एनडीटीवी-सीबीआई छापा-राम गयो, रावण गयो, जाके बहु परिवार : अरुण शौरी

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहां तख़्तनशीं था, उसको भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था. दिल्ली

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इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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हंस चुनेगा दाना-तिनका कौआ मोती खाएगा

अजीब इत्ते़फाक़ है. कामिनी जायसवाल ने इस पीआईएल को रजिस्ट्रार के पास जमा किया और अपने केबिन में लौट आईं, इतनी ही देर में यह पीआईएल मीडिया में लीक हो गई. उन्हें किसी ने बताया कि इसमें क्या है, यह मीडिया के लोगों को पता चल चुका है. जब इस पीआईएल की सुनवाई शुरु हुई तो जज ने पहला सवाल कामिनी जायसवाल से पूछा कि किसने लीक की.

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हमें अपने देश का भरोसा बरक़रार रखना है

पिछले हफ्ते मैंने चौथी दुनिया की रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस और शेखर गुप्ता की पत्रकारिता पर कई सवाल उठाए. उन सवालों को उठाते हुए मुझे हमेशा याद रहा कि पिछले कुछ सालों में इंडियन एक्सप्रेस ने कैसी पत्रकारिता की और शेखर गुप्ता ने अपना आज का मुक़ाम कितनी मेहनत से बनाया है, लेकिन सवाल तो सवाल हैं और कभी ये सवाल इतने बड़े आकार में हमारे सामने आकर खड़े हो जाते हैं कि हमें न चाहते हुए भी वह लिखना पड़ता है, जो नहीं लिखना चाहिए.

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भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

बीते चार अप्रैल को इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर पूरे पन्ने की रिपोर्ट छपी, जिसमें देश को बताया गया कि 16 जनवरी को भारतीय सेना ने विद्रोह करने की तैयारी कर ली थी. इस रिपोर्ट से लगा कि भारतीय सेना देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर फौजी तानाशाही लाना चाहती है. इस रिपोर्ट ने सारे देश में न केवल हलचल पैदा की, बल्कि सेना को लेकर शंका का वातावरण भी पैदा कर दिया. सभी चैनलों पर यह खबर चलने लगी, लेकिन तीन घंटे बीतते-बीतते सा़फ हो गया कि यह रिपोर्ट झूठी है, बकवास है, किसी खास नापाक इरादे से छापी गई है और इसे छपवाने के पीछे एक बड़ा गैंग है, जो हिंदुस्तान में लोकतंत्र को पसंद नहीं करता.

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