गैस सिलेंडर हुआ महंगा, अब सरकार की सब्सिडी होगी खत्म!

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : सब्सिडी वाले रसोई गैस के मूल्य को लेकर खबर हैं कि सोमवार को दो

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किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके हितों की रक्षा सरकारी तंत्र स्वयं ही कर देता है, मतलब यह कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती और उन्हें बिना शोर-शराबे के फायदा पहुंचा दिया जाता है.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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सब्सिडी का लाभ किसे मिलता है

क्‍या भाजपा के ग़लत नेता अनशन पर गए, अनशन पर जिन्हें जाना चाहिए था, वे नहीं गए, बल्कि किसी दूसरे नेता ने अनशन कर लिया? समाचारों में यही आ रहा है कि नितिन गडकरी को अपना मोटापा घटाने के लिए उपाय करने जाना था, जो दु:खद है और हास्यास्पद भी. जैसा कि मुझे ध्यान है, जब गडकरी संघ की शाखा में हाफ पैंट पहन कर व्यायाम करने जाते थे, तब वह बिल्कुल ठीक थे, लेकिन भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें भी नेताओं वाला रोग लग गया.

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जादुई संख्या के भरोसे चलती सरकार

हिच्हाइकर्स गाइड टू द गैलेक्सी के दीवाने यह जानते हैं कि ज़िंदगी का रहस्य क्या है? उनके मुताबिक़, यह एक जादुई संख्या 42 है. इसी तरह यूपीए सरकार के पास भी एक जादुई संख्या है. यह जादुई संख्या जीडीपी विकास दर है. जब भी सरकार किसी मुसीबत में ख़ुद को पाती है, तब उस व़क्त यही जीडीपी उसके लिए आशा की किरण बन जाती है.

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ग़लती से सबक़ लेने की ज़रूरत

प्रधानमंत्री यूसु़फ रज़ा गिलानी के एक बयान ने देश में एक नए विवाद की शुरुआत कर दी है. गिलानी ने 1972 में ज़ुल्फिकार अली भुट्टो द्वारा स्कूलों एवं कॉलेजों के राष्ट्रीयकरण के फैसले को ग़लत क़रार दिया तो देश में शिक्षा की मौजूदा हालत से निराश लोगों ने उनकी हां में हां मिलानी शुरू कर दी. वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के समर्थक अपने नेता के समर्थन में उतर आए. बयान से शुरू हुए इस विवाद में दोनों पक्ष दो ध्रुवों में बंट चुके हैं, लेकिन यह बात स्पष्ट है कि अधिकांश लोग उन परिस्थितियों से पूरी तरह अंजान हैं, जिनमें शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीयकरण की नीति को अंजाम दिया गया था.

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