खाद्य सुरक्षा बिल : रोटी से खेलने वाला कौन है देश की संसद मौन है …..

ईस्ट इंडिया कंपनी की लूट को भी पीछे छोड़ चुकी कांग्रेस सरकार दरअसल सरकार नहीं, परिवार चला रही है. भ्रष्टाचार

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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पिछले चार साल में अनाज नहीं सड़ा: एफसीआई

जुलाई 2010 में सरकार ने एक आरटीआई के अंतर्गत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि देश में एफसीआई के विभिन्न गोदामों में 1997 से 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल और 2.2 लाख टन धान खराब हो गया था. जुलाई 2012 में एक अन्य आरटीआई के जवाब में एफसीआई ने कहा है कि 2008 से लेकर अब तक देश में एफसीआई के किसी भी गोदाम में अनाज खराब नहीं हुआ है.

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आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

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विजय माल्या और सियासत का गठजोड़ : आसमान में घोटाला

यह भारतीय लोकतंत्र का बाज़ारू चेहरा है, जो कॉर्पोरेट्स के हितों के मुताबिक़ फैसले लेता है. जहां लोकतंत्र के पहरुवे, भूख से मरते किसानों के लिए रोटी का इंतज़ाम करने का अपना फ़र्ज़ पूरा नहीं करते, लेकिन उद्योग जगत के महारथियों के क़दमों में लाल क़ालीन बनकर बिछ जाना अपनी शान समझते हैं.

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हमारी सहिष्णुता कम हो रही है

प्रेसीडेंट बुश के ऊपर जूता क्या चला, सारी दुनिया में जूतों की बहार आ गई. हमारे देश में भी यह दूसरा या तीसरा वाक़िया है, जब राजनेताओं के ऊपर हमले हुए. जनार्दन द्विवेदी पर जूता फेंका गया और अब शरद पवार को एक शख्स ने थप्पड़ मारा. ये घटनाएं दो तरह के संकेत देती हैं. पहला संकेत यह है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों से नौजवानों का भरोसा उठ रहा है. उन्हें यह लगता है कि धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल, सिविल ना़फरमानी, ये शब्द बेमानी हो गए हैं और इनके ऊपर अमल करने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.

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अकेले ललित मोदी ही क्‍यों?

इंडियन प्रीमियर लीग के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी को मुंबई हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली. आईपीएल के संचालन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल रहे मोदी ने कोर्ट के समक्ष एक अपील दायर कर यह मांग की थी कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा उनके खिला़फ की जा रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और इसके लिए एक निष्पक्ष पैनल का गठन किया जाए.

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देश की हालत की चिंता किसे है

रोमन साम्राज्य के सम्राट बस दो ही चीजों से डरते थे, असभ्य एवं अशिष्ट जनता और रोम के अंदर खाद्य पदार्थों की कमी. जनता पर नकेल कसने के लिए सेना की मदद ली जाती थी तो खाद्यान्नों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए खुद राजा चौकन्ना रहता था.

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पवार कृषि नहीं, क्रिकेट मंत्री हैं

शरद पवार आईसीसी अध्यक्ष बन तो गए, लेकिन इसके बाद क्रिकेट, देश की कृषि और किसानों का भविष्य कैसा होगा, यह बताने के लिए हम बात आईपीएल से शुरू करते हैं, जिसकी चिंगारी ने राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक को सुलगा दिया.

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आईपीएल के खेल में पवार का बाउंसर

आख़िर खुल गई पवार की पोल. लंबे समय तक इंकार करते रहने के बाद आख़िरकार उन्हें यह मानना ही पड़ा कि आईपीएल टीमों की ख़रीद-बिक्री में वह न केवल शामिल रहे हैं, बल्कि रॉयल चैलेंजर्स टीम में उनके शेयर भी हैं. चौथी दुनिया ने आईपीएल के तीसरे सीज़न के दौरान ही यह खुलासा किया था कि लीग की आर्थिक गतिविधियों में तमाम तरह की अनियमितताएं बरती गई हैं.

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लीपापोती की तैयारी शुरू

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का तीसरा सत्र ख़त्म हो चुका है, लेकिन लीग से जुड़े विवादों का सिलसिला ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा. कोच्चि टीम की फ्रेंचाइजी को लेकर शुरू हुए ताज़ा विवाद ने पहले केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की बलि ली तो भ्रष्टाचार और सट्टेबाज़ी के आरोपों के मद्देनज़र 25 अप्रैल को फाइनल मुक़ाबले के ठीक बाद बीसीसीआई ने आईपीएल के कमिश्नर एवं चेयरमैन ललित मोदी को निलंबित करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया.

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संसद, सुप्रीम कोर्ट, 10 जनपथ और इंडियन फिक्सिंग लीग

भारत की राजनीति को सा़फ करने का समय आ गया है. सारे देश को मूर्ख बना कर पैसा बनाने का घिनौना खेल अपने अंतर्विरोध की वजह से खुल गया है. दरअसल यह हिंदुस्तान का वाटर गेट है, जिसकी शुरुआत एक टिप्पणी से हुई और आज इसमें भारत सरकार के कई मंत्री, क्रिकेट से जुड़े बड़े लोग और अपराध की दुनिया के बादशाह एक साथ, हाथ मिलाए खड़े दिखाई दे रहे हैं.

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ललित मोदी का सफरनामा

पूरी दुनिया ललित मोदी के जिस चेहरे को जानती है, वह चेहरा नकली है. ललित मोदी की असलियत से हम पर्दा उठाएं, इससे पहले यह सवाल करना ज़रूरी है कि इस विवाद की शुरुआत होने तक शरद पवार, विजय माल्या, प्रफुल्ल पटेल, आई एस बिंद्रा, फारुख़ अब्दुल्ला और शिल्पा शेट्टी आईपीएल की सफलता के लिए ललित मोदी की पीठ थपथपा रहे थे.

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आईपीएल की अंदरूनी कहानी

आईपीएल के मैचों का जो हाल है, आईपीएल से जुड़ी सारी घटनाओं का वही हाल है-सब कुछ परदे के पीछे से होता है. आईपीएल की शुरुआत से 20 दिन पहले शरद पवार बाल ठाकरे से मिलने उनके घर जाते हैं. मीडिया इन दोनों की मुलाक़ात का राजनीतिक मतलब निकालने में जुट जाता है. उसे लगता है महाराष्ट्र की राजनीति के ये दो दिग्गज आपसी गठजोड़ की संभावनाएं तलाशने इकट्‌ठा हुए हैं.

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IPL की काली दुनियाः ऐसे फंसते हैं खिलाड़ी

ऐसे ही कोई खिलाड़ी अंडर 19 या रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल होता है, सट्टेबाज़ों की फौज उन पर नज़र रखना शुरू कर देती है. टीम के सीनियर खिलाड़ी पहले ही उनकी गिरफ्त में होते हैं, लेकिन नए खिलाड़ियों को तब तक इसमें शामिल नहीं किया जाता, जब तक वो विश्वास के क़ाबिल न हो जाएं.

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प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बाबा रामदेव

जिस काम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं कर सका, जिसे करने की आस लिए विश्व हिंदू परिषद बू़ढी होने लगी है और भाजपा भावी प्रधानमंत्री का नाम घोषित करने के बाद भी इस सपने की ओर एक क़दम नहीं बढ़ पाई, उस काम को अब एक बाबा पूरा करना चाहता है. इस बाबा ने इंग्लैंड में एक पूरा आइलैंड ख़रीद लिया है, इसने अमेरिका के ह्यूस्टन में लगभग तीन सौ एकड़ ज़मीन ख़रीद ली है.

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जदयू के नाराज सांसदों और विधायकों की गोलबंदी तेज निशाने पर नी‍तीश

पिछले चार सालों से अपनी मर्जी से सत्ता की राजनीति कर रहे नीतीश कुमार इस समय अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती से रूबरू हो रहे हैं. राहुल गांधी के दौरे के बाद तेज़ हुए विपक्षी हमलों और जदयू में जारी घमासान की वजह से वह उलझते जा रहे हैं. अलग-अलग कारणों से नाराज चल रहे कई सांसदों एवं दर्ज़नों विधायकों की गोलबंदी नीतीश और उनकी सरकार पर भारी पड़ रही है.

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