मैच्योर शिशु

फिरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) की रिंकी नामक महिला ने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसके 32 दांत थे. नवजात शिशु में जन्म के व़क्त 32 दांत होने का यह पहला मामला है. इस बच्चे को देखने के लिए अस्पताल में भीड़ लग गई. चिकित्सक यह अनहोनी घटना देखकर हैरान हैं.

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डायरिया से कैसे बचें

भारत में शिशु मृत्यु दर के ज़्यादा होने के कई कारण हैं. डायरिया भी एक बड़ा कारण है. बच्चों के विकास और उनके कल्याण के लिए कार्यरत संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनीसेफ ने कहा है कि भारत में डायरिया से प्रतिदिन 1000 बच्चों की मौत हो जाती है.

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एक साथ १२ बच्चे

अभी आप जो पढ़ेंगे, वह निश्चित तौर पर आपको चौंका देगा, क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है. ट्यूनीशिया की एक महिला एक साथ 12 बच्चों को जन्म देकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है. गल्फ न्यूज़ वेबसाइट में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इस 30 वर्षीय महिला का इससे पहले दो बार गर्भपात हो चुका है. दक्षिण-पश्चिम ट्यूनीशिया के गाफसा की मूल निवासी यह महिला अरबी भाषा की अध्यापिका है.

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साथ धड़कते हैं दिल

मां और बच्चे का रिश्ता वैसे तो अनोखा होता ही है, लेकिन गर्भावस्था में शिशु का दिल मां के दिल के साथ धड़कता है. इस बात का खुलासा वैज्ञानिकों ने किया है. उनका मानना है कि जब गर्भवती महिला लयबद्ध ढंग से सांस लेती है तो उसका और भ्रूण का दिल साथ-साथ धड़कता है.

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स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में लिंगभेदः नजरिये में बदलाव की जरूरत

देश में बैडमिंटन की मशहूर खिलाड़ी सायना नेहवाल जब पैदा हुई थीं तो उनकी दादी एक महीने तक उन्हें देखने नहीं गईं, क्योंकि उन्हें पोती नहीं, पोते की हसरत थी. भारत के पितृसत्तात्मक समाज में लड़कियों के प्रति यही नज़रिया उनके विकास में सबसे बड़ी बाधा है, साथ ही उन्हें ऐसी सुविधाओं के उपभोग से भी दूर करता है, जो देश में आम नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं.

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नवजात शिशुओं की भाषा

यूं तो शिशु जन्म से बहुत बाद में बोलना सीखता है, मगर उसके द्वारा भाषा को सीखने की प्रक्रिया गर्भावस्था के दौरान ही शुरू हो जाती है और जन्म के बाद उसके रोने की ध्वनि में उसके माता-पिता की मातृभाषा का असर देखा जा सकता है. ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि एक नया शोध कहता है.

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सार-संक्षेप

केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार और उसे रोचक बनाने के प्रयास में अरबों रुपए ख़र्च करने के बाद भी राज्य में सैटेलाईट के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा (एडूसेट) की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई है. इस योजना को सर्वप्रथम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीधी ज़िले में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने प्रारंभ किया था.

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कुपोषण हजारों बच्‍चों को लील रहा है

मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष 30 हजार बच्चे अपना पहला जन्मदिन मनाने से पहले ही बेमौत मर जाते हैं. ये वो अभागे बच्चे हैं, जो जन्म से ही कुपोषण के शिकार होते हैं और जन्म के बाद पोषण आहार की कमी के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं.

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