मैला उठाने की प्रथा : स्वचछ भारत में ये अस्वच्छ तस्वीर कहां रखेंगे

सिर पर मैला ढोने या हाथ से मैला उठाने का घिनौना और अमानवीय कार्य आज भी हमारे देश में न

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लोगों की आशाओं को पूरा करना योगी आदित्यनाथ की ज़िम्मेदारी है

योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री बनना बहुतों को पसंद नहीं आया. लोग यह अंदाज़ा लगा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी

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वैध खनन बंद, अवैध खनन जारी

नीतीश कुमार पिछले कुछ वर्षों से बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयास करते दिख रहे हैं.

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सरकार ही क़ानून तोड़ेगी तो क़ानून की रक्षा कौन करेगा

ये शिकायत नहीं है, ये गुस्सा भी नहीं है और इसके आगे कहें, तो अब कोई तकली़फ  भी नहीं है,

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सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की कम आमद भी अलमबरदारों को कर रही चिंतित : अफरातफरी और अव्यवस्था का महाकुम्भ

मध्य प्रदेश शासन ने उज्जैन में प्रारंभ हुए सिंहस्थ पर करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिए, परंतु पहले शाही स्नान

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जावेद बनेंगे सऊदी अरब में भारतीय राजदूत!

इस्लाम की जन्मस्थली सऊदी अरब में भारतीय राजदूत नियुक्त करने के लिए एक अच्छे मुस्लिम चेहरे की तलाश खत्म होने

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कनहर बांध विवाद : एनजीटी के फैसले का क्या असर होगा

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में ग़ैर-क़ानूनी रूप से निर्मित कनहर बांध और अवैध तरीके से किए जा रहे भूमि

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हाशिमपुरा : अदालती फैसले पर उर्दू अख़बारों का रुख

21 मार्च को जिस दिन यह फैसला आने वाला था, दैनिक इंक़लाब को छोड़ कर दिल्ली के किसी भी बड़े

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किसान महामंच : ज़मीन बचाने की जंग जारी है

भारतीय किसान यूनियन ने दिल्ली के जंतर मंतर ने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत किसान महापंचायत का आयोजन किया, जिसमें

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आखिर क्यों मारा जाता है एक पत्रकार

पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का

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किसानों की ज़मीन छीनी तो फिर आंदोलन होगा

साल 2011 से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है. यमुना का प्रदूषण स्तर काफी ब़ढ चुका है. देश में

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आज़ाद देश के गुलाम क़ानून कब खत्म होंगे

क्या आप इंडिया ट्रेजर ट्रोव एक्ट-1878 के बारे में जानते हैं? इस क़ानून के मुताबिक, अगर किसी को सड़क पर 10

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अल्पसंख्यकों के हितों और सुरक्षा पर गंभीर बहस

इट इज बेटर टू बी अन-पॉपुलर दैन टू बी अन-ट्रूथफुल यानी झूठ बोलने से बेहतर है, अलोकप्रिय होना. यह अंतिम

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देर से मिला इंसाफ़ नाइंसाफ़ी है

एक वरिष्ठ वकील साहब का पुत्र क़ानून की पढ़ाई ख़त्म करके  पिता के साथ वकालत करने लगा. बड़े वकील साहब

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बिहार विधानसभा उपचुनाव : महा-गठबंधन का भविष्य

बिहार में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए लालू यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस का एकजुट होना भारतीय राजनीति

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आम बजट : न घर का और न घाट का

अरुण जेटली का पहला बजट बहुत हद तक निराशाजनक रहा. जनता को इस बजट से बहुत आशाएं थीं, क्योंकि चुनाव प्रचार

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सेना में भ्रष्टाचार का बोलबाला मुंह खोलने वाला पागल घोषित होगा

पदकों के लिए फर्जी मुठभेड़, हथियार माफियाओं से मिलीभगत, अवैध धन के लिए जमीन घोटाला और तरक्की के लिए तिकड़म

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सच्चाई पर पर्दा डालने की समाजवादी साजिश

उत्तर प्रदेश की बिगड़ी क़ानून व्यवस्था कहीं समाजवादी सरकार के लिए अस्थिरता का कारण न बन जाए, यह चिंता समाजवादी

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कब्रिस्तानों पर अवैध क़ब्ज़े : दफ़न के लिए दो गज़ ज़मीन भी मयस्सर नहीं

लोगों ने अपनी ज़मीन-जायदाद वक़्फ करते व़क्त यही तसव्वुर किया होगा कि आने वाली नस्लों को इससे फायदा पहुंचेगा, बेघरों को घर मिलेगा, ज़रूरतमंदों को मदद मिलेगी, लेकिन उनकी रूहों को यह देखकर कितनी तकली़फ पहुंचती होगी कि उनकी वक़्फ की गई ज़मीन-जायदाद चंद सिक्कों के लिए ज़रूरतमंदों और हक़दारों से छीनकर दौलतमंदों को बेची जा रही है.

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भजनपुर के मुसलमानों को इंसाफ़ कब मिलेगा

बिहार के फारबिसगंज के भजनपुर गांव में पुलिस फायरिंग में पांच लोगों के मारे जाने की घटना को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. घटना के सूत्रधार खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं जिन निर्दोष लोगों ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवा दी, उनके परिवारीजन इंसा़फ न मिलने से दु:खी हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः उत्तर प्रदेश के बाबुओं की चिंता

अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन अभी भी उनके प्रशासन में कई लोगों, जिनमें मुलायम सिंह भी शामिल हैं, का हस्तक्षेप है. इस कारण वह कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं. बाबुओं का स्थानांतरण किया गया, लेकिन उससे प्रशासन के सफल संचालन में परेशानी हो रही है. कुछ स्थानों पर तो अखिलेश यादव यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किसे कहां रखा जाए.

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दिल्‍ली का बाबूः वित्त मंत्रालय के बाबू

वित्त मंत्रालय में कुछ नई चीज़ें हो रही हैं. अकसर देखा जाता है कि जो अधिकारी किसी मंत्री या सरकार के नज़दीकी होते हैं या फिर उनके व़फादार होते हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद दे दिया जाता है. सामान्य तौर पर सचिव रैंक के अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाता है, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति के साथ कई लोग आस लगाए रहते हैं कि इस बार उनकी बारी आने वाली है.

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मध्‍य प्रदेशः अवैध खनन और राजनीति का अटूट गठजोड़

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की भीतरी और बाहरी राजनीति से जुड़ा घटनाचक्र एकाएक काफी तेजी से घूमने लगा है. भाजपा के सत्ता में रहते हुए कटनी एवं जबलपुर ज़िलों के अंतर्गत भूगर्भ में मौजूद बॉक्साइड, मार्बल, आयरन और अन्य विभिन्न बेशक़ीमती खनिज संपदा का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है.

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मनोज झलानी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालए गए

1987 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज झलानी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाए गए हैं. वह ब्रज किशोर प्रसाद की जगह लेंगे.

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किसानों की समस्याओं पर सरकारें कब संजीदा होंगी

हमारे देश में खेती को मानसून का जुआ कहा जाता रहा है. आधुनिकता से खेती में कई बदलाव आए, मगर खेती का जोखिम कम नहीं हुआ. अलबत्ता, आधुनिक खेती के चलते इसमें कई नए तरह के जोखिम ज़रूर जुड़ गए. अब भारत का किसान मौसम के जोखिम के अलावा सरकारी तंत्र और आधुनिक टेक्नोलॉजी के जोखिम भी एक साथ झेलता है. पश्चिम बंगाल के बर्दवान ज़िले में बीते 6 महीनों के भीतर 27 किसान अपनी जान दे चुके हैं.

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मध्य प्रदेश : अवैध खनन का काला कारोबार

कटनी और जबलपुर देश के उस केंद्रीय भू-भाग में स्थित हैं, जिसे राष्ट्र की हृदयस्थली कहा जाता है. इस इलाक़े को आज रौंदा, नोचा, खसोटा और लूटा जा रहा है. करोड़ों-अरबों की प्राकृतिक संपदा का मुना़फा मुट्ठी भर हाथों में क़ैद हो रहा है. कंपनियां, सरकार, प्रशासन एवं दलाल इस सीमा तक सक्रिय हैं कि शासकीय नियम-क़ानून तो दूर, मानवीय मूल्यों का भी मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है.

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पंचायती राज व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत

देश की बदक़िस्मती कहिए या व्यवस्था की खामी कि किसी भी उद्देश्य को हासिल करने से पहले ही उसमें भ्रष्टाचार के घुन पनपने लगते हैं. चाहे वह खेल के आयोजन का मामला हो, स्वास्थ्य, सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों या गोदामों में अनाज सड़ने का मसला हो, कोई विभाग या क्षेत्र नहीं बचा है, जहां भ्रष्टाचार हावी न हो.

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चिकित्सा अब समाजसेवा नहीं

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के भोगनवाला गांव निवासी शमशाद (25) को उसके परिवारीजन इलाज के लिए ज़िला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों में पानी होने की बात कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया. मरीज के परिवारीजन डॉक्टरों से घंटों मिन्नतें करते रहे, मगर अस्पताल प्रशासन अपने रवैये पर अड़ा रहा.

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बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी.

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महंगी बड़ी शराब कि…

शराब जितनी पुरानी हो, उतनी बढ़िया होती है, इस जुमले को अमल में लाने वाले एक शख्स पेरिस से उड़ान भर चुके हैं, लेकिन फ्लाइट पर चढ़ने से पहले उस एशियाई वाइन प्रेमी ने चार्ल्स द गॉल एयरपोर्ट पर ऐसी ख़रीदारी की कि शहर में खुसफुसाहट शुरू हो गई.

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