चीनी मिलों पर टिकी हैं उम्मीदें

सारण प्रमंडल के पश्चिमी हिस्से सीवान व गोपालगंज को पूर्व में गन्नाचल के नाम से जाना जाता था. अंग्रेजों के ज़माने में यहां छह चीनी मिलें स्थापित की गई थीं. ऐसी ही एक मिल है जो सारण के मढ़ौरा में स्थित है. एक दौर था जब सारण सुगर मिल को एक अलग रुतबा हासिल था. इन क्षेत्रों के किसानों के लिए नकदी फसल गन्ना थी. किसानों की बेटी की शादी से लेकर बच्चे की पढ़ाई, सब कुछ इसी फसल पर निर्भर था. चीनी मिलों के बंद हो जाने से किसानों के लिए गन्ना की खेती सरदर्द बनने लगी.

Read more

सारणः महाराजगंज में फंस गया राजद

सारण की राजनीति में महाराजगंज संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों का अपना एक अलग अंदाज़ रहा है. विडंबना यह है कि चित्तौड़गढ़ के नाम से शुमार महाराजगंज क्षेत्र से चुने गए कतिपय प्रतिनिधियों ने अपने ही दल के शीर्ष नेतृत्व के प्रति बगावती तेवर का इज़हार कर सियासत में भूचाल ला दिया. विदित हो कि 1989 में महाराजगंज संसदीय क्षेत्र पर दावेदारी के मामले में उठे विवाद को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को यहां से चुनाव लड़ने की नौबत आ गई थी.

Read more

सारणः सांसद में सियासी दिग्‍गज

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरे सारण क्षेत्र में सियासी दलों के बीच घमासान की स्थिति है. सत्ता की राजनीति के मोहपाश में अटके दिग्गज राजनीतिज्ञों के बीच शह-मात का खेल चरम पर पहुंच गया है. वर्षों तक अपनी पार्टी का गुणगान करने वाले नेता आज चुनाव के ऐन मौके पर टिकट के जुगाड़ में पाला बदलने को आतुर हैं.

Read more

छपरा में सूखा गोपालगंज में बाढ़

सारण प्रमंडल के ज़्यादातर लोगों के जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत कृषि है, लेकिन बाढ़ और सूखे के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति दिनोंदिन कमजोर होती जा रही है. अधिसंख्य आबादी बरसात न होने के कारण सूखे की चपेट में है. खेतों में धान के पौधे सूखने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर गोपालगंज प्रकृति के कहर से कराह रहा है.

Read more

सारण में राजनीतिक ज़मीन तलाशने में जुटे बाहुबली

स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई से लेकर आजाद भारत के पुनरुत्थान के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सारण के महान सपूतों की धरती पर आज स्वनामधन्य बाहुबली अपनी राजनीतिक सरजमीं की तलाश में हैं. विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कई नामी सूरमाओं को अपने बल के भरोसे विधानसभा की दहलीज पार करने का भरोसा है.

Read more