सीतापुर ॠण घोटाला : चीनी मिल प्रबंधन और बैंक की मिलीभगत उजागर

उत्तर प्रदेश सीतापुर के हरगांव स्थित बिड़ला समूह की दी अवध शुगर मिल्स लिमिटेड ने धोखाधड़ी करके किसानों की ज़मीनें

Read more

पाकिस्तान का भय दिखाकर वोट नहीं मिलने वाला

हमारे देश के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार (नरेंद्र मोदी) कश्मीर में जाकर कहते हैं कि पाकिस्तान भारत के लिए ख़तरा

Read more

टकसाल का राष्ट्रीयकरण

आपको ज्ञात होगा कि बैंक, नोट अथवा सिक्के (करेंसी)आज के युग में कितने आवश्यक हैं. किसी भी सभ्य देश का काम इनके बिना चल ही नहीं सकता. सिक्कों में किस अनुपात में कौन सी धातु मिलाई जाए और इस पर कौन से राष्ट्रीय चिन्ह (अशोक स्तंभ) आदि की छाप लगाई जाए, ये सब काम सरकारी टकसाल के हैं.

Read more

शिकागो सम्मेलन और अफ़ग़ान मुद्दा

वर्ष 2014 तक अ़फग़ानिस्तान से नाटो सेना की वापसी हो जाएगी, लेकिन इसके बाद भी नाटो अ़फग़ानिस्तान को सहायता देता रहेगा, ताकि वहां लोकतंत्र मज़बूत हो सके और तालिबान का शासन फिर से स्थापित न हो पाए. हाल में अमेरिकी शहर शिकागो में हुई नाटो की बैठक का मुख्य मुद्दा अ़फग़ानिस्तान से नाटो सेना की वापसी ही रहा.

Read more

रुपयों के किराए का नियंत्रण

अर्थशास्त्रियों की गणना अजीब है. उनका कल्पनातीत हिसाब है. जमा पूंजी का हिसाब लगाने के उनके तरीक़े को अगर आप ग़ौर से देखें तो यही लगेगा कि ऐसी बातें करने वालों को क्यों न जल्दी से पागलखाने भिजवा दिया जाए. उदाहरण स्वरूप, अगर एक बैंक के पास लोगों के खातों में जमा रुपये, मान लीजिए 5 करोड़ हैं तो वे अर्थशास्त्री कहते हैं कि 5 करोड़ जमा हैं. ऐसा होने से 5 करोड़ उस बैंक की साख बन गए.

Read more

मध्य प्रदेश : अवैध खनन का काला कारोबार

कटनी और जबलपुर देश के उस केंद्रीय भू-भाग में स्थित हैं, जिसे राष्ट्र की हृदयस्थली कहा जाता है. इस इलाक़े को आज रौंदा, नोचा, खसोटा और लूटा जा रहा है. करोड़ों-अरबों की प्राकृतिक संपदा का मुना़फा मुट्ठी भर हाथों में क़ैद हो रहा है. कंपनियां, सरकार, प्रशासन एवं दलाल इस सीमा तक सक्रिय हैं कि शासकीय नियम-क़ानून तो दूर, मानवीय मूल्यों का भी मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है.

Read more

ग्राम सभा को मज़बूत बनाएं

स्वराज की अवधारणा असल में पंचायती राज संस्था की नींव पर ही टिकी है यानी जितनी सशक्त पंचायती राज संस्था होगी, उतनी ही ज़्यादा संभावना ग्राम स्वराज के मज़बूत होने की बनेगी. गांधी जी भी चाहते थे कि शासन की सबसे छोटी इकाई यानी पंचायती राज के ज़रिए ही गांवों का विकास हो.

Read more

लोकतंत्र राजनेताओं के बिना नहीं चल सकता

किसी भी देश को चलाने के लिए लोकतंत्र सबसे अच्छी शासन प्रणाली है. यह सही है कि इस प्रणाली में भी कई ख़ामियां हैं, लेकिन यह सभी देशों में अलग-अलग तरह से उजागर होती है. दुर्भाग्यवश पिछले साठ सालों में हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का जितना विकास होना चाहिए था, उतना हुआ नहीं, बल्कि इसकी ख़ामियां ही ज़्यादा उजागर हुई हैं.

Read more

जनाधार बढ़ाने की कवायद

पुराने ज़माने में राजाओं के भेष बदलकर जनता के बीच जाने, उनकी समस्याएं जानने, तंत्र की कार्य-शैली से परिचित होने और शासन के प्रति जनभावनाओं से परिचित होने आदि के तमाम क़िस्से सुने जाते हैं.

Read more

दिल्‍ली का बाबूः कैबिनेट सचिव की सक्रियता

एके सेठ के कैबिनेट सचिव बनने के बाद उनके बारे में कुछ ज़्यादा सुनने को नहीं मिला है, लेकिन अब वह सक्रिय हो गए हैं. उन्होंने कुछ पुरानी प्रणालियों में फेरबदल करने की ठानी है, ताकि शासन को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके.

Read more

उत्तर प्रदेशः राज्यपाल की चौखट पर लोकायुक्त की दस्तक

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले में लोकायुक्त अपने को असहाय महसूस कर रहे हैं. राज्य सरकार की बेरु़खी के कारण भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही है. भ्रष्टाचार के क़रीब 80 मामले ऐसे हैं, जिनमें राजनेताओं और नौकरशाहों के खिला़फ सरकार और शासन की तऱफ से कोई क़दम नहीं उठाया गया है.

Read more

आरोप लगाने से ज़्यादा कठिन है शासन करना

वर्ष 1970 की बात है. एडवर्ड हीथ प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैरल्ड विल्सन के ख़िला़फ खड़े थे और लोगों से यह वादा कर रहे थे कि मैं महंगाई कम कर दूंगा. जब वह जीत गए, प्रधानमंत्री बन गए, तब उन्हें पता चला कि विपक्ष में रहकर आरोप लगाने से ज़्यादा कठिन सत्ता में आने के बाद काम करना होता है, अपने वादों को पूरा करना होता है.

Read more

जनता बदलाव चाहती है

सत्ता की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप एक आम बात है, लेकिन जब समय चुनाव का हो तो इनकी अहमियत भी बढ़ जाती है. यही आरोप चुनावी मुद्दे तक बन जाते हैं. मसलन, पश्चिम बंगाल में चुनाव का शंखनाद हो चुका है और विपक्ष यानी तृणमूल कांग्रेस वामपंथी शासन की जमकर बखिया उधेड़ने में जुटी हुई है.

Read more

सेना मुग्ध, जनता क्षुब्ध

पहले ट्यूनीशिया, फिर मिस्र के बाद लीबिया में मोअम्मर गद्दा़फी के तानाशाही शासन के विरुद्ध जन विद्रोह भड़का तो लगा कि अब गद्दा़फी का हश्र भी ट्यूनीशिया और मिस्र के शासकों की तरह होगा, लेकिन यहां की कहानी लगातार बदलती जा रही है.

Read more

पाकिस्‍तानः गहराता जा रहा है तख्‍तापलट का खतरा

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्ऱफ के एक बयान ने पिछले दिनों पूरी दुनिया में हलचल मचा दी थी. मुशर्ऱफ ने अपनी राजनीतिक पार्टी के लांच से तीन दिन पहले लंदन में कहा कि पाकिस्तान में एक बार फिर सैनिक शासन का दौर शुरू होने वाला है. पूरी दुनिया के लिए यह बयान भले चौंकाने वाला हो, लेकिन चौथी दुनिया ने जुलाई महीने में ही यह बात कही थी.

Read more

राष्ट्रपति शासन की आहट

क्‍या बिहार विधानसभा के चुनाव राष्ट्रपति शासन में होंगे! कुछ दिन पहले ऐसा सोचना ग़लत था, लेकिन 20 एवं 21 जुलाई को बिहार विधानमंडल में शर्मसार करने वाली घटनाओं ने इस आशंका को पंख लगा दिए हैं. इसके अलावा 11 हज़ार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की सीबीआई जांच को लेकर विधायिका और न्यायपालिका के बीच बढ़ते टकराव से तीखे हुए विपक्ष के तेवर ने भी इस आशंका को बल दिया है.

Read more

टूट कर बिखर जाएगा पाकिस्‍तान

कुछ दिन पहले की बात है. ओकारा शहर के एक पुलिस थाने के सामने लोगों का हुजूम जमा हुआ. हुजूम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं. थोड़ी देर बाद यह हुजूम थाने के अंदर पहुंचा और दो पुलिस वालों के ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. थाने में मौजूद अन्य पुलिस वालों ने उन्हें मरने से तो बचा लिया, लेकिन पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

Read more

राजनीतिक नौटंकी से विकास पर ब्रेक

झारखंड में एक माह से जारी एक राजनैतिक नौटंकी का पटाक्षेप होते ही नए नाटक का मंचन शुरू हो जा रहा है. कौन बनेगा मुख्यमंत्री की तर्ज़ पर राजनेता म्यूजिकल चेयर के खेल में मस्त हैं और विकास का पहिया थमा हुआ है. जनता आश्चर्यचकित होकर अपने चुने हुए प्रतिनिधियों का तमाशा देख रही है.

Read more

उच्च शिक्षा विभाग बदहाली का शिकार

मध्य प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय में उप कुलपति बनने से बेहतर है किसी होटल का मैनेजर बनना. यह कथन है लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) के टी सतारावाला का. इस कथन की पृष्ठभूमि यह है कि 1978 में सतारावाला को जबलपुर विश्वविद्यालय का उप कुलपति नियुक्त किया गया था.

Read more

सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

Read more

इमामगंज में नक्‍सलियों का शासन चलता है

झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया ज़िले का इमामगंज विधान सभा क्षेत्र पूरी तरह से नक्सलियों की जद में है. यहां के लोग प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के प्रभाव क्षेत्र में हैं. सुशासन का दावा करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश यहां पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहा है. वहीं दूसरी ओर नक्सलियों के किसी भी फरमान को यहां के लोग सर आंखों पर ले लेते हैं. सच कहें, तो नक्सलियों ने बिहार के महत्वपूर्ण विधान सभा क्षेत्र माने जाने वाले इमामगंज में सुशासन की हवा निकाल कर रख दी है. वे रात तो रात, दिन के उजाले में भी जो चाहते हैं, करते हैं.

Read more