प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल: काला कानून, काली नीयत

उदारीकरण का दौर शुरू होते ही जब सवा सौ साल पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून ने अपना असर दिखाना शुरू किया, तब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह मुद्दा अपनी छवि बनाने के एक अवसर के रूप में दिखा. नतीजतन, अपनी तऱफ से उन्होंने इस कानून में यथाशीघ्र संशोधन कराने की घोषणा कर दी. घोषणा चूंकि राहुल गांधी ने की थी, इसलिए उस पर संशोधन का काम भी शुरू हो गया.

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भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास व पुनर्स्‍थापन अधिनियम (संशोधन) 2011 : नई हांडी में पुरानी खिचड़ी

नए भूमि अधिग्रहण क़ानून को लेकर देश भर की निगाहें संसद और केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं. जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलित कई राज्यों में सैकड़ों ग़रीब किसानों एवं आदिवासियों को पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा. उनका दोष स़िर्फ इतना था कि वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पुश्तैनी ज़मीन देने के लिए तैयार नहीं थे. ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 बनाया था.

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सांप्रदायिक दंगा निरोधक विधेयकः मौजूदा कानून कहीं से कमतर नहीं

भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के बावजूद देश में टाडा जैसे क़ानून लागू हुए, मगर अपराध फैलते ही रहे. परिणाम यह हुआ कि जनता की मांग के मद्देनज़र न्याय की प्राप्ति के लिए 2005 और 2009 में विभिन्न स़िफारिशों एवं संशोधनों पर आधारित नया विधेयक प्रस्तुत किया गया. अब 2011 में पुराने क़ानूनों में संशोधन करके नया बिल पेश कर दिया गया है.

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पाकिस्तान में स्थानीय निकायों की बदहाली

विकेंद्रीकरण संघीय व्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करता है, लेकिन पाकिस्तान में तो विकेंद्रीरण कहीं दिखता ही नहीं है. सवाल यह है कि क्या राज्य सभी शक्तियां अपने पास रखने का अधिकारी है और वह स्थानीय निकायों को कोई भी अधिकार देना अस्वीकार कर सकता है? 18वें संविधान संशोधन के अनुसार, अनुच्छेद 270-एए का क्लॉज-1 लोकल गवर्नमेंट ऑर्डिनेंस 2001 को निरस्त करता है.

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सांप्रदायिक दंगे रोकने के लिए कानून नहीं, इंसाफ की जरुरत

भारत दुनिया का एक मज़बूत लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसने सभी महत्वपूर्ण धर्मों के मानने वालों को अपने यहां शरण दी. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और आध्यात्मिक रहनुमाओं ने इस सरज़मीं को अपना आशियाना बनाया और पूरा जीवन मानवता के कल्याण, शांति और भाईचारे के लिए अर्पित कर दिया.

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अदालत, अधिग्रहण और आम आदमी : सुप्रिम कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है

जमीन वह संपत्ति है, जो एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को बस हस्तांतरित करती है यानी कोई इसका मालिक नहीं होता. हां, केयर टेकर कह सकते हैं. ज़मीन और किसान के बीच कुछ ऐसा ही संबंध था. लेकिन 90 के दशक की शुरुआत में उदारीकरण और निजीकरण की आंधी आने के साथ ही ज़मीन और किसान के इस सनातन संबंध को कमज़ोर बनाने का प्रयास किया जाने लगा, जो सरकार, ब्यूरोक्रेसी और उद्योगपतियों की साठगांठ का नतीजा था.

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जनगणना के साथ नज़रिया बदलने की जरुरत

पच्चीस फीट ऊंची रस्सी पर चलता एक इंसान, सड़क के किनारे करतब दिखाता एक बच्चा. शहर के किनारे तंबू डाले कुछ परिवार. आज यहां, कल कहीं और. बिस्तर के नाम पर ज़मीन, छत आसमान. महीने-दो महीने पर शहर बदल जाता है और शायद ज़िंदगी के रंग भी, लेकिन यह कहानी सैकड़ों सालों से बदस्तूर जारी है. यह कहानी है भारत के उन 6 करोड़ घुमंतू और विमुक्त जनजातियों की, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में यायावर कहते हैं.

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वामपंथियों का लोकतांत्रिक स्टालिनवाद

इस बात पर कोई बाजी नहीं लगाई गई कि पश्चिम बंगाल में मिली बुरी हार के बाद सीपीएम के कितने नेता इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे और इस्ती़फा देंगे. ज़ाहिर है, कम्युनिस्ट पार्टी इस तरीक़े से काम भी नहीं करती. भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का अस्तित्व थोड़ा दूसरे ढंग का है. यहां के कम्युनिस्टों ने लोकतांत्रिक पद्धति को स्वीकारा, जबकि दुनिया में कहीं भी कम्युनिस्टों ने इस प्रक्रिया को नहीं स्वीकारा, लेकिन जब बात पार्टी के आंतरिक संगठन की आती है तो वहां स्टालिनवाद का ही शासन दिखता है.

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सिर्फ नोएडा नहीं पूरे देश में किसान हिंसक हो सकते हैं

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की नीतियां कुछ और हैं और राहुल गांधी कुछ और बात करते हैं. सरकार भूमि अधिग्रहण से संबंधित वर्षों पुराने कानून में संशोधन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाती और राहुल गांधी उसी कानून के तहत होने वाले भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हैं, लेकिन सिर्फ वहीं, जहां गैर कांग्रेसी दलों की सरकार है.

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समाजवाद की पृष्ठभूमि

भारत को आज़ाद हुए एक युग बीत गया है. सरकार की आर्थिक नीति समाजवादी व्यवस्था पर आधारित है. कांग्रेस, सोशलिस्ट, प्रजा-समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, यहां तक कि नवनिर्मित स्वतंत्र पार्टी और जनसंघ तक भी समाजवादी अर्थव्यवस्था की हिमायत करते हैं. हर पार्टी के नेता यह दावा करते हैं कि उनकी ही कल्पित समाजवादी व्यवस्था सही है, दूसरी पार्टियों की न

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पीएमओ- 10 जनपथ बढ़ रही है दूरी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब सोनिया गांधी की बातों को नज़रअंदाज़ करने लगे हैं. मनमोहन सिंह के लिए अब सोनिया गांधी की बातों का कोई मतलब नहीं है. बात थोड़ा चौंकाने वाली है, लेकिन सच है. अब यूपीए सरकार में दस जनपथ का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाता. पहले कहा जाता था कि प्रधानमंत्री ऐसा कोई काम नहीं करते, जो यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को पसंद न हो.

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भाजपा में भूचाल

इस साल चुनावी अग्निपरीक्षा से गुजरने वाली भाजपा की तैयारियों पर ग्रहण लगने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की शाखा खोलने के मसले ने भाजपा में भूचाल ला दिया है. पटना की सड़कों पर जब इसका विरोध करने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र उतरे तो पुलिस के डंडों ने यह संकेत दिया कि नीतीश सरकार अपने क़दम पीछे नहीं खींचेगी.

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