पांडुलिपियों में छिपे हैं मिथिला के कई रहस्य

मिथिला के कई अनसुलझे प्राचीन रहस्य आज भी उन पांडुलिपियों में छिपे हुए हैं, जो अभी भी शिक्षण संस्थाओं के

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बिखर रही बापू की विरासत, सभी कर रहे सियासत बापू के चरखे से निकलता सियासत का सूत

चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर बापू को लेकर राजनीतिक दलों की सियासत तेज हो गई है, पर उनके विचारों को

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छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों में 2168 करोड़ रुपए की अनियमितता : ग़रीब प्रदेश में ‘विकास’ की लूट

बात एक ऐसे प्रदेश की जिसे प्रकृति ने समृद्ध-संपन्न बनाया, लेकिन प्रशासनिक अकुशलता, सरकारी काहिली, नीतियों और दूरदृष्टि के अभाव

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कैंडल लाइट डिनर पर मत जाना, जा सकती है आपकी जान

अब तक रोमांस के लिए कैंडल लाइट डिनर को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. किसी शांत जगह में अपनी महिला मित्र के साथ कैंडल लाइट डिनर यानी मोमबत्ती की दूधिया रोशनी में भोजन करना भला किसे पसंद नहीं होगा, लेकिन अब कुछ लोग इसे ख़तरनाक बता रहे हैं. शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि ऐसे रूमानी भोज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं.

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भरपूर नींद नहीं ली तो भुगतना पड़ेगा ये अंजाम

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) :  कहते हैं, अति सर्वत्र वर्ज्यते. मतलब यह कि कोई भी काम अधिक नहीं करना

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लम्बी उम्र जीना चाहते हैं तो सिगरेट से कर ले तौबा

एक शोध के मुताबिक़ अगर आप उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जूझने के बावजूद सिगरेट पीते हैं तो आपकी आयु दस साल घट सकती है. ब्रिटेन में हुए एक शोध में 19 हज़ार नौकरशाहों पर नज़र रखी गई, जिनकी उम्र 40 से 69 साल के बीच थी और यह देखा गया कि 38 वर्षों के बाद उनका स्वास्थ्य कैसा है

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डिप्रेशन हैं खतरनाक और जानलेवा, जानिए इससे बचाव के कुछ उपाय

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): डिप्रेशन में लोग खुद को खुद से अलग कर देते हैं. इसमे इन्सान तनाव ने

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

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ग़रीबों के लिए नहीं है गोरखपुर मेडिकल कॉलेज

नवगठित मोदी सरकार ने देश के सभी सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं मुफ्त देने की बात कही थी, लेकिन बाबा

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समेकित बाल विकास योजना का सच

भारत सरकार द्वारा 1975 में समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस)  की शुरुआत की गई थी, जिसके अंतर्गत ग्रामीण और शहरी

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पाकिस्तान का भय दिखाकर वोट नहीं मिलने वाला

हमारे देश के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार (नरेंद्र मोदी) कश्मीर में जाकर कहते हैं कि पाकिस्तान भारत के लिए ख़तरा

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देश को जनाभिमुख अर्थव्यवस्था की ज़रूरत

क्या सचमुच देश में एक बदलाव आते-आते भटक गया, रुक गया या समाप्त हो गया? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी

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मस्न्युलर डिस्ट्रॉफी- एक गंभीर, लेकिन अनजान रोग

दुनिया भर में एड्स को फैलने से बचाने के लिए तमाम मुहिमें चल रही हैं. वैज्ञानिक इसका इलाज ढूंढने के

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दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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उपभोक्‍ता कानून और हम: जागो, ग्राहक जागो

बढ़ते बाज़ारवाद के दौर में उपभोक्ता संस्कृति तो देखने को मिल रही है, लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी है. आज हर व्यक्ति उपभोक्ता है, चाहे वह कोई वस्तु खरीद रहा हो या फिर किसी सेवा को प्राप्त कर रहा हो. दरअसल, मुना़फा़खोरी ने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर दी हैं. वस्तुओं में मिलावट और निम्न गुणवत्ता की वजह से जहां उन्हें परेशानी होती है, वहीं सेवाओं में व्यवधान या पर्याप्त सेवा न मिलने से भी उन्हें द़िक्क़तों का सामना करना प़डता है. हालांकि सरकार कहती है, जब आप पूरी क़ीमत देते हैं तो कोई भी वस्तु वज़न में कम न लें.

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मिशन 2020

भारत ने लंदन ओलंपिक में 2 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर आज तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सबके सामने एक बड़ा प्रश्न है कि सवा अरब की आबादी वाला देश महज़ 6 ओलंपिक पदक ही जीत पाया. लेकिन क्या आबादी मेडल जीतने का सही पैमाना हो सकती है. क्या यह संभव है कि हर देश अपनी आबादी के हिसाब से ओलंपिक पदकों पर क़ब्ज़ा कर सके.

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