झारखंड: रेल परियोजनाओं की कछुआ चाल

खनिज संसाधनों के मामले में देश के सबसे धनी सूबे झारखंड में शायद ही ऐसी कोई योजना है, जो समय पर पूरी हुई हो. एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाने वाली योजनाएं 3 से लेकर 5 साल तक खिंच जाती हैं. योजना के लिए प्राक्कलित राशि भी दोगुनी से तीन गुनी हो जाती है. राजनीतिक अस्थिरता, सुस्त एवं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी, असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप और शासन में इच्छाशक्ति का अभाव जैसे कारण इस समस्या के मूल में हैं.

Read more

महाराष्‍ट्रः राजनीति का व्‍याकरण बदल रहा है

राज्य में इन दिनों शिव शक्ति-भीम शक्ति का शोर मचा हुआ है. इसके साथ ही एक और मुद्दा जुड़ गया है दादर स्टेशन के नामांतरण का. अब दादर स्टेशन का नाम चैत्य भूमि रखा जाए या डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर, इस पर कोई विवाद नहीं, लेकिन इसी बहाने राजनीतिक अस्त्र-शस्त्रों का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है. सभी दादर स्टेशन के नाम परिवर्तन में अपनी भूमिका रेखांकित और दूसरे की खारिज करने में लगे हैं.

Read more

जज्बे को सलाम

राजधानी दिल्ली के नज़दीक ग्रामीणों ने ख़ुद पैसे एकत्र करके एक रेलवे स्टेशन बनाया है. सीमावर्ती गुड़गांव इलाक़े के गांव ताजनगर और आसपास के लोगों ने दो प्लेटफ़ॉर्म के निर्माण के लिए 20,80,786 रुपये का चंदा इकट्ठा किया. पूरा काम ख़त्म होने में सात महीने लगे.

Read more

पुस्तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल-51

बस खिसक रही थी. आने वाले हर ऐतिहासिक और सामान्य, किंतु ज़रूरी जगह के बारे में विस्तार से बताया जा रहा था. विक्टोरिया स्टेशन, हाइड पार्क, लंदन म्यूज़ियम, लंदन आई, टावर ब्रिज, ऑक्सफोर्ड सर्कस, हाउस ऑफ पार्लियामेंट, न जाने कौन-कौन सी जगह से बस गुजर रही थी. सब कुछ सुंदर और अद्भुत.

Read more

सतना पुलिस चौकी को अस्तित्व की तलाश

सतना स्टेशन स्थित जीआरपी पुलिस की चौकी अंग्रेज़ों के राज्य में 160 साल पहले स्थापित की गई थी. मुंबई-हावड़ा प्रमुख रेल मार्ग से गुज़रने वाली सभी ट्रेनें इस चौकी से होकर ही गुज़रती थी. चौकी की स्थापना के समय सतना रेलवे स्टेशन से काशी एक्सप्रेस, मुंबई हाबड़ा मेल, इटारसी इलाहाबाद पेसेंजर और बाम्बे जनता मेल ही गुज़रता था.

Read more

सार-संक्षेप

केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार और उसे रोचक बनाने के प्रयास में अरबों रुपए ख़र्च करने के बाद भी राज्य में सैटेलाईट के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा (एडूसेट) की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई है. इस योजना को सर्वप्रथम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीधी ज़िले में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने प्रारंभ किया था.

Read more