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दलितों से किसे डर लगता है

शायद ही कोई ऐसा चुनावी मंच हो जहां से प्रधानमंत्री मोदी ने सबका साथ सबका विकास और संविधान को ग्रन्थ मानने की बात नहीं की हो, लेकिन अफ़सोस कि मंचों से क

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर त्राहि-त्राहि

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अल्पसंख्यकों के हितों और सुरक्षा पर गंभीर बहस

इट इज बेटर टू बी अन-पॉपुलर दैन टू बी अन-ट्रूथफुल यानी झूठ बोलने से बेहतर है, अलोकप्रिय होना. यह अंतिम पंक्ति थी उस शख्सियत के भाषण की, जिसे देश-दुनिया

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विदेशी फंड से संचालित गैर सरकारी संगठन देश के लिए खतरा है

सरकार की रिपोर्ट आई है कि विदेशी धन से चलने वाले देशी एनजीओ भारत के आर्थिक विकास के लिए ख़तरा हैं. विकास की परिभाषा क्या है, विकास का सही रास्ता क्या ह

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मैं भी मुंह में ज़ुबान रखता हूं…

जितने अजीब भैय्या हैं, उतने ही विचित्र उनके सवाल. वह पूछते हैं कि चुनाव के ही मौसम में नेता लोग एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में क्यों जाते हैं? अजीब

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अधर में लटके महत्वपूर्ण विधेयक

लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद देश की करोड़ों जनता का प्रतिनिधित्व करती है. सदन की शोभा सांसदों से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और आचरण से बढ़ती है. इसे प

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सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण आपका अधिकार है

आरटीआई क़ानून में कई प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था है. निरीक्षण का मतलब है कि आप किसी भी सरकारी विभाग की फाइल अथवा किसी भी विभाग द्वारा कराए गए काम का

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चुनावी पिच पर सौगातों की बैटिंग

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार आम चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पूर्व अपने सभी मोर्चे दुरुस्त कर लेना चाहती है, ताकि चुनावी मैदान में जनता के

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कब होगी न्यायालय की अवमानना?

पिछले अंक में हमने आपको आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि आपको लोक सूचना अधिकारी की तरफ से ऐसा जवाब मिले कि तीसरे प

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी,

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यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढं

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रह

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसा

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किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए न

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक

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फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसक

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जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्याग्रह मार्च ग्वालियर से 3 अक्टूबर को शुरू हुआ. योजना के मुताबिक़, क़रीब एक लाख किसान ग्वालियर से चलकर दिल्ली पहुंचने वाले थे. इस मार्च में शामिल

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सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उस

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दा

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अन्ना और रामदेव की वजह से आशाएं जगी हैं

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे लोगों को सावधान हो जाना चाहिए. इतने दिनों के बाद भी उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन-सा सवाल उठाना चाहिए और कौन-

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आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरका

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भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्

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असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी

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प्रथम अपील कब और कैसे करें

आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है. ऐसी स्थिति में अपील

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यूपीए-2 के तीन साल : सत्ता के संवेदनहीन होने की कहानी

22 मई की रात. तीन साल पूरे होने के अवसर पर यूपीए-2 सरकार ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत

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बिहारः इंतिहा हो गई इंतज़ार की

दरभंगा स्थित अशोक पेपर मिल प्रबंधन और मज़दूर कामगार यूनियन के बीच शुरू हुई तक़रार थमने का नाम नहीं ले रही है. मज़दूर कामगार यूनियन के नेताओं द्वारा जहां

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