संसद दलालों को चिन्हित और बहिष्कृत करे

सुुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैैसले में कोयला घोटाले की रिपोर्ट को सच साबित कर दिया और उसने चार कोल

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क्या कश्मीरी अवाम मोदी को पसंद करने लगी हैं?

लगता है कि पूरे हिंदुस्तान में ज़बरदस्त मोदी लहर चलाने के बाद भाजपा एक मात्र मुस्लिम राज्य यानी जम्मू-कश्मीर की

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संविधान ,राजनितिक दल और लोकतंत्र : डॉ अम्बेडकर की चेतावनी सच साबित हो रही है

25 नवंबर, 1949 को संविधान बनकर तैयार हो चुका था. संविधान सभा संविधान बनाने की अपनी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी पूरी कर

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पाकिस्तान में नवाज शरीफ का राज: बहेगी अमन की बयार !

पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई व्यक्ति, यानी नवाज शरीफ तीसरी बार प्रधानमंत्री बन रहे हों.

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व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है

कर्नाटक में कांग्रेस भारी बहुमत से जीत गई और भारतीय जनता पार्टी हार गई. क्या इसका मतलब हम यह निकालें

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जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा सुपर फ्लॉप हो सकती है, क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि हिंदुस्तान के लोगों

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हमारा लोकतंत्र भ्रष्टाचार बनाए रखने का हथियार है

काम तो सचमुच कमाल के हो रहे हैं. सीबीआई सुप्रीम कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपती है, जिसका रिश्ता 26 लाख

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भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

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मानदेय का अर्थशास्त्र नहीं बदला

बात नब्बे के दशक के शुरुआती वर्षों की है. उस व़क्त मैं अपने शहर जमालपुर से दिल्ली आया था. अख़बारों में लिखना-पढ़ना तो अपने शहर से ही शुरू कर चुका था. लिहाज़ा दिल्ली आने के बाद जब बोरिया-बिस्तर लगा और पढ़ाई शुरू हुई तो उसके साथ-साथ अख़बारों के दफ्तर में इस उम्मीद में चक्कर काटने लगा कि कोई असाइनमेंट मिले, ताकि घर से मिलने वाले पैसों के अलावा कुछ और पैसों का इंतज़ाम हो सके.

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काटजू का जादुई यथार्थवाद

पिछले दिनों दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में वरिष्ठ पत्रकारों एवं संपादकों का जमावड़ा हुआ, मौक़ा था पत्रकार शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन की वाणी प्रकाशन से प्रकाशित किताब स्मार्ट रिपोर्टर के विमोचन का. किताब का औपचारिक विमोचन प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू के साथ-साथ एन के सिंह, आशुतोष, कमर वहीद नकवी एवं शशि शेखर ने किया.

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हम अपनी बात पर क़ायम हैं

कोयले की कहानी कोयले की तरह और काली होती जा रही है. जब चौथी दुनिया ने 25 अप्रैल-1 मई 2011 के अंक में 26 लाख करोड़ का महाघोटाला शीर्षक से कहानी छापी तो हमें लगा कि हमने एक कर्तव्य पूरा किया, क्योंकि जनता के प्रतिनिधियों, सरकार बनाने वाले प्रतिनिधियों ने हिंदुस्तान के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा कुछ लोगों की जेब में डाल दिया और उसमें से कुछ पैसा उनकी जेब में भी गया.

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कॉरपोरेट सेक्टर अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को समझे

बीती 27 फरवरी को बंगलुरू में ईटीवी उर्दू और ईटीवी कन्नड़ ने एक सेमिनार किया, जिसका विषय था-फ्यूचर ऑफ कॉरपोरेट्‌स इन इंडिया. मुख्य वक्ता कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली थे और मुख्य अतिथि थे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा. सेमिनार में जाफर शरीफ, एम वी राजशेखर एवं जमीर पाशा भी शामिल थे, जो कर्नाटक की बड़ी हस्तियां हैं.

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देश का लोकतंत्र और नौजवान

हमारा देश भूलने की विधा का महारथी है. किसी भी चीज़ को हम बहुत जल्दी और बहुत आसानी से भूल जाते हैं. इनमें भुलाने वाले विषय होते हैं, लेकिन वे विषय भी होते जिन्हें कभी भुलाना नहीं चाहिए, याद रखना चाहिए. यह भी कह सकते हैं कि हम अपने पुरुषार्थ को ही भूल जाते हैं. अन्ना हजारे की पूरी कहानी में कुछ ऐसा ही हुआ. अन्ना हजारे का साथ देश भर के लोगों ने दिया.

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सत्ता की वसीयत सियासत की विरासत

हिंदुस्तान में अब विरासत की ही सियासत होगी. वंशवाद की ही राजनीति होगी. इस सियासी दुनिया में आम आदमी के लिए जगह पाना तो पहले भी मुश्किल था, अब तो नामुमकिन सी बात होगी. हां, अगर राजनीति में आपका कोई माई-बाप है, तब तो आप सपने संजोने की क़ाबिलियत रखते हैं. अगर नहीं है तो आपको राजनीति में रहने का कोई हक़ नहीं है.

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अन्ना और रामदेव ने जनता का विश्वास खो दिया

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव का इन पांच राज्यों में न घूमना शुभ संकेत है. शुभ संकेत इसलिए है, क्योंकि अन्ना हजारे की भाषा कांग्रेस विरोधी थी और बाबा रामदेव तो कांग्रेस की जड़ में मट्ठा डालने का ही काम कर रहे थे. इससे ये जनता की शक्ति के प्रतीक न बने रहकर कांग्रेस पार्टी की विरोधी ताक़त के प्रतीक बन रहे थे. इन्होंने कभी जनता की ताक़त, खराब होते लोकतंत्र, खराब होते चुनाव और आशाएं तोड़ते नेताओं को अपना निशाना नहीं बनाया.

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कांग्रेस सरकार इज़राइल की दोस्त है

इज़राइल के अ़खबारों में भारत-इज़राइल दोस्ती की कहानियां धड़ल्ले से छप रही हैं. दोनों देशों को एक नेचुरल फ्रेंड बताया जा रहा है. साथ में यह भी बताया जा रहा है कि किस तरह अमेरिका की यहूदी लॉबी ने अमेरिका, और भारत को एकजुट किया. यही यहूदी लॉबी भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील और इज़राइल से हथियार खरीदने की डील के पीछे है.

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यह समझदारी भरा फैसला नहीं है

कितना भी कहें और कितना भी सोचें, लेकिन ऐसा लगता है कि फर्क पड़ने वाला नहीं है. देश की बुनियादी समस्याओं को हल करने के कई सारे तरीके हैं, पर अगर ऐसे रास्ते को, जो कहीं पहुंचता ही न हो या दुनिया में जिसे आजमाया जा चुका है, हम फिर एक बार आजमाएं तो इसे बुद्धिमानी नहीं, बेवकूफी ही कहेंगे. यह सवाल दिमाग में उठता है. देश में बाज़ार है, जो लोगों की ज़रूरतें पूरी करता था, लेकिन वह समाज और राजनीति को दिशा नहीं देता था.

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पीत पत्रकारिता : लोकायुक्त प्रारूप पर फ़र्ज़ी ख़बर छापी

बिहार में पत्रकारिता का स्तर कितना गिर रहा है, इसकी एक ताज़ा मिसाल है पटना से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान में टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल के नाम से प्रकाशित समाचार, जिसका शीर्षक है- लोकायुक्त का यह प्रारूप रोल मॉडल है.

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