सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

गुरु-मुख होने की आवश्कता संसार में जो अनेक तरह के बंधन हैं, मनुष्य उनमें क्यों फंसता है? संसार के अनेक बंधनों

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अद्भुत अभिव्यक्ति और जिजीविषा का अनूठा दस्तावेज़

आत्मकथा-हमारे पत्र पढ़ना की लेखिका, कवयित्री एवं कथाकार उर्मिल सत्यभूषण का जन्म पंजाब के गुरुदासपुर ज़िले में बीसवीं शताब्दी के

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पूरे चांद की रात…

भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तंभ यानी उर्दू के मशहूर अ़फसानानिग़ार कृष्ण चंदर का जन्म 23 नवंबर, 1914 को पाकिस्तान के गुजरांवाला ज़िले के वज़ीराबाद में हुआ. उनका बचपन जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाक़े में बीता. उन्होंने तक़रीबन 20 उपन्यास लिखे और उनकी कहानियों के 30 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके प्रमुख उपन्यासों में एक गधे की आत्मकथा, एक वायलिन समुंदर के किनारे, एक गधा नेफ़ा में, तूफ़ान की कलियां, कॉर्निवाल, एक गधे की वापसी, ग़द्दार, सपनों का क़ैदी, स़फेद फूल, प्यास, यादों के चिनार, मिट्टी के सनम, रेत का महल, काग़ज़ की नाव, चांदी का घाव दिल, दौलत और दुनिया, प्यासी धरती प्यासे लोग, पराजय, जामुन का पेड़ और कहानियों में पूरे चांद की रात और पेशावर एक्सप्रेस शामिल है. 1932 में उनकी पहली उर्दू कहानी साधु प्रकाशित हुई. इसके बाद उन्होंने पीछे म़ुडकर नहीं देखा.

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आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.

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महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही हो रहा है.

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सरल शब्दों में जीवन की अभिव्यक्ति

हाल में आरोही प्रकाशन ने रेणु हुसैन की कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित किए हैं. पहला कविता संग्रह है पानी-प्यार और दूसरे कविता संग्रह का नाम है जैसे. अंग्रेज़ी की वरिष्ठ अध्यापिका रेणु हुसैन स्कूल के व़क्त से ही कविताएं लिख रही हैं.

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माननीयों की मनमानी: एक और ज़मीन घोटाला

महाराष्ट्र में घोटालों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. माननीयों के कारनामों की फेहरिस्त कितनी लंबी है, इसका अंदाज लगा पाना मुश्किल है. ऐसा लगता है कि घोटालों के मामले में राज्य सरकार किसी भी सूरत में केंद्र सरकार से पीछे नहीं रहना चाहती है.

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अनूप श्रीवास्तव एएस बने

1981 बैच के आईएएस अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. वह संगीता गैरोला की जगह लेंगे. अनूप श्रीवास्तव इससे पहले राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे.

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अनूप कुमार और विंद्रा स्वरूप एएस बनेंगे

1981 बैच के आईएएस अधिकारी अनूप कुमार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया जाएगा. वह संगीता गैरोला की जगह लेंगे, जिन्हें संस्कृति मंत्रालय में सचिव बनाया गया है. इसी बैच के आईएएस अधिकारी विंद्रा स्वरूप को विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है.

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महिलाओं के अधिकार और क़ानून

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है, चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का. मगर इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं.

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मुस्लिम सियासत और पीस पार्टी

एक महीने से अधिक समय तक चले उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया 6 मार्च को मतगणना और परिणामों की घोषणा के साथ समाप्त हो गई. इसके साथ ही समाप्त हो गया वह लंबा इंतज़ार जिसको लेकर हर कोई भविष्यवाणी करने में लगा हुआ था.

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कंपनी बिल-2011 : राजनीतिक दलों का दोहरा रवैया

14 दिसंबर, 2011 को लोकसभा में एक घटना घटी. डॉ. वीरप्पा मोइली ने दोपहर के बाद कंपनी बिल-2011 लोकसभा में पेश किया. इस बिल में राजनीतिक दलों को कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले धन का प्रावधान है. इस बिल के पेश होने के एक घंटे के अंदर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी बोलने के लिए खड़े हुए. उन्होंने कहा कि काला धन प्रमुख तौर पर हमारे चुनाव में मिलने वाले चंदे से जुड़ा हुआ है और इस चुनावी चंदे के स्वरूप में परिवर्तन करके काले धन की समस्या पर बहुत हद तक क़ाबू पाया जा सकता है.

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स्त्रियों की मज़दूरी का मूल्यांकन

फिर कल-काऱखानों के चल निकलने के कारण स्त्री कामगारों की संख्या बढ़ी, लेकिन बाज़ार में इनकी मज़दूरी का भाव पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्तर का ही रहा. मालिकों की दलील यह थी कि यदि हमें मज़दूरों की ज़रूरत ही हो तो हम पुरुषों को ही क्यों न रखें और फिर सस्ती दर में औरतें काम करने के लिए राज़ी भी तो हैं. उनके इस उत्तर में सुदृढ़ तर्क का अभाव भले हो, इसने स्त्रियों को मज़दूरी की आवश्यकता के कारण सस्ती दर पर काम करने के लिए बाध्य कर दिया.

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सुरेश पांडा अतिरिक्त सचिव बने

1981 बैच के आईएएस अधिकारी सुरेश चंद्र पांडा को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं एफए बनाया गया है. वह विश्वपति त्रिवेदी की जगह लेंगे, जिन्हें खनिज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है.

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युवा शक्ति को पहचानने की ज़रुरत

किसी भी देश का सामाजिक और आर्थिक विकास उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है. भारत जैसे देश, जहां युवाओं की संख्या अच्छी-खासी है, वहां यह बात और अधिक प्रासंगिक हो जाती है. भारत के आर्थिक नियोजक इस पर ध्यान भी देते हैं.

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सामुदायिक रेडियो : बदलाव का सशक्त माध्यम

22 वर्षीय मंजुला पिछले वर्ष एक दिन अगस्त माह में रेडियो स्टेशन जा पहुंची और सुबह 5 बजे सुनामी के लिए सावधान रहने की घोषणा प्रसारित करने लगी. सवेरे रेडियो के श्रोता सकते में आ गए, क्योंकि वे इतने सवेरे तो आठ बजे से पहले शुरू होने वाले कलंजियम वानोली सामुदायिक रेडियो स्टेशन के प्रसारण सुनने के ही आदी थे.

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अररिया जिले का भजनपुर गांवः दबंगई का अंतहीन सिलसिला

यह भजनपुर गांव है. बिहार के राजनीतिक एवं भौगोलिक नक्शे के अनुसार एक ऐसा गांव, जो ज़िला अररिया के अनुमंडलीय नगर फारबिसगंज से मात्र दो किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से इतना पिछड़ा है कि वहां आज तक न्याय और विकास जैसे राजनीतिक नारे की आवाज़ तक नहीं पहुंच सकी.

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महाराष्‍ट्रः जादू टोने पर रोक लगेगी

महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री का नाम है शिवाजी राव मोघे. उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र में नरबलि और अन्य अमानवीय, अनिष्ट, अघोरी प्रथा व जादू-टोना पर प्रतिबंध लगाने के लिए हाल में संपन्न विधान मंडल के मानसून सत्र में एक विधेयक लाया गया.

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सामाजिक विशमता मानव नस्ल का

आप पूछ सकते हैं कि भाई, जिन आदमियों के पास खाने को पर्याप्त रोटी नहीं है, पहनने के लिए कपड़ा नहीं है, उन सबको समान बंटवारा कर देने से क्या सब ठीक हो जाएगा? क्या आप मानते हैं कि वे उस प्राप्त धन का दुरुपयोग नहीं करेंगे? क्या उन्हें प्राथमिकता का ज्ञान या ध्यान रहेगा? वे लोग मिली हुई धनराशि जुए या अन्य किसी दुर्व्यसन में खर्च करके फिर उसी तरह रोटी-कप़डे के मोहताज नहीं बन जाएंगे?

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