आंकड़ों का भ्रमजाल है बिहार का बजट

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए बिहार का बजट विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश कर दिया गया है. एक अप्रैल

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कितने समझदार हैं राहुल गांधी

राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं. इस घटना से उनकी मां श्रीमती सोनिया गांधी सबसे ज्यादा खुश हैं.

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पांडुलिपियों में छिपे हैं मिथिला के कई रहस्य

मिथिला के कई अनसुलझे प्राचीन रहस्य आज भी उन पांडुलिपियों में छिपे हुए हैं, जो अभी भी शिक्षण संस्थाओं के

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बिखर रही बापू की विरासत, सभी कर रहे सियासत बापू के चरखे से निकलता सियासत का सूत

चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर बापू को लेकर राजनीतिक दलों की सियासत तेज हो गई है, पर उनके विचारों को

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छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों में 2168 करोड़ रुपए की अनियमितता : ग़रीब प्रदेश में ‘विकास’ की लूट

बात एक ऐसे प्रदेश की जिसे प्रकृति ने समृद्ध-संपन्न बनाया, लेकिन प्रशासनिक अकुशलता, सरकारी काहिली, नीतियों और दूरदृष्टि के अभाव

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

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सुलझ नहीं रहा एसी डीसी बिल का विवाद

ग्यारह हजार दो सौ करोड़ का लेखा-जोखा नहीं मिलने से बिहार सरकार पशोपेश में है. जिला स्तर से लेकर प्रमंडल

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केवल घोषणाओं की है रघुवर सरकार

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी तारीफ में पार्टी के आला नेताओं से अपनी पीठ भले ही थपथपा लें, पर

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विश्व बैंक का नया पैमाना : आय से असहाय

भारत अब विकासशील देश की जगह निम्न मध्यम आय वर्ग वाला देश हो गया है. विश्व बैंक ने जो नए

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नीतीश बजट पर नीतीश निश्चय

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बिहार की महा-गठबंधन सरकार ने अपना पहला बजट पेश

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ऐसे साथियों के होते दुश्मनों की क्या ज़रूरत

सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से सहमति रखने वाली अपनी छोटी-छोटी इकाइयों से परेशानी रहती है. उक्त लोग पार्टी

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पढ़ेगा भारत तो बढ़ेगा इंडिया

मोदी सरकार डिजिटल इंडिया को जो सपना दिखा रही है उसमें हर गांव को ब्राडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य है.

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एक नए अध्याय की शुरुआत

जिस समय देश में सांप्रदायिक सद्भाव कम हो रहा है. लोगों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. ऐसे समय में

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पानी का महत्व समझना होगा

जम्मू-कश्मीर का जिला पुंछ सरहद पर होने की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहता है. यह जिला सीमावर्ती होने की

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पाकिस्तान का भय दिखाकर वोट नहीं मिलने वाला

हमारे देश के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार (नरेंद्र मोदी) कश्मीर में जाकर कहते हैं कि पाकिस्तान भारत के लिए ख़तरा

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देश को जनाभिमुख अर्थव्यवस्था की ज़रूरत

क्या सचमुच देश में एक बदलाव आते-आते भटक गया, रुक गया या समाप्त हो गया? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी

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15वीं लोकसभा और उपेक्षा का सिलसिला जारी

पूर्वोत्तर के लोग सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी एवं रोज़गार के मामले में आज भी सौ साल पीछे हैं. गांवों में

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ज़बानी जमा-खर्च पर लड़े जा रहे चुनाव

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. कहने को इन चुनावों में हर पार्टी ने अपना घोषणा-पत्र जारी

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इनसे सीखिए कैसे हो महिला सशक्तिकरण

जब महिलाओं के अधिकारों को लेकर चारों तऱफ हंगामा मचा हुआ है, तो ऐसे में कुछ सवाल ख़डे होते हैं.

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साई की हर लीला में शिक्षा है

अहमदनगर में दादा साहब नामक एक डॉक्टर था. वह भगवान श्रीराम का परम भक्त था. एक बार वह डॉक्टर अपने

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भारत- फ्रांस, दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत है

फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को किन अर्थों में देखा जाना चाहिए. क्या यह फ्रांस की रणनीति का हिस्सा

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उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

अन्ना हजारे कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए उड़ीसा दौरे पर गए. उनकी अगवानी करने के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर हज़ारों लोग मौजूद थे, जो अन्ना हजारे जिंदाबाद, भ्रष्टाचार हटाओ और उड़ीसा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के नारे लगा रहे थे. अन्ना ने कहा कि हमारा काम बहुत बड़ा है और किसी को भी खुद प्रसिद्धि पाने के लिए यह काम नहीं करना है.

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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मदरसों के बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं

मुसलमान चाहते हैं कि उनके बच्चे आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें, ताकि आज के प्रतिस्पर्द्धा के दौर में वे किसी से पीछे न रहें. सरकार भी चाहती है कि कुछ ऐसा हो, लेकिन समुदाय के बुद्धिजीवियों एवं उलेमाओं को यह म़ंजूर नहीं है.

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स्कूल की हालत कैसे सुधरेगी

सरकारी स्कूल इस देश के करोड़ों बच्चों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं हैं. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फीसदी आबादी के लिए बहुत ही मुश्किल है, जो रोज़ाना 20 रुपये से कम की आमदनी पर अपना जीवन यापन करती है.

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पूर्वी चंपारणः महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, जनसंघर्ष और नेतागिरी

संघर्ष ज़मीन तैयार करता है और फिर उसी ज़मीन पर नेता अपनी राजनीतिक फसल उगाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बने संघर्ष मोर्चा के साथ. चंपारण की जनता केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिन-रात एक करके संघर्ष करती है और जब दिल्ली आती है अपनी बात केंद्र तक पहुंचाने, तो वहां मंच पर मिलते हैं बिहार के वे सारे सांसद, जो संसद में तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन जनता के बीच भाषणबाज़ी का मौक़ा भी नहीं छोड़ते.

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नरेंद्र भूषण संयुक्त सचिव बनेंगे

1992 बैच के आईएएस अधिकारी नरेंद्र भूषण को कृषि एवं सहकारिता विभाग में संयुक्त सचिव बनाया जा सकता है. वह सुभाष चंद्र गर्ग की जगह लेंगे.

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यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं.

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