्ट्रिया में अपने ब्वॉयफ्रेंड पीटर हैग के साथ शादी कर ली थी. हैग का होटल व्यवसाय है. जब इनकी शादी की ख़बर मीडिया में आई

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भाग्यशाली अजय

अजय देवगन की गिनती बॉलीवुड के उन सितारों में होती है जो कम पैसा लेते हैं और सुपरहिट फिल्म देते हैं. अजय ने पिछले कुछ वर्षों में कई हिट फिल्में दी हैं. हाल में आईं उनकी फिल्म गोलमाल-3 और सिंघम ने 100 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा का व्यवसाय किया

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बीडी मजदूर : जीवन में खुशहाली कब आएगी

किसी भी देश की आर्थिक उन्नति उसके औद्योगिक विकास पर निर्भर करती है. अगर वह किसी विकासशील देश की बात हो तो वहां के लघु उद्योग ही उसके आर्थिक विकास की रीढ़ होते हैं. भारत भी एक विकासशील देश है. ज़ाहिर है, भारत के विकास की कहानी के पीछे भी इन्हीं उद्योगों का योगदान है, लेकिन अब भारत धीरे-धीरे विकासशील देशों की कतार में का़फी आगे आ चुका है.

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पतंगबाजी पर आधुनिकता की मार

उड़ी-उड़ी रे पतंग, उड़ी-उड़ी रे…जैसे गीत भले ही सदाबहार हों, लेकिन अब नवाबों की नगरी लखनऊ में पतंगबाज़ी की परंपरा लगभग ख़त्म होती जा रही है. पिछले दिनों यहां पतंग के मांझे से एक व्यक्ति की आंख चोटिल होने से पतंगबाज़ी के प्रति लोगों में भय व्याप्त हो गया है.

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गयाः देश-विदेश तक फैली तिलकुट की सोंधी सुगंध

उत्तर भारत का सांस्कृतिक नगर गया मौसमी मिष्ठानों के लिए चर्चित रहा है. यहां लगभग हर ॠतु के अनुसार मिष्ठानों के निर्माण की परंपरा आज भी बरकरार है. बरसात के मौसम में अनरसा, गर्मी में लाई एवं जाड़े में तिलकुट का कारोबार उफान पर रहता है.

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गया का अगरबत्ती उद्योगः बेहाल कारीगर, उदासीन सरकार

गया ज़िला अंतर्गत पंचायती अखाड़ा में रुकसाना अगरबत्ती बनाकर अपने परिवार का गुज़ारा करती है. रुकसाना एवं उसके बच्चे हर रोज़ तीन से चार किलो अगरबत्ती बनाते हैं. उसका पति मज़दूरी करता है. रुकसाना का कहना है कि वह तीन से चार हज़ार रुपये महीना कमा लेती है. बात करते-करते उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं और वह अपनी परेशानियां बयां करने लगती हैं.

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संकट में आंवला कारोबार

भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय भले ही आंवला खाओ-आंवला लगाओ के नाम से देश भर में इसके प्रचार-प्रसार की बात कर रहा हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले के आंवला उत्पादक किसान एवं व्यवसायी दिनेश शर्मा पिछले कुछ वर्षों से बेहतर उत्पादन के बावजूद आंवला कारोबार में हो रहे उतार-चढ़ाव को लेकर ख़ासे चिंतित नज़र आते हैं.

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सरसों के फूलों से शहद का उत्पादन

भरतपुर के किसानों ने सरसों की खेती के साथ ही शहद उत्पादन के रूप में एक साहसिक क़दम उठाया है. बस उन्हें सरकारी संरक्षण-प्रोत्साहन की ज़रूरत है. अगर ऐसा हो जाए तो वे इस क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं.

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