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Posts Tagged ‘किसान’
मसुकदाना की खेती से किसान खुश
मसुकदाना की खेती से किसान खुश

टाल क्षेत्र के किसान कल तक कम पैदावार होने और लागत भी न निकल पाने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अब वे परंपरागत खेती को बाय-बाय कहकर नई खेती अपना रहे हैं. मोकामा-टाल के अधिकांश किसान भले ही आज भी क्षेत्र के एक फसली और टाल योजना लागू न होने का रोना रो रहे हों,

Tags: Avoid sector, Bihar, Calcutta, Farming, Mokama, Msukdane, farmers, medicinal, औषधीय, किसान, कोलकाता, खेती, बिहार, मसुकदाने, मोकामा
Posted in आर्थिक, जरुर पढें, राज्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
क्या वे सजग प्रहरी हैं?
क्या वे सजग प्रहरी हैं?

इस बात पर बहस हो सकती है कि किसी आदमी के लिए कुत्ता किसिम का, कुत्ता कहीं का जैसा जुमला गाली है या व़फादारी की पदवी. गांव-गली के कुत्ते अपने इलाक़े की पहरेदारी करते हैं. कहीं भी कोई ग़ैर मामूली हरक़त हुई कि वे चौकन्ने हो जाते हैं और ज़रूरत पड़ी तो भौंकने भी लगते हैं कि होशियार-ख़बरदार.

Tags: Chhattisgarh, Jharkhand, Maoist, Public, Tribal, administration, corporate, farmers, village, आदिवासी, किसान, कॉरपोरेट, गांव, छत्तीसगढ़, जनता, झारखंड, प्रशासन, माओवादी
Posted in आंदोलन, आर्थिक, कवर स्टोरी-2, राजनीति, राज्य, समाज by Author: आदियोग | No Comments » | Read More...
दाल के कटोरे की चमक फीकी पड़ी
दाल के कटोरे की चमक फीकी पड़ी

कृषि आधारित राज्य बिहार के किसान बड़े ही अजीबोगरीब दौर से गुज़र रहे हैं. सूबे की भौगोलिक बनावट और आपदाओं की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है. उनके जख्मों पर मरहम लगाने का दावा करने वाली सरकारी एवं गैर सरकारी एजेंसियों के कारनामे किसानों के नाम पर हो रही हीलाहवाली साफ बयां करते हैं. पूर्वोत्तर ज़िले का अधिकांश भू-भाग हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाता है. गंगा, गंडक, कोसी और कमला बलान किसानों को खून के आंसू रूलाती हैं. वहीं दक्षिण बिहार का अधिकांश भू-भाग पठारी है या फिर नक्सल प्रभावित. इस वजह से इलाक़े के किसानों के लिए खेती अब निर्भरता का जरिया नहीं रह गई है.

Tags: Agriculture, Nitish Kumar, Pilot Project, farmers, pulses, किसान, दलहन, नीतीश कुमार, बिहार
Posted in आर्थिक, जरुर पढें, राज्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
यह वी पी सिंह की जीत है
यह वी पी सिंह की जीत है

भारतीय राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाले वी पी सिंह कई वर्षों से किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, लेकिन उन्होंने किसान आंदोलन का जो बीज बोया है, उसके फलने-फूलने का समय आ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद देश भर के किसानों की आशा जगी है.

Tags: Dadri, Reliance, Uttar Pradesh, V. P. Singh, farmers, किसान, दादरी, रिलायंस, वी पी सिंह
Posted in आंदोलन, जब तोप मुकाबिल हो, जरुर पढें, राज्य by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More...
सरसों के फूलों से शहद का उत्पादन
सरसों के फूलों से शहद का उत्पादन

भरतपुर के किसानों ने सरसों की खेती के साथ ही शहद उत्पादन के रूप में एक साहसिक क़दम उठाया है. बस उन्हें सरकारी संरक्षण-प्रोत्साहन की ज़रूरत है. अगर ऐसा हो जाए तो वे इस क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं.

Tags: Mustard flowers, Rajasthan, bee, business, honey, किसान, फूल, मधुमक्खी, व्यवसाय, सरसों
Posted in स्टोरी-6 by Author: उमाशंकर मिश्र | No Comments » | Read More...
गन्ने की राजनीति और उसके सवाल
गन्ने की राजनीति और उसके सवाल

बीते 19 नवंबर को दिल्ली का नज़ारा आम दिनों से अलग था. स़डक पर वाहनों की जगह जनसैलाब. हाथों में गन्ने का पौधा लेकर सरकार के खिला़फ नारा लगाते हज़ारों किसान. जंतर-मंतर के एक तऱफ हुक्का गु़डगु़डाते किसान यूनियन के नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत तो दूसरी ओर राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजीत सिंह अपने-अपने समर्थकों के साथ डटे थे. उसी दिन संसद का सत्र शुरू होकर अगले दिन तक के लिए स्थगित भी हो चुका था. सो, नेताओं के पास समय की कमी नहीं थी. अलग-अलग घाट का पानी पीने वाले विभिन्न नेता यानी समूचा विपक्ष एक साथ, एक ही मंच से यूपीए सरकार का मर्सियां प़ढने में जुटा हुआ था. ज़ाहिर है, ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं मिलता, वह भी बिना कुछ किए-धरे. दरअसल यह सारा विरोध केंद्र सरकार की नई गन्ना नीति को लेकर है. केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया है, जिसके तहत गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) साल 2009-10 के लिए 129 रुपये 85 पैसे प्रति क्विटल तय किया गया है. साथ ही इस अध्यादेश के मुताबिक़, अगर राज्य सरकारें गन्ने का मूल्य एफआरपी से अधिक तय करती हैं तो उसकी भरपाई भी राज्य सरकार को ही करनी प़डेगी.

Tags: BJP, Sharad Pawar, Sugarcane politics, Uttar Pradesh, farmers, आंदोलन, उत्तर प्रदेश, किसान, भाजपा, राजनीति
Posted in कवर स्टोरी-2 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
पपीते ने दी पहचान
पपीते ने दी पहचान

राजस्थान में भरतपुर ज़िले की वैर तहसील के किसान यह अच्छी तरह से समझ चुके हैं कि परंपरागत फसलों की खेती से भोजन की आवश्यकता तो पूरी की जा सकती है, लेकिन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, शादी-ब्याह एवं अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए इन पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. शायद यही कारण था कि रेतीली धरती के इन रणबांकुरों ने अपने जीवन की बेहतरी के लिए परंपरागत खेती के साथ-साथ हॉर्टीकल्चर को भी अपनाना शुरू कर दिया. मौसमी परिस्थितियों, भूमि की गुणवत्ता और बाज़ार की स्थिति को ध्यान में रखकर स्थानीय किसान फल, फूल एवं औषधीय पौधों की खेती लंबे समय से कर रहे हैं, जिससे खेती से प्राप्त होने वाले मुना़फे में न केवल वृद्धि हुई है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आया है.

Tags: Agriculture, Farmer, Farming, Rajasthan, papaya, किसान, दिल्ली, पपीता, बल्लभगढ़, राजस्थान
Posted in स्टोरी-6 by Author: उमाशंकर मिश्र | No Comments » | Read More...

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