इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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पर्यावरण संबंधी मुकदमेबाज़ी का नया युग

भारत एक ऐसा देश है, जिसका पर्यावरण संबंधी आंदोलनों, ज़मीनी स्तर पर सक्रियता और उत्तरदायी उच्च न्यायपालिका का अपना समृद्ध इतिहास रहा है. ऐसे देश में 2011 का वर्ष पर्यावरण संबंधी मुकदमेबाज़ी का अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष अर्थात मील का पत्थर साबित हुआ है. यद्यपि पर्यावरण संबंधी मुक़दमेबाज़ी पिछले तीन दशकों में काफ़ी बढ़ गई है, लेकिन पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना के कारण 2011 का वर्ष फिर भी काफ़ी विशिष्ट है.

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जे सत्यनारायण एवं प्रदीप कुमार सचिव बने

1977 बैच के आईएएस अधिकारी जे सत्य नारायण को सूचना एवं तकनीक विभाग का सचिव बनाया गया है. यह पद पिछले एक साल से खाली पड़ा था. इसी प्रकार 1977 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार सिन्हा को शिपिंग मंत्रालय में सचिव बनाया गया है.

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दिल्ली का बाबू : प्रसार भारती की परेशानी

पंजाब के चुनाव के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बाबुओं को किसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का मंत्रालय में आना-जाना बढ़ गया है. प्रसार भारती के अंदर उच्चाधिकारियों के बीच झगड़ा भी बढ़ता जा रहा है. जो लोग यह समझ रहे थे कि बी एस लाली के मामले के बाद इस विभाग में सब कुछ ठीक हो जाएगा, वे ग़लत सोच रहे थे.

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संपत्ति का ब्योरा कब देंगे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाबुओं के बीच फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जो क़दम उठाए, वे कई दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए आधार बने. भले ही नीतीश कुमार को इसमें कुछ हद तक सफलता मिली है, लेकिन उनका प्रयास का़फी नहीं है. उन्हें इसके लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है.

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हाशिए पर वरिष्ठ नागरिक

भारत में उम्रदराज लोगों की संख्या बढ़ रही है. यहां लोगों की औसत आयु में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. पुरुषों की औसत आयु 1951-60 के बीच 42 वर्ष थी, जो 1986-90 में बढ़कर 58 साल हो गई और अनुमान है कि 2011-16 में यह 67 साल हो जाएगी. इस वृद्धि से यह तय है कि 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या में भी वृद्धि होगी. एक अनुमान के अनुसार, भारत में 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या 2013 तक 100 मिलियन हो जाएगी.

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दिल्ली का बाबू: आरबीआई का अगला गवर्नर कौन

महंगाई दर में वृद्धि जारी है और मुद्रास्फीति पर भी काबू नहीं पाया जा सका है, इस कारण वित्तीय क्षेत्र में अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. इसके साथ ही सत्ता के गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि भारतीय रिजर्व बैंक का अगला गवर्नर कौन होगा, क्योंकि वर्तमान गवर्नर डी सुब्बाराव सितंबर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू: निशाने पर सेवानिवृत्त अधिकारी

यह बात लंबे समय से महसूस की जा रही है कि सूचना आयोग में सेवानिवृत्त बाबुओं की उपस्थिति से सूचना अधिकार क़ानून के क्रियान्वयन में बाधा ज़्यादा होती है. मुंबई के कृष्णराज राव और कई आरटीआई कार्यकर्ताओं के एक अध्ययन के मुताबिक़, 20 राज्यों के सूचना आयोगों के सदस्यों में क़रीब 52 प्रतिशत प्रशासनिक एवं सरकारी महकमों से जुड़े रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : अंत भला तो सब भला

भारतीय तेल निगम (आईओसी) के चेयरमैन पद से पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए सार्थक बेहुरिया ने एक दूसरे संयुक्त उपक्रम पेट्रोनेट एलएनजी के सलाहकार के रूप में अपनी नई पारी शुरू की है. इससे पहले बेहुरिया को सेवा विस्तार देने से इंकार कर दिया गया था, लेकिन अब उन्हें जिस पद पर बिठाया गया है, वह पहले था ही नहीं. स्वाभाविक रूप से लोग इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छुपी कहानी को अभी भी समझने की कोशिश कर रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : बाबुओं से चव्हाण खफा

बाबुओं के कॉरपोरेट समूहों से जुड़ने की ललक और उनके पलायन को देखते हुए चव्हाण यही मान रहे हैं कि हद की भी हद होती है. चव्हाण भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों के प्राइवेट सेक्टर में काम करने से खासे नाराज हैं.

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