एक फूल से प्रसन्न हो जाते हैं साई बाबा

शिरडी के साई बाबा गुरु, योगी एवं फकीर थे. हिंदू और मुसलमान उन्हें संत कहते हैं और उनकी भक्ति करते

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साई मुक्ति प्रदान करेंगे

साई इस सारी दुनिया के रखवाले हैं. साई बाबा का सदा श्रद्धापूर्वक स्मरण करना चाहिए. वह अपने भक्तों के कल्याण के

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सदगुरु का सानिध्य

शिरडी में प्रत्येक रविवार को बाज़ार लगता है. निकटवर्ती ग्रामों से लोग आकर वहां रास्तों पर दुकानें लगाते और सौदा

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बाबा का अमृत समान उपदेश : नि:स्वार्थ सेवा करो

बाबा ने कहा था कि जो लोग भेद-भाव भूल कर मेरी सेवा नि:स्वार्थ करते हैं, वे मुझे अत्यंत प्रिय हैं.

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भिक्षावृत्ति की आवश्यकता

ज्यादातर लोग यही सवाल करते हैं कि साई बाबा यदि इतने श्रेष्ठ पुरुष थे, तो उन्होंने भिक्षावृत्ति को क्यों अपनाया.

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खंडूबा पहुंचे साई बाबा

शिरडी में सबसे प्रमुख समाधि मंदिर है, जिसका निर्माण भगवान विट्ठल ने किया था. इस मंदिर का वास्तविक नाम भुट्टीवाड़ा

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बाबा का जीवन : और चरित्र

भक्तों की साई बाबा में अटूट आस्था थी. उनके लिए शिरडी एक दूसरा पंढरपुर, जगन्नाथपुरी, द्वारका, बनारस (काशी), महाकालेश्‍वर एवं

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शिरडी साईं बाबा संस्थान में घोटाला

एक मुहावरा है, जहां धन एकत्र होगा, वहां चोर की नज़र पड़ेगी ही. शिरडी के साईं बाबा तो फकीर थे और फकीरी में ही उन्होंने सारा जीवन गुजार दिया. हां, उन्होंने गरीब-लाचार लोगों की मदद करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी.

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दान का महत्व

एक बार शिरडी के साई बाबा से उनकी परमभक्तलक्ष्मी ने पूछा, बाबा द्वारका माई में हर समय धूनी जलती रहती है. सुबह-शाम ग़रीबों की भूख मिटाती यह रसोई क्या आपके लिए दो रोटी नहीं दे सकती?

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श्रद्धा और धैर्य बहुत ज़रूरी

शिरडी पहुंचने के प्रथम दिन ही बाला साहेब और हेमाड पंत के बीच गुरु की आवश्यकता पर वाद-विवाद छिड़ गया. हेमाड पंत इस वाक़िये को कुछ इस प्रकार बयां करते हैं. उस समय मेरा मत था कि स्वतंत्रता त्याग कर पराधीन क्यों होना चाहिए और जब कर्म करना ही पड़ता है, तब गुरु की आवश्यकता ही कहां रही. प्रत्येक को पूर्ण प्रयत्न कर स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए.

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साई बाबा और सोमदेव स्वामी

अब एक अन्य संशयालु व्यक्ति की कथा सुनिए, जो बाबा की परीक्षा लेने आया था. काका साहेब दीक्षित के भ्राताश्री भाई जी नागपुर में रहते थे. जब वह 1906 में हिमालय गए थे, तब उनका गंगोत्री घाटी के नीचे हरिद्वार के समीप उत्तर काशी में एक सोमदेव स्वामी से परिचय हो गया. दोनों ने एक-दूसरे के पते लिख लिए. पांच वर्ष पश्चात सोमदेव स्वामी नागपुर आए और भाई जी के यहां ठहरे.

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श्रीमती तर्खड और साई बाबा

एक बार श्रीमती तर्खड ने तीन वस्तुएं यानी भरित (भुर्ता यानी मसाला मिश्रित भुना हुआ बैगन और दही), काचर्या (बैगन के गोल टुकड़े घी में तले हुए) और पेड़ा (मिठाई) बाबा के लिए भेजीं. बाबा ने उन्हें किस प्रकार स्वीकार किया, अब इसे देखेंगे. बांद्रा के श्री रघुवीर भास्कर पुरंदरे बाबा के परम भक्त थे.

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सबका मालिक एक : साईं बाबा

शिरडी ही साई बाबा है और साई बाबा ही शिरडी, एक-दूसरे का प्रत्यक्ष पर्यायवाची होने के साथ-साथ यह आध्यात्मिक भी है. साई शब्द के उच्चारण से आशा और आदर का भाव उत्पन्न होता है. साई बाबा को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है.

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व्रत कथा और पूजन विधि

साई बाबा देश के सबसे महान संत हैं और पूज्यनीय संतों में सर्वोपरि हैं. शिरडी के साई बाबा की चमत्कारी शक्तियों की बहुत सी कथाएं हैं. साथ ही साई बाबा के भक्तों की संख्या सबसे ज़्यादा है. साई बाबा के पूजन के लिए वीरवार यानी गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है. साई व्रत कोई भी कर सकता है चाहे बच्चा हो या बुज़ुर्ग.

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