शिक्षा का अधिकार झूठ और सच का खेल

शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल पहली अप्रैल से देश को शिक्षा का अधिकार देने जा रहे हैं. वह बार-बार कह रहे हैं कि उनकी मंशा शिक्षा व्यवस्था में आमूल बदलाव करने की है. बात सुनने में अच्छी और लुभावनी लगती है. जब बिहार में जेपी की अगुआई में आंदोलन चला था तो अन्य मांगों के अलावा एक प्रमुख मांग शिक्षा में आमूल परिवर्तन की भी थी. ऐसे में कपिल सिब्बल का यह कहना कि वह शिक्षा की पूरी व्यवस्था बदलने जा रहे हैं, सुनने में तो बड़ा अच्छा लगता है, पर सिब्बल जिन लोगों के साथ हैं, जिनके साथ उनका पूरा जीवन गुज़रा है, क्या वे उन्हें ऐसा करने देंगे?

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गणतंत्र दिवस और पद्म पुरस्कारों का विवाद

उदासी की कई वजहों के चलते मौलाना आज़ाद का ख़्याल अक्सर मेरे जेहन में आता है. हम उनकी यादों को नज़रअंदाज़ करते हैं. इसकी दुखद मिसाल दिल्ली की जामा मस्जिद के पास उर्दू पार्क में दिख जाती है. यह बेहद दयनीय स्थिति है कि हम उस निराश बहादुर शाह ज़फ़र को आदर्श मानते हैं, जिसने भारतीय साम्राज्य को अंग्रेज़ों के हाथों गंवा दिया.

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