यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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खतरे में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र : चीनी घुसपैठ हो चुकी है

पूरी दुनिया टेलीकॉम क्षेत्र में भारत द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा कर रही है. भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है. लेकिन विरोधाभास यह है कि दूरसंचार मंत्रालय भी आज तक के सबसे बड़े घोटाले में शामिल है, जिसे टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का नाम दिया गया. एक लंबे समय तक दूरसंचार मंत्रालय ने बहुत से घनिष्ठ मित्र बनाए, जिन्होंने मनमाने तरीक़े से इस क्षेत्र का दोहन किया.

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टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला : बेल का खेल ऑल इज नॉट वेल

टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में मनमोहन, चिदंबरम एवं सोनिया गांधी ने चुप्पी साध रखी है और देश के क़ानून मंत्री सलमान खुर्शीद चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान चस्पां किए देश की अवाम को भरमाने की खातिर कहते फिर रहे हैं, ऑल इज वेल. पर इस हक़ीक़त से वह और सरकार में शामिल उनके सहयोगी भी ख़ूब वाबस्ता हैं कि ऑल इज नॉट वेल. इस घोटाले की प्रक्रिया और उसके बाद जांच की औपचारिकता के बीच ऐसे कई क़ानूनी पेंच हैं, जिनमें सरकार फंसती नज़र आ रही है.

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दस्तावेज़ों से हुआ पर्दाफ़ाश : शरद और सुप्रिया का शाहिद से रिश्ता

शाहिद बलवा. एक ऐसा नाम, जो अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गुर्गे के तौर पर सीबीआई की फाइलों में दर्ज है, जिसका ज़िक्र अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स में भारत के 66वें सबसे अमीर शख्स के तौर पर है और जो टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के प्रमुख आरोपी के तौर पर तिहाड़ जेल में क़ैद है.

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जनता के मन में विश्वास पैदा करने की ज़रुरत

टूजी स्पेक्ट्रम बड़ा घोटाला है, बहुत बड़ा घोटाला है. शायद सबसे बड़ा घोटाला नहीं है. सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है अभी गर्भ में हो, आने वाला हो. लेकिन यह घोटाला ऐसा ज़रूर है, जिसने लोगों के मन में उत्सुकता पैदा कर दी है. उत्सुकता यह है कि क्या इस घोटाले की जांच में कुछ निकलेगा, जिसने कई मंत्रियों की बलि ली और उन्हें जेल में पहुंचाया. इस सारी कवायद का आख़िर नतीजा कोई निकलेगा या नहीं, यह सवाल देश के लोगों के मन में जरूर है.

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दिल्ली का बाबू : गृह मंत्रालय सकते में

कॉरपोरेट घरानों को अवैध रूप से सूचनाएं देने के आरोप में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रवि इंदर की पहले गिरफ्तारी और फिर निलंबन ने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं. आंतरिक सुरक्षा वैसे ही गृह मंत्रालय की नीतियों के केंद्र में होती है. रवि इंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद सेक्स और पैसे के प्रति उनके लालच को सुर्खियां मिलीं, लेकिन मंत्रालय इसलिए ज्यादा चिंतित है, क्योंकि सिंह तीसरे ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें एक साल के अंदर इस तरह की कारगुजारियों के लिए गिरफ्तार किया गया है या छापे मारे गए हैं. साल की शुरुआत में अप्रैल महीने में संयुक्त सचिव-डिजास्टर मैनेजमेंट ओ रवि को रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद आर एस शर्मा भी ऐसे ही आरोपों के चलते जांच एजेंसियों के घेरे में आए थे. लेकिन रवि इंदर सिंह के मामले को जिस तरह सुर्खियां मिलीं, उससे मंत्रालय के अधिकारी सकते में हैं. सूत्रों के मुताबिक, खुद गृह सचिव जी के पिल्लई ने सिंह के फोन टेप किए जाने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई. अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले पिल्लई और गृहमंत्री पी चिदंबरम भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसने के लिए कृतसंकल्प हैं. आने वाले समय में गृह मंत्रालय शीर्ष पदों पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के पिछले रिकॉर्ड की ज्यादा कड़ाई से जांच-पड़ताल कर सकता है. रवि इंदर सिंह मामले पर मचे शोरगुल का यह एक अच्छा परिणाम हो सकता है.

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