पिछले साल देश भ्रष्टाचार और विदेश में रखे काले धन की चर्चा में व्यस्त रहा. कुछ मंत्री जेल गए और अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के खिला़फ आंदोलन शुरू किया. हालांकि भ्रष्टाचार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, देश में रोजग़ार के अवसरों का अभाव.
Tags: Anna Hazare, Corruption, Employment, Movement, government, अन्ना हज़ारे, आंदोलन, भ्रष्टाचार, रोजग़ार, सरकारी Posted in आंदोलन, कानून और व्यवस्था, राजनीति, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा बरौनी ताप विद्युत संयंत्र का विस्तारीकरण किया जाना है. राज्य मंत्रिमंडल ने 3666 करोड़ रुपये की इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है. सरकार का कहना है कि फिलहाल 2250 मेगावॉट क्षमता वाले कोयला आधारित विद्युत संयंत्र की स्थापना होगी.
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जितना हम अनुभव करते हैं, उससे ज़्यादा कठिन दौर से हमारा देश गुज़र रहा है. 1991 में हुए आर्थिक सुधारों ने ढेर सारी संभावनाएं पैदा कीं, जिन्होंने इस बात की उम्मीद बढ़ाई कि देश की आर्थिक विकास दर में वृद्धि होगी. पिछले बीस सालों में बहुत सारी घटनाएं घटीं. आर्थिक विकास दर में लगातार वृद्धि हुई, जिसे विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले विकास में देखा जा सकता है.
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नए साल की समाप्ति का रास्ता क्या है. हम शुरू करते हैं अन्ना हजारे के अनशन और जेल भरो आंदोलन की धमकी से, जिसके बारे में 27 दिसंबर की दोपहर के बाद पता चल गया था कि उनका यह आंदोलन मुंबई में असफल रहा. दिल्ली की बात कुछ और है. यह ऐसा शहर है, जहां राजनीति का प्रभाव है, शक्ति का केंद्र है, लेकिन मुंबई में ऐसा नहीं है.
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एक और आवाज़ आजकल जोरों से उठाई जा रही है, वह है सहकारिता आंदोलन की. सहकारिता आंदोलन देश के लिए, राष्ट्र के हर व्यक्ति के लिए उपादेय है, बशर्ते कि इस पद्धति का ईमानदारी से अनुसरण किया जाए.
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पांच जून, 1975 को पटना के गांधी मैदान में लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि इस संसद को आग लगा दो. अगले दिन अ़खबारों ने उनके इसी वाक्य को इस समाचार का शीर्षक बनाया. लालू यादव उस व़क्त छात्रनेता थे, युवा थे और जयप्रकाश जी के आंदोलन के महत्वपूर्ण आंदोलनकारी थे. 29 दिसंबर, 2011 को लालू यादव सचमुच संसद को आग लगाने का काम कर रहे थे.
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पिछले अप्रैल महीने से सिविल सोसाइटी की एक टीम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है. संसद में भी इस आंदोलन के पक्ष-विपक्ष में बहस हो रही है. सरकार की परेशानी बढ़ गई है. यह एक अलग तरह का आंदोलन है.
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भ्रष्टाचार के खिला़फ अन्ना हजारे के आंदोलन को लेकर मुस्लिम संगठनों के रहनुमाओं ने सियासी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं. एक तऱफ पूरा देश भ्रष्टाचार से परेशान है, वहीं दूसरी तऱफ कुछ मुस्लिम संगठनों ने अन्ना हज़ारे के आंदोलन का विरोध करने का ऐलान किया.
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एक सच्ची घटना है- कुत्ता क्यों मरा? पंजाब के सबसे क़द्दावर मुख्यमंत्री थे सरदार प्रताप सिंह कैरो. स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ बड़े क़द्दावर नेता थे. एक बार दिल्ली से चंडीगढ़ जा रहे थे. उनके साथ उनके संसदीय सचिव देवीलाल भी थे. सरदार कैरो की गाड़ी तेज़ी से भाग रही थी कि एक कुत्ता बीच में आ गया. कुत्ते की मौत हो गई. सरदार कैरो ने थोड़ी दूर जाकर गाड़ी रुकवाई.
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प्रेसीडेंट बुश के ऊपर जूता क्या चला, सारी दुनिया में जूतों की बहार आ गई. हमारे देश में भी यह दूसरा या तीसरा वाक़िया है, जब राजनेताओं के ऊपर हमले हुए. जनार्दन द्विवेदी पर जूता फेंका गया और अब शरद पवार को एक शख्स ने थप्पड़ मारा. ये घटनाएं दो तरह के संकेत देती हैं. पहला संकेत यह है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों से नौजवानों का भरोसा उठ रहा है. उन्हें यह लगता है कि धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल, सिविल ना़फरमानी, ये शब्द बेमानी हो गए हैं और इनके ऊपर अमल करने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.
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अन्ना का आंदोलन अब अपने आख़िरी पड़ाव पर आता दिख रहा है. दो स्थितियां बनती हैं. पहली यह कि सरकार अगर एक मज़बूत जन लोकपाल क़ानून लेकर आती है तो अन्ना का आंदोलन फिजल आउट कर जाएगा.
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देश की जनता को क्या इस बार भी निराश होना पड़ेगा और अगर निराश होना पड़ेगा तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छी ख़बर नहीं मानी जानी चाहिए. अन्ना हजारे ने जब रामलीला मैदान में आंदोलन किया, तब उनके साथ लोग बड़े विश्वास के साथ सारे देश में खड़े हो गए.क्या अन्ना हजारे और उनकी टीम उस विश्वास की रक्षा कर पाएंगे, जो देश के लोगों ने उन पर किया है?
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अन्ना और रामदेव ने जनता का विश्वास खो दिया |
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