लोग उन्हें दंडनायक कहते हैं

जनता की जरूरतें जब प्रशासन पूरी नहीं करता और जब जनप्रतिनिधि भी जनता की जरूरतों के प्रति उपेक्षा बरतने लगता

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सरकार को पैसा कौन देता है

आज देश में अंतर्विरोध की कई रेखाएं हैं. जैसे कि गांव में किसान मज़दूर का शोषण करता है, बड़ा छोटे

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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शाहाबादः कहीं बंजर न हो जाए जमीन

सन 1857 की क्रांति के दौरान जब शाहाबाद की धरती ने आग उगलना शुरू किया तब यहां के लोगों को सिंचाई के संसाधन देकर कृषि कार्य कीतरफ मोड़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने एक बड़ी परियोजना की शुरूआत की थी. डेहरी के ऐनकार्ट में सोन नदी पर एक बांध बना और पूरे शाहाबाद में नहरों का जाल बिछाने की कवायद तेज़ हुई.

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उम्मीदों का ताज

बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को छप्पर फाड़ जनादेश देकर पूरी दुनिया­­­ को चौंका दिया. ऐसा जनादेश, जिसकी कल्पना खुद नीतीश कुमार भी नहीं कर रहे थे. लेकिन बिहार की जनता ने लोकतंत्र के महापर्व का पूरा मज़ा लेते हुए जनादेश के साथ नीतीश कुमार को ढेर सारी ज़िम्मेदारियों से भी लबरेज कर दिया. यह ऐसा जनादेश है, जो बिहार की जनता की उम्मीदों से पूरी तरह सराबोर है. नीतीश कुमार की अगली पारी इन्हीं उम्मीदों की कसौटी पर कसी जाएगी. बिजली, स्वास्थ्य, पूंजी निवेश, कृषि, शिक्षा, सिंचाई एवं पलायन आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर बहुत सारा काम होना बाकी है. नीतीश कुमार को भी इस प्रचंड जनादेश के बाद सूबे के लोगों की बढ़ी हुई उम्मीदों का एहसास है, इसलिए उन्होंने जीत के बाद सा़फ किया कि मैं कोई दावा तो नहीं करूंगा, लेकिन पूरी मेहनत के साथ यह कोशिश ज़रूर करूंगा कि राज्य की जनता की उम्मीदें पूरी कर सकूं.

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मशान जलाशय परियोजना अधर में

पश्चिम चंपारण के रामनगर में स्थित मशान नदी पर इस जलाशय परियोजना का निर्माण कार्य ब्रिटिश काल से ही चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है. त्रासदी यह कि इसमें पानी के सिवाय सब कुछ है. विकास और विश्वास का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

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यूं ही बहता रहेगा अथिरापल्ली का पानी!

केरल में पश्चिमी घाट स्थित वझाचल के जंगलों में बहने वाली चलाकुडी नदी को छोड़ते हुए मैं जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हूं. मेरे दिल में एक अजीब तरह की चिंता घर करती जा रही है. मैं जो लिख रही हूं, इसे पढ़ने वालों में कम लोग ही यहां तक आए होंगे. लेकिन, जो लोग मेरे अनुभवों के साझीदार हैं, वे इसकी अहमियत समझ सकते हैं.

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किसान पुत्र का राज और किसान आंदोलन

मध्य प्रदेश सरकार की कृषि और किसान हितैषी नीतियों की पोल राज्य में हर साल होने वाले किसान आंदोलनों से खुल जाती है. राज्य सरकार ने किसान आंदोलनों का लाठी-गोली से दमन तो किया, लेकिन किसानों की समस्याओं को सुलझाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

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टाल में दाल पर आफत

देश भर में दाल की आसमान छूती क़ीमतों ने हर तबके को परेशानी में डाल रखा है. एक तो महंगाई की मार, ऊपर से दलहन के उत्पादन में कमी ने लोगों को परेशान कर दिया है. वे अगले साल की फसल के लिए अभी से चिंतित हैं.

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