ईश्वरीय सेवा के निमित्त

कभी आपने सोचा कि कोई व्यक्ति महात्मा, साधु-संत क्यों बनता है और कोई गृहस्थ व्यापारी, चोर, डाकू, वैज्ञानिक, डॉक्टर या भिखारी क्यों बनता है?

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