महिला सशक्तिकरण में बाधा है शैक्षिक योग्यता का नियम

अगर हम छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें तो यहां ऐसी महिलाओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जो अगले पंचायत चुनाव

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किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं है इस गाँव की सरपंच, देखकर उड़ जाएंगे होश

पूरी दुनिया खूबसूरती की दीवानी है ऐसे में कोई खूबसूरत हसीना मुखिया हो तो खबर आग पकड़ेगी ही. अब खबर

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समस्या और उसका निराकरण

राजनीतिक पार्टियों में अच्छे लोग नहीं हैं, यह बात नहीं है, पर सवाल अच्छे लोगों का नहीं, बल्कि नीतियों एवं

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बेवल पंचायतः ईमानदारी की कीमत चुकाता एक सरपंच

संजय ब्रह्मचारी उर्फ संजय स्वामी की आंखों में एक सपना था. वह सपना था, गांधी जी के सपनों को साकार करने का. दिल्ली एवं मुंबई में हमारी सरकार, लेकिन हमारे गांव में हम ही सरकार यानी हमारा गांव हमारी सरकार. 13 सितंबर, 2010 की रात हरियाणा के महेंद्रगढ़ ज़िले की बेवल पंचायत में इस सपने को साकार करने की एक शुरुआत हुई थी, जब संजय स्वामी ने ग्रामसभा की खुली बैठक में सरपंच पद का प्रभार काफी मशक्कत के बाद संभाला था.

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अपनी पंचायत का लेखा-जोखा मांगें

स्वराज, लोक स्वराज या गांधी का हिंद स्वराज आख़िर क्या है? गांधी जी का सपना था कि देश का विकास पंचायती राज संस्था के ज़रिए हो. पंचायती राज को इतना मज़बूत बनाया जाए कि लोग ख़ुद अपना विकास कर सकें. आगे चलकर स्थानीय शासन को ब़ढावा देने के नाम पर त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था लागू भी की गई.

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बिहार में पंचायती राज नहीं, मुखियाराज है

एक समय सरपंच ग्राम पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता था, लेकिन बिहार में इस पद की अहमियत कम होने लगी है. लगभग ढाई दशक बाद बिहार में वर्ष 2001 में पंचायत के चुनाव हुए तो लोगों को लगा कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने देखा था, वह साकार होने वाला है.

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बेवल का प्रयोगः ग्रामसभा की ताकत साबित हुई

दिल्ली और मुंबई में हमारी सरकार, लेकिन हमारे गांव में हम ही सरकार. यानी हमारा गांव हमारी सरकार. एक अच्छे लोकतंत्र की इससे सच्ची परिभाषा शायद दूसरी नहीं हो सकती. गांधी जी का भी यही सपना था. रामराज, सुराज या स्वराज या कहें पंचायती राज.

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सार –संक्षेप : महिलाएं पुलिस में झूठी रिपोर्ट लिखवाती हैं

महिलाओं के हितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे विशेष क़ानून का महिलाएं ही नाजायज़ फायदा उठा रही हैं. महिला थाना पुलिस के पास 50 फीसदी ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें पति या ससुराल पक्ष के खिला़फ झूठी शिकायत कर प्रकरण दर्ज़ कराने के प्रयास किए जाते हैं.

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सार-संक्षेप

आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी नियमों के अनुसार उसका खुलासा न करने के आरोप में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री महेंद्र सिंह चौहान को विशेष न्यायालय जबलपुर ने एक वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हज़ार रुपये के ज़ुर्माने से दंडित किया है. महेंद्र सिंह चौहान जब जबलपुर में इंजीनियर पद पर कार्यरत थे, तब 24 फरवरी 1995 को लोकायुक्त-पुलिस ने उनके आवास पर छापा मारकर लाखों रुपये की अघोषित चल-अचल संपत्ति का पता लगाया था.

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