साक्षात्‍कारः बड़े ढांचे में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का चलना मुश्किल

83 वर्षीय सच्चिदानंद सिन्हा एक समाजवादी कार्यकर्ता, चिंतक एवं लेखक हैं. उस दौर में जब समाजवादी विचारधारा महानगरों एवं चर्चाओं तक सीमित रह गई हो, तब सच्चिदानंद बाबू की न स़िर्फ लेखनी, बल्कि उनकी जीवनशैली भी समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करती नज़र आती है.

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सद्गुरु की पहचान

जो वेद, वेदांत एवं छहों शास्त्रों की शिक्षा प्रदान करके ब्रह्म विषयक मधुर व्याख्यान देने में पारंगत हो, जो अपनी श्वांसोच्छवास क्रियाओं पर नियंत्रण कर सहज ही मुद्राएं लगाकर अपने शिष्यों को मंत्रोपदेश दे, निश्चित अवधि में यथोचित संख्या का जप करने का आदेश दे और केवल अपने वाक्‌ चातुर्य से ही उन्हें जीवन के अंतिम ध्येय का दर्शन कराता हो तथा जिसे स्वयं आत्म साक्षात्कार न हुआ हो, वह सद्गुरु नहीं है.

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