बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी

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अपराध की दुनिया में फंसता बचपन : मासूम या मुजरिम

बदलते परिवेश में बच्चे वक्त से पहले ही ब़डे हो रहे हैं. एक तऱफ वे कम उम्र में तमाम तरह

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दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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अररिया जिले का भजनपुर गांवः दबंगई का अंतहीन सिलसिला

यह भजनपुर गांव है. बिहार के राजनीतिक एवं भौगोलिक नक्शे के अनुसार एक ऐसा गांव, जो ज़िला अररिया के अनुमंडलीय नगर फारबिसगंज से मात्र दो किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से इतना पिछड़ा है कि वहां आज तक न्याय और विकास जैसे राजनीतिक नारे की आवाज़ तक नहीं पहुंच सकी.

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डोपिंग का जाल : सिर्फ खिलाडी और कोच दोषी नहीं

भारत के ज़्यादातर खेल पहले से ही क्रिकेट के मायाजाल में फंसकर खुद के अस्तित्व के लिए तरस रहे हैं, ऐसे में डोपिंग के बढ़ते मामलों ने उन उभरते हुए खेलों और खिलाड़ियों को हाशिए पर डालने का काम किया है, जो किसी तरह क्रिकेट के बाज़ार के बीच अपने स्वर्ण पदकों की बदौलत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे.

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मिड डे मील की कछुआ चाल

स्‍कूलों में मिलने वाला दोपहर का भोजन यानी मिड डे मील भी बच्चों को कुपोषण से बचाने में सहायक साबित नहीं हो पा रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-3) की रिपोर्ट के मुताबिक़, देश में तीन साल से कम उम्र के क़रीब 47 फीसदी बच्चे कम वज़न के हैं. इसके कारण उनका शारीरिक विकास रुक गया है.

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उपेक्षा की शिकार पुजारी अन्ना की राह पर

उत्तराखंड देवभूमि होने के कारण पर्यटन प्रधान राज्य के रूप में विश्वविख्यात है. इसी राज्य में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम एवं पावन केदारनाथ धाम भी हैं, जहां मोक्ष की कामना लेकर प्रति वर्ष लाखों श्रद्धालु हाजिरी लगाने आते हैं. आगामी 8 मई को पावन केदारनाथ धाम के पट श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे.

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उत्तराखंडः खतरे में बाघ

देहरादून में एक युवक पर हमला करने वाले बाघ को मार डाला गया. कुछ दिनों पहले यहां वन विभाग ने एक बाघिन को आदमखोर घोषित किया था. वन्यजीव प्रेमियों कि माने तो यहां वन्यजीव और मानव संघर्ष के ब़ढते घटनाओं के उचित कारणों पर भारत सरकार एवं सूबे के प्रशासन को ध्यान देना चाहिए.

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अपने बूते जिंदा हैं आदिवासी

कैमूर पर्वत श्रृखंला भारत की प्राचीनतम पर्वतमालाओं में से है, जहां पर सोन, घाघरा, कर्मनाशा आदि नदियां बहती हैं. वनों से आच्छादित इस क्षेत्र में आदिवासियों का वास रहा है. लेकिन मुगलों व अंग्रेजों के दख़ल के बाद से इस इला़के के आदिवासियों का जीना दूभर हो गया.

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सिख दंगा पीडि़तः कब मिलेगा न्‍याय

वर्ष 1984 के दंगों के शिकार सिखों को मुआवज़ा दिलाने के लिए दाखिल मूल याचिका के संवेदनशील पन्ने और सात-सात अन्य याचिकाएं अदालत से ग़ायब हैं. मूल याचिका के महत्वपूर्ण पन्ने फाड़ डालने और सात-सात सेकेंडरी रिटें ग़ायब किए जाने जैसे सनसनीखेज मामले की जांच की बात तो छोड़िए, सिखों के मुआवज़े पर जिस भी बेंच ने सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया, वह बेंच ही ऐन फैसले के वक्त बदल दी गई.

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बंदरों का आतंक

उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में थाना बेनीगंज अंतर्गत ग्राम सिकंदरपुर के निकट एक खेत में एक साथ नौ बंदर मृत पाए गए. बंदरों की मौत की ख़बर लगते ही सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हो गई. अयोध्या फैसले को लेकर चौकन्नी पुलिस ने किसी अनहोनी से पहले मामला रफा-दफा कर दिया, लेकिन बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या शहर के लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है.

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जन्म से पहले की भूख

गरीबों के नाम पर योजनाएं ढेर सारी हैं, लेकिन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियों के कारण आर्थिक असमानता की खाई चौड़ी होती जा रही है. भारत में हर साल लगभग 25 लाख शिशुओं की अकाल मृत्यु हो जाती है. इसी तरह 42 प्रतिशत बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार हैं.

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भूख से खत्‍म होती जिंदगी

इधर सरकारी गोदामों में लाखों टन अनाज सड़ रहा है उधर कुपोषण के शिकार बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. इस भयावह तस्वीर के बीच शासन-प्रशासन के अधिकारी खूब फल-फूल रहे हैं.

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दम पे दम मारे जा…

आपने सिगरेट पीना कब शुरू किया था? ख़ैर जब भी किया हो, लेकिन इतना ज़रूर है कि आर्दी से पहले नहीं किया होगा. आर्दी रिजाल की उम्र केवल दो वर्ष है, लेकिन उसे चेन स्मोकर की पदवी से नवाजा जा चुका है. इंडोनेशिया में मछुआरों के एक गांव मूसी बेन्यूआसिन निवासी रिजाल एक दिन में कम से कम 40 सिगरेट पीता है.

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रक्षक की सुरक्षा का सवाल

शेर और बाघों को प्रकृति का वरदान माना जाता है, जिन्हें प्रकृति ने जंगल की रक्षा का दायित्व सौंपा है. अफसोस कि आज जंगल का वही रक्षक स्वयं सुरक्षित नहीं है. उसे सबसे अधिक क्षति मानव ने पहुंचाई. उत्तराखंड में बाघों का 11 हज़ार वर्ष पुराना इतिहास खासा समृद्धशाली है.

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तस्‍करी की शिकार महिलाओं का पुनर्वास कैसे हो?

यह कविता (बांग्ला से अनुवाद) है यौवन की दहलीज पर खड़ी चांदनी की, जो कोलकाता के एक होम में अपनी नई ज़िंदगी के सपने के साथ खुले आकाश में उड़ना चाहती है. चांदनी जैसी लाखों लड़कियां देश भर के सैकड़ों सरकारी और ग़ैर सरकारी होम या सुधारगृहों में बैठकर सपने बुनती हैं, पर कितनों को उज्ज्वल भविष्य की सौगात मिलती है, इस पर बहुतों का ध्यान नहीं जाता.

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सरकारी अमला कर रहा है बाघों का शिकार

भारत में टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा हैं. खुले वनों में मौजूद बाघों का अवैध शिकार इस बुरी तरह हो रहा है कि अब कई वनक्षेत्र पूरी तरह से बाघ रहित हो चुके हैं, लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि सरकार द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यप्राणी अभ्यारण्यों में भी बाघों की मौत आये दिन हो रही है.

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भोपाल न्‍यायिक त्रासदी

पच्चीस साल पहले विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी झेलने वाले भोपाल के लाखों पीड़ितों को आ़िखर क्या मिला? इस पर बहस तो चलेगी पर पीड़ितों को क्या मिलेगा? भोपाल हादसे में 15274 मौतों के बाद लाखों लोगों को तिल-तिल कर मरने के लिए बाध्य करने वाली यूनियन कार्बाइड और उसके अमेरिकन अध्यक्ष वारेन एंडरसन सहित आठ अन्य सज़ायाफ्ता मुजरिम भारतीय न्याय प्रक्रिया की कमज़ोरियों का लाभ उठाकर आज भी आज़ाद हैं.

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चार धाम यात्रा अव्‍यवस्‍था का शिकार

देवभूमि उत्तराखंड में धर्म एवं आस्था की मिसाल पेश कर पर्यटन को एक पहचान देने वाली चार धाम यात्रा सरकारी उपेक्षा और अव्यवस्था की भेंट चढ़ कर राम भरोसे चल रही है. इसमें प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री-गंगोत्री सहित केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते हैं.

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भारत की जमीन नेपाल के कब्‍जे में

आखिर कब तक भारत अपनी ज़मीन पर पड़ोसी देशों का अतिक्रमण का शिकार बनता रहेगा? कब तक प्रत्येक भारतीय यह समाचार सुनता रहेगा, कि प़डोसी मुल्क ने उसकी ज़मीन क़ब्ज़ा कर लिया है. कब तक यह सुनते रहेंगे कि सरकार उच्चाधिकारी स्तर की वार्ता कर रही है.

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बनारसी साड़ी उद्योगः बुनकरों की हालत बदतर, सरकार उदासीन

कवि अग्निवेद को इस कविता की राह पर चलते हुए बीते वर्ष वाराणसी के गौरगांव निवासी बुनकर सुरेश राजभर पत्नी हीरामनी एवं सात वर्षीय पुत्र छोटू की हत्या करके स्वयं फांसी पर झूल गया. क़र्ज़ के बोझ तले दबे सुरेश के सामने जीने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था.

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स्मृति शेष: गुलशन बावरा : मेरे देश की धरती सोना…

वर्ष 1973 में आई फिल्म जंजीर का वह दृश्य याद कीजिए, जिसमें एक जोशीला नौजवान पुलिस इंस्पेक्टर (अमिताभ बच्चन) सड़क हादसे में स्कूली बच्चों की मौत की गवाह एवं चाकू-छुरी में धार रखकर अपना जीवनयापन करने वाली लड़की (जया भादुड़ी) को अपने घर में शरण देता है.

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देश की केंद्रस्थली करौंदी उपेक्षा की शिकार

मध्य प्रदेश का एक छोटा सा गांव करौंदी, देश की भौगोलिक सीमाओं के केंद्र बिन्दु में स्थापित है. यह गांव डॉ. राममनोहर लोहिया, आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों और आन्दोलनों का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बना रहा है.

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नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

हताशा ने न जाने कितनी जानें ली हैं, पर अभी हाल में इसने एक ऐसे नेता को अपना शिकार बनाया है, जिसने आज से 43 साल पहले हथियारों के बल पर उस व्यवस्था को बदलने का सपना देखा था, जो किसानों व मज़दूरों का शोषण करती है, उनका हक़ मारती है. इस हताशा के ताजा शिकार हैं, कानू सान्याल.

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उच्च शिक्षा विभाग बदहाली का शिकार

मध्य प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय में उप कुलपति बनने से बेहतर है किसी होटल का मैनेजर बनना. यह कथन है लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) के टी सतारावाला का. इस कथन की पृष्ठभूमि यह है कि 1978 में सतारावाला को जबलपुर विश्वविद्यालय का उप कुलपति नियुक्त किया गया था.

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बासमती चावल उत्‍पादक किसान ठगी के शिकार

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के किसानों को भरोसा दिलाया है कि उसकी सरकार खेती को लाभप्रद व्यवसाय बनाने के लिए उपाय करेगी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की हमदर्दी पाने के लिए स्वयं को किसान पुत्र तो कहते हैं, लेकिन उन्हें राज्य के किसानों के हितों की ज़रा भी परवाह नहीं है.

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जातिगत आरक्षण : व्यवस्थागत खामियों का प्रतिबिंब

सरकारी एवं ग़ैर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा बार-बार हमारे सामने आता रहा है. ठीक उसी दैत्य की तरह, जो हर बार अपनी राख से ही दोबारा पैदा हो जाता है. इस मुद्दे पर विचार-विमर्श की ज़रूरत है. हमें यह सोचना होगा कि क्या आरक्षण वाकई ज़रूरी है.

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शोषण के शिकार बीड़ी मजदूर

कवि धूमिल की यह कविता बताती है कि आज़ादी के इतने साल बाद श्रम करने वाले आज भी हताश और लाचार हैं. हिंद स्वराज के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी को याद करने में तो देश के सभी लोग लगे हैं लेकिन कुटीर उद्योगों से जुड़े श्रमिकों के हालात बद से बदतर हो गए है.

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अप्रवासी मजदूर बदहाली के शिकार

असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे सैकड़ों अप्रवासी मज़दूरों की जान-माल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है. कटनी ज़िले में विभिन्न उद्योगों से जुड़े देश भर के हज़ारों मज़दूर केवल नियोक्ता के रहमोंकरम पर आश्रित हैं. ज़िला प्रशासन या किसी अन्य संस्था द्वारा इन मज़दूरों को सुरक्षा या संरक्षण देने के लिए कोई नियमावली नहीं बनाई गई है.

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