सियासी चक्की में पिसी हाथ की कारीगरी

बनारस और उसके आस-पास के इला़के के पांच से छह लाख लोग बनारसी साड़ी के कारोबार से जुड़े हैं. इस उद्योग से जुड़े अनिल कुमार के मुताबिक़ बनारसी साड़ी बनाने वाले आधे से अधिक कारीगर काम धंधे की तलाश में पलायन कर गए हैं. जो घर के मोह में बनारस नहीं छोड़ सके, वह ग़रीबी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं. वजह भारतीय नारी के सुहाग और श्रृंगार का प्रतीक बनारसी साड़ी का उद्योग संकट के दौर से गुज़र रहा है. इस काम में लगे हज़ारों कारीगरों की माली हालत का़फी खराब हो चली है.
फिरोजाबाद के चूड़ीबनाने वाले कारीगर लगातार मौत के शिकार होते जा रहे हैं. चूड़ी बनाने के दौरान यह कारीगर खतरनाक रासायनिक तत्वों के संपर्क में आते हैं, जिससे वह गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. इस कार्य में हज़ारों महिलाएं व बच्चे भी लगे हैं. घातक बीमारियां इन्हें भी अपना निशाना बना रही है. चूड़ी उद्योग से जुड़े कारीगरों व मज़दूरों की हर सांस के साथ कांच के महीन कण उनके शरीर के अंदर घुसते जाते हैं, जो अंतत: उन्हें मौत के मुंह में धकेल देता है.

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