कांग्रेस इस भ्रम में है कि महंगाई तो पिछले कई सालों से बढ़ रही है, पर फिर भी उसे लोग वोट दे रहे हैं. शायद इसीलिए कांग्रेस ने महंगाई को बेलगाम बढ़ने की छूट दे दी है. कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का कोई क़दम महंगाई रोकने का संकेत नहीं दे रहा है, उल्टे कृषि मंत्री शरद पवार महंगाई बढ़ाने वाले बयान कुछ इस अंदाज़ में दे रहे हैं कि आम लोग खाएं या नहीं, बस जमा़खोरों की चांदी होती रहे. शरद पवार क्यों ऐसा कर रहे हैं, इसे मनमोहन सिंह ही अच्छी तरह बता सकते हैं.
दिल्ली में गृहणियां आसमान छूती महंगाई के बोझ तले दबती जा रही हैं. रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सामानों की बढ़ती क़ीमत ने उन्हें सबसे अधिक परेशान किया है.
कोई भी शासन करे, उसे समझ लेना चाहिए कि समस्याओं को टालना ख़तरनाक होता है. तेलंगाना एक ऐसी ही समस्या है. इससे पहले जब भाजपा ने छत्तीसग़ढ, झारखंड और उत्तरांचल बनाए थे, तभी लगने लगा था कि राज्यों के बंटवारे की मांग उठेगी और मज़बूती से उठेगी.
विपक्ष का नेता शेर होता है जो दिन रात आम लोगों की तकली़फों को लेकर सरकार पर गरजता रहता है तथा सरकार को मजबूर करता है कि वह आम लोगों के हितों को अनदेखा न करे, उनकी समस्याएं सुलझाए.
प्रधानमंत्री जी, लगता है कि आप सचमुच गरीबी खत्म कर देंगे।
क्या कह रहे हो? यह कैसे हो सकता है?
तो सुनिए. बढती महंगाई ने गरीबों की कमर तोड दी है. आलू, टमाटर, प्याज, दाल, चावल…. सभी खाने की चीजों के दाम इतने बढ गए हैं कि गरीब जनता खरीद नहीं सकती. भोजन के अभाव में गरीब लोग भूख से तडप कर मर रहे हैं, कुछ दिनों बाद न रहेगा गरीब न रहेगी गरीबी।।
ओह यानी हमें तुरंत ही कोई विकल्प तलाशना पडेगा गरीबों की भूख मिटाने के लिए.
सिर्फ एक विकल्प है—मवेशियों की तरह घास खाना।
घास।। वंडरफुल आइडिया. इससे तो लोगो के भोजन के पैसे बचेंगे और ईधन पर भी कुछ खर्च नहीं होगा बचत ही बचत. कमाल का विकल्प है.
सर, आपको पब्लिक प्लेटफार्म पर यह बात नहीं कहनी चाहिए थी. महंगाई फिर बढ गई.
कौन सी चीज महंगी हो गई अब?
घास।।