राजनीतिक पार्टियों में अच्छे लोग नहीं हैं, यह बात नहीं है, पर सवाल अच्छे लोगों का नहीं, बल्कि नीतियों एवं योजनाओं का है. भले और अच्छे लोग भी अगर पुरानी नीतियों और पुराने ढांचे पर ही निर्भर करते रहें, तो वे कारगर साबित नहीं हो सकेंगे. जब तक ये नीतियां एवं योजनाएं और इनके परिणामस्वरूप [...]
Tags: अंग्रेजों, आंदोलन, गांधी जी, गांव, ग्राम-प्रमुख, ग्राम-सेवक, ग्रामसभा, जयप्रकाश जी, निराकरण, नीतियों एवं योजना, प्रशासन, भारत, भाषणों, मतदाताओं, महाराष्ट्र, मुखिया, योजनाओं, राजनीतिक पार्टियों, लोकसभा. विधानसभा, लोग, व्यवस्था, व्यवस्था एवं परिस्थिति, व्यापक, शासन, सत्ता, समस्या, सरपंच, स्वराज्य, स्वराज्य काल Posted in राजनीति by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.
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बढ़ते बाज़ारवाद के दौर में उपभोक्ता संस्कृति तो देखने को मिल रही है, लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी है. आज हर व्यक्ति उपभोक्ता है, चाहे वह कोई वस्तु खरीद रहा हो या फिर किसी सेवा को प्राप्त कर रहा हो. दरअसल, मुना़फा़खोरी ने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर दी हैं. वस्तुओं में मिलावट और निम्न गुणवत्ता की वजह से जहां उन्हें परेशानी होती है, वहीं सेवाओं में व्यवधान या पर्याप्त सेवा न मिलने से भी उन्हें द़िक्क़तों का सामना करना प़डता है. हालांकि सरकार कहती है, जब आप पूरी क़ीमत देते हैं तो कोई भी वस्तु वज़न में कम न लें.
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बीते 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद की तहसील रुदौली के सिठौली गांव में ज़मीन नीलाम होने के डर के चलते किसान ठाकुर प्रसाद की मौत हो गई. ठाकुर प्रसाद का बेटा अशोक गांव के एक स्वयं सहायता समूह का सदस्य था. उसने समूह से कोई क़र्ज़ नहीं लिया था. समूह के जिन अन्य सदस्यों ने क़र्ज़ लिया था, उन्होंने अदायगी के बाद नो ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था.
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भारत को आज़ाद हुए 12 साल बीत गए. इन 12 वर्षों में 5 या 6 वित्त मंत्री बदल चुके हैं. हर मंत्री की मुद्रा नीति भिन्न-भिन्न थी.
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केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के दो पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति में देरी का कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की व्यस्तता है, इसलिए निर्णय नहीं हो पा रहा है.
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मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश को उत्तर प्रदेश का ताज दिलाकर अपना धर्म-कर्म पूरा कर दिया. अब अखिलेश यादव की पुत्र धर्म निभाने की बारी है. समाजवादी पार्टी के तमाम नेता चाहते हैं कि वर्षों से प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे उम्रदराज़ मुलायम के लिए अखिलेश राह निष्कंटक बनाएं. इसके लिए ठीक वैसी ही तैयारियां शुरू की जाएं, जैसी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुलायम सिंह यादव ने की थीं.
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इस बार पर्चे की शुरुआत मैं शिकायत से शुरू करना चाहता हूं. हमने चर्चा समूह की शुरुआत दोतरफा संवाद शुरू करने के लिए की थी, ताकि हम अपनी बात आप तक पहुंचा सकें और आप अपनी बात हम तक पहुंचा सकें. मुझे शिकायत है कि आप लोगों की तऱफ से बहुत कम प्रतिक्रिया आ रही है. पिछले हफ्ते हमने चर्चा की कि किस तरह झारखंड के कई स्कूलों में अध्यापकों की संख्या कम है, शहरों में सरकार द्वारा नियुक्त सफाई कर्मचारी अपने काम पर नहीं आते, इन समस्याओं का क्या समाधान है, इस पर चर्चा करें.
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देश का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि युवा वर्ग हमेशा से अपने हक़ के लिए ल़डता रहा है. संचार के इस युग में भी युवाओं में इस लक्षण को देखा जा रहा है. दुनिया एक प्लेटफॉर्म तक सीमित होकर रह गई है, जहां से सूचनाओं का संचार व्यापक स्तर पर हो रहा है.
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विकास कार्य के लिए आपके सांसद को हर साल करोड़ों रुपये मिलते हैं, जिसे सांसद स्थानीय विकास फंड कहा जाता है. इस फंड से आपके क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य किए जाने की व्यवस्था होती है. क्या कभी आपने अपने लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास कार्यों के बारे में जानने की कोशिश की? क्या आपने कभी यह सवाल पूछा कि आपके इलाक़े में सांसद फंड से कितना काम हुआ है?
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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