संसद ने सर्वोच्च होने का अधिकार खो दिया है

भारत की संसद की परिकल्पना लोकतंत्र की समस्याओं और लोकतंत्र की चुनौतियों के साथ लोकतंत्र को और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए की गई थी. दूसरे शब्दों में संसद विश्व के लिए भारतीय लोकतंत्र का चेहरा है. जिस तरह शरीर में किसी भी तरह की तकली़फ के निशान मानव के चेहरे पर आ जाते हैं, उसी तरह भारतीय लोकतंत्र की अच्छाई या बुराई के निशान संसद की स्थिति को देखकर आसानी से लगाए जा सकते हैं.

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आप सांसद हैं, देवता नहीं

हमारे सांसद कुछ ज़्यादा ही सेंसेटिव हो गए हैं. उन्हें लगता है कि वे संसद के लिए चुन लिए गए हैं तो वे लोकतंत्र के देवता हो गए हैं. उन्हें कोई कुछ कह नहीं सकता है. अगर देश में भ्रष्टाचार की बात हो तो सांसदों को लगता है कि उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

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सूचना क़ानून: कुछ अहम सवाल

सूचना कौन देगा

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उनके पास ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शाखाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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आपकी समस्याएं और सुझाव

आपके पत्र हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस अंक में हम उन पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं, जिन्होंने बताया है कि आरटीआई के इस्तेमाल में उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सूचना अधिकार क़ानून को लेकर उनके अनुभव क्या हैं. इसके अलावा इस अंक में मनरेगा योजना और जॉब कार्ड से संबंधित एक आवेदन भी प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि आप इसका इस्तेमाल समाज के ग़रीब तबक़े के हित में करके भ्रष्ट व्यवस्था को सुधारने की एक कोशिश कर सकें.

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आफरीदी के इस्‍तीफे से उपजे सवाल

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में कब क्या हो सकता है, कहा नहीं जा सकता. कल तक टीम में जिस शाहिद आ़फरीदी की तूती बोलती थी, अचानक उस पर ऐसी आफ़त आ पड़ी कि उसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलविदा कहना पड़ा. शाहिद आफ़रीदी, जिसे मैदान में गेंदबाज़ों की धुनाई के लिए जाना जाता था, की टीम में यह हैसियत हो गई कि उसे समय से पहले क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा.

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अन्‍ना हजारे न महात्‍मा गांधी हैं और न लोकनायक जय प्रकाश नारायणः अन्ना को अन्ना ही रहने दो

अन्ना के आंदोलन के दौरान युवाओं को यह कहते पाया गया कि उन्होंने न तो जेपी को देखा और न ही गांधी को देखा, उनके लिए अन्ना हजारे ही गांधी और जय प्रकाश नारायण हैं. इसमें कोई शक़ नहीं है कि अन्ना हजारे ने शहरी युवाओं को जगाया है. आज के संदर्भ में यह एक अनोखी उपलब्धि है.

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ललित कला अकादमी सवालों के घेरे में

क्रिकेट के विश्वकप के शोरगुल में एक अहम घटना दबकर रह गई. यह एक ऐसी घटना है, जो सरकार पोषित संस्था के कार्यकलापों पर सवालिया निशान खड़ा करती है. मैं बात कर रहा हूं ललित कला अकादमी की, जिसके अध्यक्ष हिंदी के वरिष्ठ कवि, आलोचक एवं कला प्रेमी अशोक वाजपेयी हैं. सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि एक मशहूर चित्रकार डॉक्टर प्रणब प्रकाश ने अकादमी पर मनमानी का आरोप लगाया है.

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आरटीआई से जुडे कुछ सवाल

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उन्हें ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शा़खाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं. इसके अलावा बहुत से अधिकारी सहायक लोक सूचना नियुक्त किए गए हैं.

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सच के सिपाही को धमकी

सवाल पूछना जनता का अधिकार है और यह अधिकार संविधान देता है, लेकिन सवाल पूछना कभी-कभी कितना तकलीफदेह हो सकता है, यह पिछले साल हुईं आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्याओं से साफ पता चलता है. कार्यकर्ताओं की हत्या, परेशान करने और धमकी देने के मामले तो लगभग हर महीने सामने आते रहते हैं.

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बड़े संपादकों के छोटे सवाल

किसी भी प्रजातंत्र में मीडिया का काम एक प्रहरी का होता है. वह सरकार का नहीं, जनता का पहरेदार होता है. मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि सरकार जो करती है और जो नहीं करती है, वह उसे जनता के सामने लाए. जब कभी सत्तारूढ़ दल, विपक्षी पार्टियां, अधिकारी और पुलिस अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह नहीं करते हैं, तब मीडिया उन्हें उनके कर्तव्यों का एहसास कराता है.

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असमः मंत्रियों की संप‍त्ति की घोषणा पर सवाल

बीती 14 जनवरी को असम सरकार ने अपनी वेबसाइट पर राज्य के सभी मंत्रियों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक कर दिया. काफी समय पहले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने वादा किया था कि वह और उनके मंत्रिमंडल के सभी सहयोगी अपनी-अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे, लेकिन कई बार समय सीमा तय करने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका.

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डरें नहीं, आरटीआई का इस्तेमाल करें

कई बार ऐसी ख़बरें आती रही हैं कि अमुक आदमी को सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने पर धमकी मिली या जेल में ठूंस दिया गया या फर्ज़ी केस में फंसा दिया गया. ज़ाहिर है, सालों से जंग लगी व्यवस्था और सामंती मानसिकता वाली नौकरशाही इस बात को हज़म नहीं कर पाती कि कोई आम आदमी उनसे सवाल पूछे.

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