पुराने दौर में बादशाह के फरमान को खुदा का फैसला माना जाता था. शासन के फैसले स़िर्फ एक शख्स के हाथ में होते थे. वही राज्य का पहला और आ़खिरी न्यायाधीश होता था. समय के साथ-साथ शासन चलाने का तरीक़ा बदला. फैसला कौन करे, इस निर्णय प्रक्रिया में लोग जुड़ने लगे. दुनिया के कई देशों में फैसले का अधिकार अब आम जनता के हाथों में आ गया है, जिसे हम प्रजातंत्र कहते हैं.