विश्व बैंक का नया पैमाना : आय से असहाय

भारत अब विकासशील देश की जगह निम्न मध्यम आय वर्ग वाला देश हो गया है. विश्व बैंक ने जो नए

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प्रचार नहीं, लोगों का सपना पूरा कीजिए

मोदी सरकार के दो साल पूरे हो गए. दो साल पूरे होने पर जश्न मनाना एक परंपरा भी है और

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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इंडिया इन ट्रांजशिनः मीडिया का नियमन मॉडुलर और ज़मीनी दृष्टिकोण

लगातार जटिल और भ्रामक होते मीडिया परिदृश्य ने भारत में मीडिया नीति के उलझे ईको सिस्टम के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. संचार की उन्नत प्रौद्योगिकी ने मूल रूप से उन तौर-तरीक़ों को बदल कर रख दिया है, जिनके माध्यम से सूचनाओं और अर्थों को सम्प्रेषित, संगठित और प्राप्त किया जाता है. इस नई प्रगति ने आज भी उतने ही लोकप्रिय परंपरागत मीडिया के साथ-साथ मीडिया संबंधी वर्तमान नीतिगत दृष्टि पर भी प्रगति के तामझाम को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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बड़े पत्रकार, बड़े दलाल-II

नीरा राडिया के बरखा दत्त एवं वीर सांघवी जैसे बड़े पत्रकारों के साथ गठजोड़ के बारे में चौथी दुनिया ने महीनों पहले अपने पाठकों को बताया था कि कैसे सुपर दलाल नीरा राडिया ने इन प्रसिद्ध पत्रकारों का इस्तेमाल कुछ कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने और ए राजा को संचार मंत्री बनवाने के लिए किया. इसके बाद चौथी दुनिया के पास कई पाठकों के पत्र आए, जो नीरा राडिया एवं प्रभु चावला, वीर सांघवी एवं बरखा दत्त जैसे प्रसिद्ध पत्रकारों के बीच हुई बातचीत को सुनना चाहते थे. हमने इनके बीच हुई बातचीत को अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध टेप से साभार लिया है. प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसके पास इन तीनों पत्रकारों और नीरा राडिया के बीच हुई बातचीत के हज़ारों घंटे के टेप उपलब्ध हैं.

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नैनो सेटेलाइट जुगनू

छह मार्च, 2010 आईआईटी कानपुर के इतिहास का सबसे सुनहरा दिन था, क्योंकि संस्थान ने इसी दिन अपनी स्थापना के 50 बरस पूरे किए. यह ऐतिहासिक दिन आईआईटी कानपुर के लिए उपलब्धियों के लिहाज़ से भी यादगार बना. संस्थान ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक प्रभावी क़दम ब़ढाया.

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