इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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कब करें द्वितीय अपील और शिकायत

पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था, साथ ही उसका एक प्रारूप भी प्रकाशित किया था. इस अंक में हम आपको बता रहे हैं कि किन परिस्थितियों में द्वितीय अपील एवं शिकायत की जा सकती है. अगले अंक में हम शिकायत एवं द्वितीय अपील का प्रारूप भी प्रकाशित करेंगे.

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दूसरी अपील कब और कैसे करें

एक सूचना अधिकारी आपके आरटीआई आवेदन पर कार्रवाई नहीं करता या आपको पूरी सूचना नहीं देता है, तब आप क्या करते हैं? ज़ाहिर है, आप प्रथम अपील करते होंगे. प्रथम अपील का प्रारूप भी चौथी दुनिया में प्रकाशित किया जा चुका है. केंद्रीय सूचना आयोग में ऑन लाइन अपील कैसे दर्ज कराते हैं, इसके बारे में भी हम आपको बता चुके हैं. बहरहाल, प्रथम अपील के बाद भी अगर आपको संतोषजनक सूचना नहीं मिलती है तो द्वितीय अपील करने की नौबत आती है.

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अपील व शिकायत के फर्क़ को समझें

आरटीआई क़ानून के तहत शिकायत का क्या अर्थ होता है. शिकायत कब, कहां और कैसे दा़खिल की जाती है. दरअसल, अपील और शिकायत में एक बुनियादी फर्क़ है. कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है

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सरकारी और निजी स्कूलों से हिसाब मांगे

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया. इस क़ानून ने आम आदमी को सत्ता में बैठे ताक़तवर लोगों से सवाल पूछने की ताक़त दी. व्यवस्था में लगी दशकों पुरानी ज़ंग को छुड़ाने में मदद की.

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आवासीय ईलाकों में गैरकानूनी व्यवसायिक गतिविधियां

यह समस्या लगभग हर छोटे-बड़े शहर की है. आवासीय-रिहायशी इलाक़ों में लालची और स्वार्थी क़िस्म के लोग ऐसे-ऐसे व्यवसाय शुरू कर देते हैं, जिनकी वजह से उस इलाक़े में रहने वाले लोगों के लिए कई सारी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं. मसलन, जहां अवैध गोदाम, पार्किंग, मोटर वर्कशॉप चल रहे हैं, जिनकी वजह से वहां प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही वहां रहने वाले लोग भी परेशान रहते हैं.

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कैसे करें अपील और शिकायत

इस बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई क़ानून के तहत शिकायत व अपील कब और कैसे करते हैं. साथ ही इस अंक में हम अपील व शिकायत का एक प्रारूप भी प्रकाशित कर रहे हैं. दरअसल, अपील और शिकायत में एक बुनियादी फर्क़ है. कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है उसका जवाब आपको ग़लत दे दिया जाता है.

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कब करें द्वितीय अपील और शिकायत

पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था, साथ ही उसका एक प्रारूप भी प्रकाशित किया था. इस अंक में हम आपको बता रहे हैं कि किन परिस्थितियों में द्वितीय अपील एवं शिकायत की जा सकती है. अगले अंक में हम शिकायत एवं द्वितीय अपील का प्रारूप भी प्रकाशित करेंगे.

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भद्रजनों की अभद्रता

क्रिकेट को देश की जनता धर्म मानती है तो थ्योरी में इसे जेंटलमैन गेम का दर्जा दिया गया है. कुछ लोग इसे सामंतों को खेल बताते हैं, जिसमें दो सामंती खेलते हैं और बाकी खिलाड़ी मज़दूरी करते हैं. लेकिन अब क्रिकेट को लेकर एक नई परिभाषा ग़ढी जा रही है. अब इसे पैसा, ग्लैमर और विवादों का पिटारा माना जा रहा है. ज़ाहिर है, इस नई परिभाषा में क्रिकेटर भी ख़ुद को सांचे में ढालने की कोशिश कर रहे हैं.

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प्रथम अपील क्या है

इस कॉलम की शुरुआत में हमने आपको प्रथम अपील, द्वितीय अपील एवं शिकायत के बारे में बताया था. एक बार फिर से हम आपको अपील एवं शिकायत के बारे में जानकारी दे रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

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तीसरा पक्ष क्या है

कई बार जब आप किसी सरकारी विभाग में आरटीआई आवेदन देते हैं तो जवाब में आपको बताया जाता है कि अमुक सूचना तीसरे पक्ष से जुड़ी है, इसलिए आपको नहीं दी जा सकती या मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए सूचना का प्रकटीकरण नहीं किया जा सकता है या फिर अमुक सूचना को सार्वजनिक करना देशहित में नहीं है अथवा सूचना को सार्वजनिक करने से देश की आंतरिक सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है.

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आरटीआई: कुछ ख़ास बातें

लोक सूचना अधिकारी यदि आवेदन लेने से इंकार करता है, अथवा परेशान करता है तो उसकी शिकायत सीधे सूचना आयोग से की जा सकती है.

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आरटीआई: कुछ ख़ास बातें

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है. इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का हक़ है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है, वह क्या, कहां और कैसे कर रही है.

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ऐसे खत्‍म होगी पेंशन की टेंशन

वृद्धों और विधवाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं, जिनमें से एक है वृद्धावस्था-विधवा पेंशन योजना. इसके तहत एक पंचायत में जितने भी वृद्ध या विधवाएं हैं, उन्हें एक खास रक़म प्रति माह के हिसाब से दी जाती है.

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मगधः आंगनवाड़ी केंद्रों में बंदरबांट

मगध प्रमंडल में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिये बाल विकास परियोजना के तहत सरकार की ओर से चलाए जा रहे अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति का़फी दयनीय है. सारी सामग्री और तमाम सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद भी आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर नहीं बदली.

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उत्तर प्रदेश अल्‍पसंख्‍यक आयोगः खर्चा रूपया, काम चवन्‍नी

अल्पसंख्यक, एक ऐसा शब्द, जिसका इस्तेमाल शायद राजनीति में सबसे ज़्यादा होता है. सत्ता में आने से पहले और सत्ता में आने के बाद बस इस शब्द और इस समुदाय का इस्तेमाल ही होता आया है. इसके अलावा जो कुछ भी होता है, वह स़िर्फ दिखावे के लिए होता है.

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सूचना आयोग और उनके पते

इस अंक में हम विभिन्न राज्य सूचना आयोग और केंद्रीय सूचना आयोग के पते प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि किसी भी आरटीआई आवेदक को द्वितीय अपील या शिकायत करने के लिए परेशान न होना पड़े. हम आपको यह भी बता रहे हैं कि कब, कैसे और किन हालात में सूचना आयोग का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए.

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कब करें आयोग में शिकायत

पिछले अंक में हमने आपको द्वितीय अपील के बारे में बताया था. इस बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई क़ानून के तहत शिक़ायत का क्या अर्थ होता है. शिक़ायत कब, कहां और कैसे दाख़िल की जाती है. दरअसल, अपील और शिक़ायत में एक बुनियादी फर्क़ है.

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