पर्वत प्रदेश को भी मार रहा सूखा बैताल : कहीं लुप्त न हो जाए नैनी का ताल

हिमालयी राज्य उत्तराखंड भी इस बार बुरी तरह सूखे की चपेट में आ चुका है. गर्मी की शुरुआत होते ही

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वर्तमान अर्थव्यवस्था से संत्रस्त सृष्टि

अब आपको ज्ञात हो गया होगा कि समान वित्त वितरण में कोई कठिनाई नहीं है. यह योजना शाश्वत चल सकने वाली और संभव है. आपने देख लिया होगा कि वर्तमान अर्थव्यवस्था से किसी को भी संतोष नहीं है. समाजवाद शब्द की व्याख्या किए बिना ही या मतलब समझे बिना ही आपको जंच गया होगा कि समान रूप से सबको धन का बंटवारा हो जाए तो वह ही अति उत्तम मार्ग है.

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नंदा देवी महोत्सव : हर तरफ मां के जयकारे की गूंज

उत्तराखंड के कई हिस्सों में नंदा देवी का उत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता है. नैनीताल में भी इस वर्ष 108वां उत्सव मनाया गया. ऐसी मान्यता है कि कंस ने जब देवकी की आठवीं संतान को मारने के लिए उसे उठाया तो वह ग़ायब हो गई और हिमालय में जाकर बस गई.

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हिमालय को बचाने की अंतरराष्ट्रीय पहल

जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़ का जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ा है. इंसान अपने फायदे के लिए एक तऱफ जहां जंगलों का सफाया कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसने प्राकृतिक संपदा की लूटखसोट मचा रखी है, बग़ैर इस बात का ख्याल किए हुए कि इस पर अन्य जीवों का भी समान अधिकार है. बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को भी गड़बड़ कर दिया है, जिससे यहां पाए जाने वाले कई जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं या होने के कगार पर हैं.

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गंगोत्री में ही गंगा मैली

हर धर्म की अपनी मान्यताएं-परंपराएं होती हैं. आस्था को विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता, किंतु ऐसा भी नहीं कि उसमें कोई तर्क न हो. यदि धर्म न हो तो समाज में समरसता, भाईचारा और उल्लास देखने को न मिले.

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तुम जिओ हजारों सालः सुरक्षित हिमालय की मुहिम में स‍क्रिय हैं सुंदरलाल बहुगुणा

भारत के प्रख्यात पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा इन दिनों सुरक्षित हिमालय के मुहिम में दिन-रात सक्रिय हैं, अपने पच्चासीवें जन्म दिन पर 85 वृक्षों का रोपण कर बहुगुणा जी ने दून स्थित हेस्को ग्राम परिसर में स्कूली बच्चों के मध्य दिए अपने संदेश में कहा कि हरियाली सबसे अच्छी संपन्नता है,

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भगवान नरसिंह का शांत और लोक कल्याणकारी रूप

देवभूमि हिमालय के पावन जोशीमठ में भगवान नरसिंह की एक ऐसी दिव्य मूर्ति है, जो कला, धार्मिक विश्वास और मान्यताओं का बेजोड़ नमूना है. शालिग्राम पत्थर से बनी यह मूर्ति जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा पूजित उनकी तपोस्थली ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) में नारायण धाम के रूप में विख्यात है.

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हेमकुण्‍ड साहिब: आस्‍था के सहारे दुर्गम रास्‍ता तय करते हैं यात्री

देवभूमि हिमालय में स्थित सिखों के पावनधाम हेमकुंड साहिब जाने वाले सैकड़ों यात्रियों को अव्यवस्था के चलते जान हथेली पर रखकर यात्रा करनी पड़ रही है. राज्य सरकार के लाख दावों केबावजूद हेमकुंड यात्रा मार्ग की हालत बेहद खराब है.

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साख बचाने के लिए पहल ज़रूरी

हिमालय के ग्लेशियर पिघलने की रिपोर्ट पर ग़लती मानकर नोबेल पुरस्कार प्राप्त संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) बुरी तरह फंस गई है. बाली में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य सत्तर देशों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में इस विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ.

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राजस्‍थान के रास्‍ते महाविनाश की दस्‍तक

यह पंचांग बांचने वाले किसी पंडित की भविष्यवाणी नहीं है. यह सरहद पार के किसी दुश्मन की साजिश भी नहीं है. यह हमारी अपनी करनी है, जिसका फल हमें भुगतना पड़ेगा. जी हां, राजस्थान के रास्ते महाविनाश देश में दस्तक दे रहा है. थार मरुस्थल के लिए पहचाना जाने वाला राजस्थान हमें अपने मतलबपरस्त और अदूरदर्शी कामों के लिए सजा देने का ज़रिया बनेगा.

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हमारे लिए आजादी हमारी कमाई है

करीब 60 वर्षीय अब्दुल सलाम मुंडु को देखकर यह नहीं समझ में आता कि झुर्रियां उनके चेहरे पर हैं या फिर उनका चेहरा ही झुर्रियों के बीच है. इतने पर भी मुंडु की हाज़िरजवाबी और बेबाकी देखते ही बनती है, झूठ नहीं बोलता साहब, आपसे औरों की तरह 400 या 500 नहीं लूंगा. स़िर्फ 150 रुपये दे देना, हम आपको पूरा डल लेक दिखाएगा.

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रूपकुंड से आगे की यात्रा

पिछले दिनों कई मित्रों से इस बारे में बातें हुईं कि नया क्या पढ़ा है. मित्रों ने कई ऐसी किताबों के नाम बताए जिसे या तो प़ढ चुका था या फिर पत्रों में उसकी चर्चा पढ़कर इतना जान चुका था कि उसमें नया कुछ लग नहीं रहा था. इस बीच एक वरिष्ठ आलोचक से बात हो रही थी. नई किताबों पर उनसे चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की एक किताब-हिमालय का महाकुंभ नंदा राजजात आई है, और वह किताब उल्लेखनीय है.

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अभी और जंग लडनी है : राधा भटट

सरकारों की शोषक प्रवृत्ति नदियों के विनाश का कारण बन रही है. अगर हिमालय की नदियां सूख जाएंगी तो उत्तरी भारत तबाह हो जाएगा. बांग्लादेश और पाकिस्तान तक पानी की घोर कमी हो जाएगी. मानव आबादी ख़त्म होने लगेगी. सरकार कंपनियों का साथ दे रही है. उसे अपनी जनता की कोई चिंता नहीं है. सरकार यह सोचने तक को तैयार नहीं कि अगर प्राकृतिक स्रोत ख़त्म हो गए तो पीढ़ियां बरबाद हो जाएंगी.

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