मगध प्रमंडल के गया ज़िले के अतरी प्रखंड में नरावट पंचायत के साठ दलित परिवारों ने दृढ़ इच्छाशक्ति, सामूहिकता एवं एकता की जो मिसाल क़ायम की है, वह समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणाप्रद है. मुरली पहाड़ी की तलहटी में बसा है नरावट पंचायत का टोला वनवासी नगर.
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान ऑपरेशन ग्रीन हंट को लेकर अजीबोग़रीब स्थिति बनी हुई है. देश के अन्य राज्यों में नवंबर 2009 से ही इसकी शुरुआत हो गई है. इसके लिए पारा मिलिट्री फोर्स के पचास हज़ार जवान लगाए गए हैं. माओवादियों का रेड कॉरिडोर इसका मुख्य निशाना है. ग़ौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव के कारण इस अभियान को रोका गया था.
अपने ही देश के लोगों पर गोलियों और बमों से आकाश द्वारा हमला. अगर यही काम सीमा पर युद्ध के दौरान होता तो हम गर्व से तालियां बजाते, पर जो होने जा रहा है वह शर्मनाक है
पुलिस एनकाउंटर शब्द की उत्पत्ति भारतीय उप-महाद्वीप में ही हुई है. जिसे भारतीय पुलिस, अर्द्ध सैन्यबल, सेना और दूसरे रक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल में लाई जाती है. वह भी इसलिए कि उसने किसी व्यक्ति की हत्या क्यों की है? पुलिस ऐसा मानती है कि उन्होंने जिसकी हत्या की है वो एक ख़ूंखार अपराधी, गैंगस्टर, आतंकवादी और माओवादी या नक्सलवादी है
बड़ी मुश्किल यह है कि आदिवासी नक्सली ख़तरे को समझ नहीं पा रहे और अपने पहाड़-जंगल की गोद को छोड़ कर सलवा जुडुम की छत्रछाया में रहने को तैयार नहीं. इस इनक़ार का मतलब है कि आदिवासी नक्सली हैं या नक्सलियों के असर में हैं और उनके मददगार हैं. उन्हें सबक सिखाने की ज़रूरत है.
अगली 14 मई को डा. बिनायक सेन को रायपुर जेल में बतौर कैदी दो साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर देश के तमाम हिस्सों में और विदेशों में भी उनकी रिहाई की मांग के लिए बड़े कार्यक्रम आयोजित किये जाने की तैयारियां जारी हैं. इसी कड़ी में गुजरे 16 मार्च से रायपुर जेल के बाहर हर सोमवार को गिरफ्तारी देने का कार्यक्रम शुरू हो चुका है. इसी दिन यानी 16 मार्च को कोलकाता और दिल्ली में भी उनकी रिहाई के लिए बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों और तबकों के लोग जुटे. 22 नोबल पुरस्कार विजेता एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था भी उनकी रिहाई चाहती है.