उम्मीदवार का चयन

निर्वाचक मंडल की बैठक किसी ऐसे विद्यालय में बुलाई जाए, जिसके शिक्षक एवं आसपास के लोग लोक उम्मीदवार के विचार के अनुकूल हों और चयन के काम में मददगार हों

Read More

फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्हो

Read More

बच्चों के लिए एक अच्छी किताब

बचपन, उम्र का सबसे प्यारा दौर होता है. यह अलग बात है कि जब हम छोटे होते हैं तो ब़डा होना चाहते हैं, क्योंकि कई बार स्कूल, प़ढाई और रोकटोक से परेशान हो

Read More

स्कूल की हालत कैसे सुधरेगी

सरकारी स्कूल इस देश के करोड़ों बच्चों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं हैं. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फीसदी आबादी के लिए बहुत ही

Read More

पाठशाला में कोटा कितना कारगर होगा

देश में छह वर्ष से चौदह साल की आयु के हर बच्चे को अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार देने वाले क़ानून राइट टू एजुकेशन को उच्चतम न्यायालय ने अपनी मंज़

Read More

स्कूल की इमारत ख़स्ताहाल क्यों है

सरकारी स्कूल देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण जगह है. यह छात्रों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं है. वजह, निजी स्कूलों का

Read More

सरकारी और निजी स्कूलों से हिसाब मांगे

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया

Read More

मिड डे मील की कछुआ चाल

स्‍कूलों में मिलने वाला दोपहर का भोजन यानी मिड डे मील भी बच्चों को कुपोषण से बचाने में सहायक साबित नहीं हो पा रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे

Read More

सरकारी स्कूलों का लें हिसाब

शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत छह साल से लेकर 14 साल तक के बच्चों के लिए शिक्षा उनका मौलिक अधिकार होगा. इस क़ानून से उन करोड़ों बच्चों को फायदा मिलेगा, ज

Read More

क्या आपके बच्चे को छात्रवृत्ति मिली?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि ऐसे बच्चों, जिनके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है, की पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत न आए

Read More

आख़िर स्कूल बदहाल क्यों?

सरकारी स्कूल इस देश के करोड़ों बच्चों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं हैं. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फीसदी आबादी के लिए बहुत ही

Read More