कविता का जन्म कब हुआ, इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. मगर इतना ज़रूर है कि जब से इंसान ने बोलना सीखा और वह अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कला में माहिर हुआ, तभी कविता का जन्म हुआ होगा. दुनिया की हर सभ्यता में काव्य को वह मुक़ाम हासिल है, जिसने [...]
Tags: आनंदवादी, ऋग्वेद मंत्र, कविता, काव्य-चिंतन, काव्यशास्त्र, दस्तावेज़, दुनिया, नैतिक उपयोगितावादी, प्राचीनकाल, भारतीय, मानव, मानव-कल्याण, मानव-समाज, मानवतावादी, मानववादी, मूल्य-चेतना, मूल्य-सिद्धांत, रचना, राजनीतिक, रीतिवादी, लोकमंगलकारी, विचारधारा, संघर्षपरक, सभ्यता, समाज-सापेक्ष, सामाजिक, सामाजिक मूल्यों, साहित्य, सिद्धांत Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment » | Read More... |
मैं जन्म तिथि मामले में सुप्रीम कोर्ट इसलिए गया, क्योंकि यह सिद्धांत की बात थी. मैंने सुप्रीम कोर्ट में भी यही कहा कि मुझे अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना है. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से कोई फैसला नहीं दिया. उन्होंने इसके ऊपर यह कहा कि हमारे पास जो समस्या आई है, उसे हम इस तरीक़े से ले रहे हैं कि जो इनकी आयु है, जो रिकॉर्ड के अंदर है, उसमें हमें कोई दिक्क़त नहीं है और इस पर अटॉर्नी जनरल साहब और सरकार ने जो आदेश दिया है, वह उन्होंने वापस ले लिया है, इसलिए कोई समस्या नहीं बनती.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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