प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय की नई टीम विवाद और असंतोष की बड़ी पोटली में तब्दील हो गई है. हद तो यह है कि पार्टी के बड़े नेता एक-दूसरे को झूठा बताने में लग गए हैं. पटना में यह मामला सुलझना नहीं था, इसलिए दिल्ली में बड़े नेताओं की चौखट पर इसकी गूंज सुनाई पड़ [...]
Tags: अध्यक्ष पद, कर्नाटक, दिल्ली, पशुपालन मंत्री, बिहार, भाजपा, मंगल पांडेय, महामंत्री पद, रवींद्र रंजन, विधायक, शत्रुघ्न सिन्हा, संकट, समाधान, सी पी ठाकुर, सुशील मोदी Posted in राजनीति, राज्य, स्टोरी-6 by Author: सरोज सिंह | No Comments » | Read More... |
यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.
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उपजाऊ शक्ति के लगातार क्षरण से भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है. सूखा, बाढ़, लवणीयता, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर में गिरावट आने से सोना उगलने वाली उपजाऊ धरती मरुस्थल का रूप धारण करती जा रही है.
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दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी पत्रकारिता साल दर साल परिवर्तित हुई है. अगर हम 1947 में देश को मिली आज़ादी के बाद पिछले 65 सालों की बात करें तो पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हुए हैं. 1995 के मध्य में सेटेलाइट टीवी हमारे देश में आया. उसके बाद से 24 घंटे चलाए जाने वाले समाचार चैनलों ने अपना एक ब्रांड बनाया है, जिसमें एक ही समाचार बार-बार दिखाया जाता है.
Tags: . मीडिया, India, Journalism, MP, channels, crisis, journalist, news, reporting, television, चैनल, टेलीविजन, पत्रकार, पत्रकारिता, भारतीय, रिपोर्टिंग, संकट, समाचार, सांसद Posted in कानून और व्यवस्था, मीडिया, राजनीति, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: कमल मोरारका | 2 Comments » | Read More... |
सोलह मार्च को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बजट पेश करेंगे. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद पेश किए जा रहे इस बजट की रूपरेखा पर हाल में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के घर पर एक मीटिंग हुई. दो घंटे के बाद मीडिया को स़िर्फ इतना बताया गया कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया जाएगा, लेकिन इस मीटिंग के बाद जितने भी नेता मुखर्जी के घर से बाहर निकल रहे थे, उनके चेहरे से पता चल रहा था कि आगे क्या होने वाला है.
Tags: 2012, Budget, Congress, Corruption, Finance Minister, Inflation, Manmohan Singh, Pranab Mukherjee, Public, System, crisis, financial, government, law, politics, poor, आर्थिक, क़ानून, कांग्रेस, गरीब, जनता, प्रणव मुखर्जी, बजट, भ्रष्टाचार, मनमोहन सिंह, महंगाई, राजनीतिक, वित्त मंत्री, व्यवस्था, संकट, सरकार, २०१२ Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: डा. मनीष कुमार | 2 Comments » | Read More... |
ग्रीस की आर्थिक बदहाली ने यूरोपीय देशों की परेशानी बढ़ा दी है. यूरो जोन के देश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिकी वित्तीय संकट से विश्व पूरी तरह उबर भी नहीं पाया कि एक और वित्तीय संकट ने दरवाजे पर दस्तक दे दी.
Tags: American, Greece, atrophy, crisis, economic, financial, अमेरिकी, आर्थिक, ग्रीस, बदहाली, वित्तीय, संकट Posted in कानून और व्यवस्था, राजनीति, विदेश, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: राजीव कुमार | No Comments » | Read More... |
चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.
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आज देश में राजनीति, खेल, आर्थिक, महिला जगत, घर-परिवार, स्वास्थ्य, ऑटो मोबाइल, कंप्यूटर, पर्यावरण, सूचना प्रौद्योगिकी और फिल्म आदि विषयों पर अनेक पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं, किंतु विज्ञान एक ऐसा विषय है, जिसमें सरकारी पहल के बावजूद बहुत प्रगति नहीं हुई.
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ग्रीष्म ॠतु की दस्तक हो चुकी है. पूरे विश्व में निरंतर बढ़ती जा रही गर्मी को दुनिया तरह-तरह के नाम दे रही है. लोग इसे मौसम का बदलता मिजाज़ बताते हैं, वहीं पर्यावरण विशेषज्ञ हर वर्ष बढ़ती जाने वाली गर्मी को ग्लोबल वार्मिंग की संज्ञा दे रहे हैं.
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश आज जल संकट की ज़बरदस्त मार झेल रहा है. यहां आज पीने और कृषि दोनों के लिए पानी की कमी है. जब पीने को पानी नहीं रहेगा और न ही कृषि के लिए, तो जनजीवन का क्या होगा? आज इसी सवाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता दो-दो हाथ कर रही है.
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बिजली की बढ़ती मांग और उस अनुपात में लगातार गिरता उत्पादन, यही है ऊर्जा प्रदेश बनने का सपना संजोए उत्तराखंड की सीधी-सपाट पहचान. मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए राज्य को हर साल सर्दी के दिनों में रोज तक़रीबन पौने दो करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ती है.
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माता सीता के शाप से शापित होने के बावजूद पौराणिक काल से पितरों को मोक्ष दिलाती आ रही गया की पवित्र फल्गू नदी का वजूद आज ख़तरे में है. देश-विदेश से लाखों लोग प्रति वर्ष इसे नमन करने आते हैं.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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