राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. राजनीतिक दलों और देश के महान नेताओं की कृपा से यह खतरा हमारी चौखट पर दस्तक दे रहा है, लेकिन वे देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं.

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

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रॉबर्ट वाड्रा को आरोपों का सामना करना चाहिए

रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.

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गुजरात जीतने को कांग्रेस बेकरार

इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए राज्य की हर राजनीतिक पार्टी कमर कस चुकी है. एक ओर जहां सत्तारूढ़ भाजपा से अलग होकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन पार्टी नामक अपनी अलग पार्टी बनाकर वर्तमान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की परेशानियां बढ़ा दी हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी भी गुजरात का गढ़ जीतने के लिए कोई कोताही नहीं बरत रही है.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

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क्या स्वयं को बनाए रखना एक रणनीति है?

महान फ्रांसीसी कूटनीतिज्ञ टेलेरां से जब पूछा गया कि उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति के समय क्या किया, तो उनका उत्तर था कि उन्होंने अपना अस्तित्व बचाए रखा. अपने तीसरे साल में यूपीए-2 सरकार के लिए यह सबसे बेहतर उत्तर हो सकता है. 2014 तक वह दस साल पूरे कर लेगी, जो कि नरसिम्हाराव और राजीव गांधी के कार्यकाल से अधिक है.

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ओलांद के हाथों में फ्रांस की बागडोर

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है. सरकोज़ी चुनाव हार गए हैं और फ्रांस्वा ओलांद अब देश के नए राष्ट्रपति होंगे. सोशलिस्ट पार्टी के ओलांद ने फ्रांस की जनता से कुछ वायदे किए हैं. अब उन वायदों को पूरा करना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी. सरकोज़ी की हार की सबसे बड़ी वजह यूरो ज़ोन का आर्थिक संकट और उससे निपटने में नाकामयाबी है. यूरोप के राष्ट्र आर्थिक संकट से बाहर आने के लिए मितव्ययता की नीति अपना रहे हैं.

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क्षेत्रीय दलों का गठबंधन एक विकल्प है

जब जवाहर लाल नेहरू सत्तर साल के हो गए तो उन्होंने सेवानिवृत होना चाहा. लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया. उनके अंतिम पांच साल का़फी कठिनाइयों भरे रहे. विशेष तौर पर चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने के मुद्दे और रक्षा मंत्री पर लगने वाले आरोपों के कारण. नेहरू की ताक़त खत्म होने के साथ ही क्षेत्रीय नेताओं के सिंडिकेट का उदय हुआ.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं का स्थानांतरण

उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बड़े पैमाने पर बाबुओं का स्थानांतरण शुरू हो गया है. बसपा के नज़दीकी कई बाबुओं का स्थानांतरण किया जा रहा है और उनकी जगह समाजवादी पार्टी के नज़दीक रहे बाबुओं को लाया जा रहा है. सरकार ने जावेद उस्मानी को मुख्य सचिव बनाने का फैसला किया है.

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भारत-पाकिस्तान : अमन क़ायम करने की मुहिम

इस समय पाकिस्तान पर फौजी हुकूमत द्वारा सत्ता पलट के साये बुरी तरह मंडरा रहे हैं. पाकिस्तान क्या अपने देश में लोकतंत्र की बलि चढ़ाएगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा. पिछले दिनों पाकिस्तान-इंडिया फोरम फोर पीस एंड डेमोक्रेसी द्वारा दोनों देशों की जनता के प्रतिनिधियों ने अमन और दोस्ती का पैग़ाम देते हुए एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया.

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बिहार : नीतीश की सभा में कुर्सियां क्यों उछलीं

सत्ता की राजनीति में कुर्सियों का हिलना-डुलना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में अगर कुर्सियां उछाली जाने लगें तो उसे ख़तरे की घंटी ही समझिए. सेवा यात्रा के दौरान बिक्रमगंज में मुख्यमंत्री की सभा में जब नाराज़ लोगों ने कुर्सियां लहरानी शुरू कर दीं तो सभी अवाक रह गए. पटना में फोन की घंटियां घनघनाने लगीं.

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कांग्रेस पार्टी कंफ्यूजन में है

मंत्रिमंडल में हुए व्यापक फेरबदल से जनता को कोई फायदा नहीं हुआ. उल्टा यह संदेश गया है कि सरकार या कांग्रेस पार्टी कंफ्यूजन में है. उसके सामने कोई रोडमैप नहीं है. देश को चलाने के लिए किस तरह के लोग ज़रूरी हैं और पार्टी को चुनाव में जिताने के लिए किस तरह के लोग चाहिए, यह भी कांग्रेस के सामने कुछ साफ़ नहीं है.

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शांति स्थापना में महिलाओं की भूमिका

क्या पुरुषों की तुलना में महिलाएं शांति स्थापना में बेहतर भूमिका अदा कर सकती हैं? कई स्त्रीवादियों का मानना है कि शांति स्थापना के कार्य लिए पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कहीं अधिक उपयुक्त हैं. क्या महिलाओं में वे कमज़ोरियां नहीं होतीं, जो पुरुषों में होती हैं? क्या वे पुरुषों से बेहतर शासक साबित हुई हैं? वे कौन से कारक हैं, जो महिलाओं को पुरुषों से बेहतर शांति कार्यकर्ता बनाते हैं?

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मुस्लिम समाज का दर्द

बिहार में आश्चर्यजनक चीजें होती हैं. मुसलमानों की समस्याओं पर सेमिनार हो, वक्ता राजनीतिक दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हों और कोई आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की बात न करे, अगर कोई संघ परिवार और बजरंग दल को दोषी और अपराधी न बताए, अगर बाबरी मस्जिद का मुद्दा न उठे, अगर कोई भावनात्मक भाषण न दे, अगर मौलाना और मौलवी इस्लाम पर आने वाले खतरे को छोड़, शिक्षा और नौकरी की बातें करने लगें, तो हैरानी होती है.

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राष्ट्रीय दल बनाम क्षेत्रीय पार्टियां

चीन हमेशा से एक संगठित देश रहा है, जहां सारी सत्ता और ताकत एक जगह केंद्रीयकृत रही है. हां, बीच में कुछ समय के लिए क्षेत्रीय विद्रोह भी हुए. इसके मुक़ाबले भारत की स्थिति अलग रही है. भारत में मज़बूत केंद्रीय सत्ता कम ही समय के लिए रही. जैसे मौर्य, गुप्त या मुगल साम्राज्य.

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बिहार पंचायत चुनावः सत्ता नहीं, भ्रष्टाचार का विकेंद्रीकरण

बिहार में पंचायत चुनाव अंतिम चरण में पहुंच चुका है. लगभग ढाई लाख से ज़्यादा जनप्रतिनिधियों, जिनमें आठ हज़ार से ज़्यादा मुखिया के पद हैं, के चुनाव के लिए मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं.

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आइवरी कोस्ट: सत्ता की लड़ाई में पिसी जनता

आइवरी कोस्ट के निर्वाचित राष्ट्रपति अलासान वाएतरा के समर्थक भारी हथियारों के साथ अबिजान में घूम रहे हैं. साथ ही आइवरी कोस्ट में संयुक्त राष्ट्र के हेलीकॉप्टरों ने भी निवर्तमान राष्ट्रपति लोरांग बैग्बो की सेनाओं पर गोलीबारी शुरू कर दी है. आइवरी कोस्ट में पिछले साल 28 नवंबर को हुए चुनावों में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों, अलासान वाएतरा और लोरांग बैग्बो ने अपनी-अपनी जीत का ऐलान किया था.

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उत्तर प्रदेशः सत्ता के दावेदारों में घमासान

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पूर्व ही राजनीतिक तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. सत्ता की दावेदारी करने वाले प्रमुख राजनीतिक दलों ने सड़कों पर उतर कर अपनी राजनीतिक सक्रियता का प्रमाण देना शुरू कर दिया है.

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जनता मुफ्तखोरी नही विकास चाहती है

लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को लेकर एक बार चर्चिल ने कहा था कि विपक्ष का काम किसी भी तरह सत्ताधारी दल को सत्ता से हटाकर ़खुद क़ाबिज़ होना होता है. बहरहाल, लोकतंत्र का यही चरित्र आधुनिक समय का एक भद्दा मज़ाक़ बनकर रह गया है. चुनावी राजनीति का चरित्र दिनोदिन गंदा होता जा रहा है.

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उत्तर प्रदेशः सत्ता के दावेदारों में घमासान

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पूर्व ही राजनीतिक तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. सत्ता की दावेदारी करने वाले प्रमुख राजनीतिक दलों ने सड़कों पर उतर कर अपनी राजनीतिक सक्रियता का प्रमाण देना शुरू कर दिया है.

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असमः कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी

असम में जहां कांग्रेस सत्ता बरक़रार रखने के लिए चुनाव मुहिम में पूरी ताक़त झोंक देना चाहती है, वहीं भारतीय जनता पार्टी किसी भी सूरत में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने की रणनीति बनाने में जुटी है. यहां मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की अगुवाई वाला कांग्रेस-बोडो पीपुल्स फ्रंट गठबंधन, भारतीय जनता पार्टी-असम गण परिषद का अनौपचारिक गठबंधन और बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाला ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट आदि चुनाव मैदान में हैं.

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देश का राजनीतिक ढांचा बचाने की ज़रूरत

सारे देश में अपने अपहरण से मशहूर हुए देश के प्रथम आईएएस अधिकारी विनील कृष्णा ने बयान दिया है कि अगर विकास का ढांचा नहीं सुधारा गया और लोगों तक विकास का नाम नहीं पहुंचा तो वह दिन दूर नहीं, जब अधिकारी या सत्ता में बैठे लोग, जनता के गुस्से का शिकार होंगे.

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इस्‍लामी दुनिया के महानायक

बात लीबिया में हो रही जनतांत्रिक क्रांति की. यहां प्रति व्यक्ति आय 13400 अमरीकी डॉलर है. ज़ाहिर है, यह देश ग़रीब नहीं है. लीबिया यूरोप का सबसे बड़ा तेल और गैस का सप्लायर है. गद्दा़फी ने लोगों को भरोसा दिलाया कि लीबिया के मानव संसाधनों को बढ़ावा दिया जाएगा.

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अरब देशों में परिवर्तन का दौर

मिस्र और ट्यूनीशिया का हालिया घटनाक्रम सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आया. शायद ही किसी को यह उम्मीद रही होगी कि इन देशों में अचानक जनाक्रोश का विस्फोट हो जाएगा, परंतु ज़मीनी हक़ीक़त जानने-समझने वाले लोगों के लिए इन दो देशों में हुई जनक्रांति अनापेक्षित नहीं थी.

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मिस्र का सत्‍ता परिवर्तनः तानाशाही नहीं चलेगी

मिस्र के इतिहास में 11 फरवरी, 2011 का दिन उस समय दर्ज हो गया, जब देश की सत्ता पर 30 वर्षों तक क़ाबिज रहने वाले 82 वर्षीय राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को भारी जनाक्रोश के चलते राजधानी काहिरा स्थित अपना आलीशान महल अर्थात राष्ट्रपति भवन छोड़कर शर्म-अल-शेख़ भागना पड़ा. तमाम अन्य देशों के स्वार्थी, क्रूर एवं सत्तालोभी तानाशाहों की तरह मिस्र में भी राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपनी प्रशासनिक पकड़ बेहद मज़बूत कर रखी थी.

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ट्यूनीशिया की ट्यून समझें

अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में अफ़रातफरी का माहौल है. पूरे देश में आपातकाल लागू है. जनता के दबाव में कुर्सी छोड़ने के बाद राष्ट्रपति ज़ैनुल अबेदीन बेन अली अपने परिवार के साथ देश छोड़कर भाग गए हैं. ट्यूनीशियाई जनता अभी भी संतुष्ट नहीं है

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