अब सड़क पर नहीं चल पाएंगे पुराने वाहन, सरकार लगाने जा रही है रोक

पुराने वाहनों को अनिवार्य रूप से कबाड़ घोषित कर सड़कों से हटाने की कबाड़ नीति को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक

Read more

छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों में 2168 करोड़ रुपए की अनियमितता : ग़रीब प्रदेश में ‘विकास’ की लूट

बात एक ऐसे प्रदेश की जिसे प्रकृति ने समृद्ध-संपन्न बनाया, लेकिन प्रशासनिक अकुशलता, सरकारी काहिली, नीतियों और दूरदृष्टि के अभाव

Read more

सांसद ने गोद लिया और फिर अनाथ छोड़ दिया : अच्छे दिनों पर भारी आदर्श ग्राम पठारी

महोबा के इस गांव में आजादी के बाद से अब तक पानी, बिजली, सड़क नदारद मोदी का नाम आते ही

Read more

ऐसे साथियों के होते दुश्मनों की क्या ज़रूरत

सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से सहमति रखने वाली अपनी छोटी-छोटी इकाइयों से परेशानी रहती है. उक्त लोग पार्टी

Read more

मैं फराह की फर्स्ट बेबी हूं : दीपिका

डिंपल गर्ल दीपिका पादुकोण ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत निर्देशक फराह खान के निर्देशन में बनी फिल्म ओम् शांति ओम्

Read more

फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल फर्रु़खाबाद पहुंच तो जाएंगे, लेकिन वापस कैसे लौटेंगे. इसका मतलब या तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर पत्थर चलते या फिर गोलियां चलतीं, दोनों ही काम नहीं हुए.

Read more

लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

Read more

तमिलनाडुः बदहाल जनता और नेताओं के खोखले वादे

तमिलनाडु की राजनीति दो गुटों में बंटी हुई है. एक गुट का नेतृत्व जयललिता की पार्टी एआईडीएमके करती है और दूसरी तऱफ वह गुट है, जो एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके के नेतृत्व में है और जिसमें कांग्रेस भी शामिल है. यह दोनों पार्टियां द्रविड़ पार्टियां कहलाती हैं, क्योंकि इतिहास में द्रविड़ संग्राम से इनका जन्मा हुआ, जो कि उत्तर भारतीय पार्टियों के ख़िला़फ शुरू हुआ था.

Read more

साहित्‍यकार की हत्‍या से उठे सवालः डॉ. अनिल सुलभ

साहित्यकार तथा आकाशवाणी, पटना मे कार्यक्रम अधिशासी रहे सीताराम यादव की हत्या ने क़ानून और राज्य सरकार के दावों की पोल खोल दी है. डॉ. अनिल सुलभ ने सदाक़त आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शोक-गोष्ठी में शोक जताते हुए कहा.

Read more

उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

फलों के उत्पादन में ज़िले को अग्रणी बनाने के लिए मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के प्रति विभाग पूरी तरह चौकस है. विभाग का प्रयास है कि आम, लीची, केला आदि के उत्पादन के मामले में ज़िला स्वालंबी बने.

Read more

सीवानः विकास की गाड़ी बहुत धीमी हैं

कहने को तो सुशासन में सीवान बदला है लेकिन जनापेक्षाकृत उतना नहीं! यहां अभी भी कई समस्याएं जस की तस हैं. सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्य हो रहे हैं. लेकिन कई सड़कों का निर्माण कार्य फिलहाल ठप है.

Read more

साल भर में ही टूट गई सड़क

एक तऱफ सरकार चाहती है कि राज्य का हर गांव पक्की सड़कों के माध्यम से ज़िला मुख्यालय से जुड़ जाए, लेकिन दूसरी तरफ उनके ही कुछ अधिकारी लूट खसोट में लिप्त दिख रहे हैं. मामला रोहतास ज़िले में ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, सासाराम द्वारा मुख्य मंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत बनाए गए सेमरा मध्य विद्यालय से पिपरी होते हुए कठडिहरी पथ में हुए अनियमितता की है.

Read more

काम के नाम पर खानापूर्ति

सरकार जनता का जीवन स्तर सुधारने के लिए उन्हें सड़क, पेयजल, बिजली, नाला, पुल जैसी मूलभूत सुविधा देने के लिए चाहे लाख कल्याणकारी योजनाएं बना ले, लेकिन सही मायने में ऐसी योजनाएं उसी के कारिदों की कारस्तानी के कारण पूरी तरह से धरातल पर उतरती नज़र नहीं आ रही है.

Read more

ऐसी सड़क बनेगी तो फिर क्या बोलिएगा

सड़क को लेकर नीतीश कुमार की लाख चिंता के बावजूद ज़िलों में विभाग के अधिकारी नियम क़ानून ताक पर रखकर अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं. रोहतास ज़िले में बनाए जा रहे ग्रामीण पथों में भारी अनियमितता देखी जा रही है. पथ निर्माण में कम सामग्री लगने की वजह से स़डक तुरंत उखड़ गई.

Read more

शहरीकरणः कब चेतेंगे हम

दुनिया में तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ की हालिया रिपोर्ट के दो आंकड़े गौर करने योग्य हैं. पहला यह कि इस वर्ष के अंत तक विश्व की आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी, जबकि भारत में 30 प्रतिशत लोग शहरी होंगे. दूसरा यह कि 2050 तक हिंदुस्तान की आधी आबादी महानगरों, नगरों एवं कस्बों में निवास करेगी और तब तक विश्व स्तर पर शहरीकरण का आंकड़ा 70 प्रतिशत पर पहुंच चुका होगा.

Read more

शहर इंसानों के लायक नहीं रहे

दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल होने हैं. दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर के रूप में तैयार किया जा रहा था. बारिश ने सरकार और योजना बनाने वाले उच्च अधिकारियों की पोल खोल दी. देश की राजधानी में बारिश के पानी की निकासी का इंतज़ाम नहीं है. रिहायशी इलाक़ों से लेकर सड़कों तक पानी भर गया. ट्रैफिक जाम के चलते लोग घंटों रास्ते में फंसे रहे.

Read more

आपके शहर की सड़कें-गलियां कैसी हैं?

आपके शहर या मुहल्ले की सड़क बनने के एक महीने के भीतर ही टूट जाती है. फिर सालों तक उसकी मरम्मत नहीं होती? सड़क बनाने के लिए सरकार ने तो पूरा पैसा दिया था, तब इतनी घटिया सड़क क्यों बनी?

Read more

दिल्‍ली का बाबूः नौकरशाहों का बढ़ा रुतबा

प्रशासन में विशेषज्ञ और सामान्य के बीच का मतभेद नया नहीं है और न ही यह बात किसी से छुपी है कि विशेषज्ञों को उनके काम के मुताबिक़ महत्व नहीं मिलता. इन दिनों सड़क परिवहन मंत्रालय के इंजीनियरों की फौज नौकरशाहों से ख़़फा है. इंजीनियरों का आरोप है कि नौकरशाह उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं.

Read more

सार–संक्षेपः सुंदरी, ब्लैकमेलिंग और अ़फसरशाह

प्रदेश के नौकरशाह तमाम प्रकार के भ्रष्टाचार में तो लिप्त हैं ही, पर अ़फसरों का एक वर्ग सुरासुंदरी के मोह में भी फंसा हुआ है. एक मामला हाल ही में उजागर हुआ है. राजधानी भोपाल के समीप औबेदुल्लागंज में पुलिस के आतंकवादी निरोधक दस्ते ने जबलपुर के एक ऐसे गिरोह को पकड़ने में सफलता पाई है, यह गिरोह सुंदर लड़कियों को अ़फसरों के पास भेजकर उनके अंतरंग संबंधों को खुफिया कैमरे में क़ैद कर अश्लील फिल्में बनाता था.

Read more

सरकारी दस्तावेज़ देखना आपका अधिकार है

आरटीआई क़ानून में कई प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था है. निरीक्षण का मतलब है कि आप किसी भी सरकारी विभाग की फाइल, किसी भी विभाग द्वारा कराए गए काम का निरीक्षण कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आपके क्षेत्र में कोई सड़क बनाई गई है और आप उसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री से संतुष्ट नहीं हैं या सड़क की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं तो आप निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

Read more

बनते ही उखड़ती हैं सड़कें

मध्य प्रदेश में सड़कें बनने के तुरंत बाद टूटने लगती हैं. यह सिलसिला कांग्रेस और भाजपा, दोनों की सरकारों के दौरान बदस्तूर जारी है. इसका एक बड़ा कारण सरकारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और घपले- घोटाले हैं जिसके कारण निर्माण के गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता है. आरोप है कि अधिकारी केवल सरकारी पैसे खर्च करने और जल्दी-जल्दी निर्माण कार्य पूरा करने पर ही ध्यान देते हैं.

Read more