Happy Birthday Akshay : जन्मदिन के मौके पर अक्षय ने दिया फैंस को गोल्ड

नई दिल्ली (प्रवीण कुमार): एक्शन से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक के लिए अक्षय कुमार आज के दौर में सबसे बड़े

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जब तोप मुकाबिल हो : समाचारों का स्थानीयकरण बेहद चिंताजनक

कुछ अख़बारों ने पैसे लेकर चुनाव में ख़बरें छापने की परंपरा क्या चलाई कि हर अख़बार को आम पाठक शक

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही हो रहा है.

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रामदेव मुस्लिमों के लिए लड़ेंगे

भ्रष्टाचार का मतलब केवल घोटालों से नहीं है. भ्रष्टाचार का मतलब लोगों के अधिकारों की प्राप्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करना भी है. काले धन को देश में वापस लाने के मुद्दे पर सरकार से लड़ रहे बाबा रामदेव और जन लोकपाल लागू कराने के लिए संघर्ष कर रहे अन्ना हज़ारे के बीच एकता स्थापित हो गई. दोनों को यह समझ में आ गया कि उनका साझा शत्रु एक है और अगर देश को भ्रष्टाचार रूपी दानव के बढ़ते प्रभाव से मुक्त कराना है तो साथ आना ही पड़ेगा.

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अदम गोंडवी : आम आदमी का शायर

शब्द-शब्द संघर्ष करने वाले साहित्य जगत के शिल्पकार रामनाथ सिंह उ़र्फ अदम गोंडवी नहीं रहे. ग़ुरबत में ज़िंदगी ग़ुजार कर साहित्य की सेवा करने वाले अदम गोंडवी ने अभाव में ज़िंदगी के ताप को महसूस कराने के लिए अपने गांव आटा परसपुर (गोंडा, उत्तर प्रदेश) की ओर से साहित्यानुरागियों का ध्यान खींचने के लिए क़लम को तलवार बनाते हुए कहा था

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विदेशी आर्थिक सहायता शुद्ध स्वार्थ से प्रेरित

कोई भी पूंजीवादी उद्योगपति, किसी भी देश का वासी क्यों न हो, अपनी पूंजी तब ही लगाएगा, जब उसे उसकी सुरक्षा और उससे लाभ होने का पूरा विश्वास हो. अगर भारत सरकार की नीति उद्योगों के राष्ट्रीयकरण की रही तो कोई भी बाहरी पूंजीवादी अपना एक रुपया भी भारत में नहीं लगाएगा.

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