न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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भाजपा का सम्‍मान जदयू का अपमान

बिहार की जनता ने जदयू-भाजपा गठबंधन को भारी बहुमत से सत्ता की चाबी सौंपी तो देश-दुनिया के लोगों ने सूबे के लोगों की राजनीतिक चेतना की तारी़फ की. कहा गया कि लोगों ने बिहार की ज़रूरत को समझा और विकास के लिए जातिपात से ऊपर उठकर एकजुट होकर मतदान किया.

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