विभाजन, युद्ध और प्यार की फिल्में

हिंदी फिल्मों में भारत-पाकिस्तान के विभाजन और उसमें हिंदू-मुस्लिम, पारसी, सिख परिवारों के द्वंद्व पर भी कई फिल्में आईं. भारत-पाकिस्तान

Read more

साहित्य पत्रिकाओं की सार्थकता

यदा-कदा साहित्यिक आयोजनों और विचार गोष्ठियों में जाने-बोलने का अवसर मिलता है. ज्यादातर गोष्ठियों में वामपंथी विचारधारा के अनुयायी या

Read more

हिंसा हमारी संस्कृति का अंग नहीं है

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के परिप्रेक्ष्य में राहुल गांधी का हालिया बयान सुनाने के बाद एक विषय दिमाग में उथल-पुथल मचाने लगा

Read more

प्रबंधन पर आधारित काव्य संग्रह

पांखी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित चंद्रसैन प्रबलजी की पुस्तक प्रबंध चेतना अपने आप में अनूठी है, क्योंकि रचनाकार ने एक प्रबंधक

Read more

कालजयी रचनाकार फ्योदोर दोस्तोयेवस्की…

मशहूर रूसी लेखक फ्योदोर दोस्तोयेवस्की की गिनती शेक्सपियर, दांते, गेटे और टॉलस्टॉय जैसे महान लेखकों के साथ होती है. फ्योदोर

Read more

तसलीमा सुर्खियों में रहना चाहती हैं

बांग्लादेश की विवादास्पद और निर्वासन का दंश झेल रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर से नए विवाद को जन्म दे दे दिया है. तसलीमा ने बंग्ला के मूर्धन्य लेखक और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय पर यौन शोषण का बेहद संगीन इल्ज़ाम जड़ा है. तसलीमा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा- सुनील गंगोपाध्याय किताबों पर पाबंदी के पक्षधर रहे हैं.

Read more

पूरे चांद की रात…

भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तंभ यानी उर्दू के मशहूर अ़फसानानिग़ार कृष्ण चंदर का जन्म 23 नवंबर, 1914 को पाकिस्तान के गुजरांवाला ज़िले के वज़ीराबाद में हुआ. उनका बचपन जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाक़े में बीता. उन्होंने तक़रीबन 20 उपन्यास लिखे और उनकी कहानियों के 30 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके प्रमुख उपन्यासों में एक गधे की आत्मकथा, एक वायलिन समुंदर के किनारे, एक गधा नेफ़ा में, तूफ़ान की कलियां, कॉर्निवाल, एक गधे की वापसी, ग़द्दार, सपनों का क़ैदी, स़फेद फूल, प्यास, यादों के चिनार, मिट्टी के सनम, रेत का महल, काग़ज़ की नाव, चांदी का घाव दिल, दौलत और दुनिया, प्यासी धरती प्यासे लोग, पराजय, जामुन का पेड़ और कहानियों में पूरे चांद की रात और पेशावर एक्सप्रेस शामिल है. 1932 में उनकी पहली उर्दू कहानी साधु प्रकाशित हुई. इसके बाद उन्होंने पीछे म़ुडकर नहीं देखा.

Read more

मन को छूते मेरे गीत

गीत मन के भावों की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं. साहित्य ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मेरे गीत में सतीश सक्सेना ने भी अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर गीतों की रचना की है. वह कहते हैं कि वास्तव में मेरे गीत मेरे हृदय के उद्‌गार हैं. इनमें मेरी मां है, मेरी बहन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं. मैं उन्हें जो देना चाहता हूं, उनसे जो पानी चाहता, वही सब इनमें है.

Read more

अ़खबारों से ग़ायब होता साहित्य

साहित्य समाज का आईना होता है. जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है. साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे खुद नहीं हुआ है. साथ ही उस समाज की संस्कृति और सभ्यता का भी पता चलता है. जिस समाज का साहित्य जितना ज़्यादा उत्कृष्ट होगा, वह समाज उतना ही ज़्यादा सुसंस्कृत और समृद्ध होगा.

Read more

रिश्तों की गर्माहट का संग्रह

चौथी दुनिया में लगभग तीन साल से ज़्यादा समय से लिख रहे अपने स्तंभ में कविता और कविता संग्रह पर बहुत कम लिखा. साहित्य से जुड़े कई लोगों ने शिकायती लहज़े में इस बात के लिए मुझे उलाहना भी दिया. कइयों ने कविता के प्रति मेरी समझ पर भी सवाल खड़े किए.

Read more

सौ साल का हिंदी सिनेमा

सौ साल पहले रूपहले पर्दे पर वर्ष 1913 में 21 अप्रैल को पहली श्वेत-श्याम हिंदी मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र को दर्शकों ने देखा, तो सबको अजूबा लगा. फिल्मी पर्दे पर पहले-पहल वह नज़ारा सचमुच स्वप्न लोक जैसा ही था. राजा हरिश्चंद्र फिल्म के निर्देशक, निर्माता और लेखक दादा साहब फाल्के थे, जिन्होंने इंग्लैंड जाकर फिल्म तकनीक सीखने के लिए ज़ेवर बेच दिए थे और उनका यह प्रयास मील के पत्थर की तरह साबित हुआ.

Read more

मूल्यांकन में आलस क्यों

कौन जानता था कि सिमरिया घाट के बालू की रेत पर खेलने वाला बालक एक दिन अपनी तर्जनी उठाकर कह सकेगा- लोहे के पेड़ हरे होंगे तू गान प्रेम का गाता चल, नम होगी यह मिट्टी ज़रूर तू आंसू के कण बरसाता चल. यह वही बालक था, जो बाद में राष्ट्रकवि बना और जिनका नाम था रामधारी सिंह दिनकर. रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय चेतना के कवि थे.

Read more

किताबों की दुनिया और बच्चे

दौड़ती-भागती दुनिया और तेज़ी से होता आधुनिकीकरण. बच्चों की तो दुनिया ही बदल गई है. टीवी और इंटरनेट ने उन्हें किताबों और साहित्य से कोसों दूर कर दिया है. ऐसे में केंद्र सरकार ने बच्चों की साहित्यक रूचि का मंच प्रदान करने और वरिष्ठों के बीच बिठाकर उनकी प्रतिभा को निखारने की योजना बनाई है. इसकी शुरुआत राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कर भी दी है.

Read more

अदम गोंडवी : आम आदमी का शायर

शब्द-शब्द संघर्ष करने वाले साहित्य जगत के शिल्पकार रामनाथ सिंह उ़र्फ अदम गोंडवी नहीं रहे. ग़ुरबत में ज़िंदगी ग़ुजार कर साहित्य की सेवा करने वाले अदम गोंडवी ने अभाव में ज़िंदगी के ताप को महसूस कराने के लिए अपने गांव आटा परसपुर (गोंडा, उत्तर प्रदेश) की ओर से साहित्यानुरागियों का ध्यान खींचने के लिए क़लम को तलवार बनाते हुए कहा था

Read more