संसद पर हमले की 16वीं बरसी: श्रद्धांजलि के समय दिखी सियासी एकजुटता

बुधवार को संसद पर हमले की 16वीं बरसी है. इस मौके पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए सत्ता

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर बीजेपी नेताओं पर चलेगा साज़िश रचने का केस

नई दिल्ल्ली, (विनीत सिंह) : बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम् फैसला लेकर सभी को चौंका

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

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आडवाणी जी, कार्यकर्ता आपकी राह देख रहे हैं

आडवाणी जी को धन्यवाद देना चाहिए कि आखिर उनकी समझ में आ गया कि देश की जनता उनकी पार्टी से खुश नहीं है. उन्हें शायद यह भी समझ में आ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी अपने नेतृत्व से खुश नहीं हैं. इस नेतृत्व की परिभाषा क्या है?

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मध्‍य प्रदेशः आडवाणी की रथ यात्रा, जब चौथी दुनिया में प्रकाशित कार्टून बन गया विपक्ष का हथियार

पत्रकारिता की ही एक विधा कार्टून अपनी तीक्ष्ण भाषा और कल्पना के सहारे ब़डी से ब़डी कहानी को आसानी से लोगों के दिलो-दिमाग़ तक पहुंचा देता है. राजनीति की कठिन और अबूझ पहेलियों को सुलझाने में कार्टून का एक ब़डा रोल है. राजनीतिक सरोकार को आम आदमी और आम आदमी के सरोकार को राजनीति तक पहुंचाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में चौथी दुनिया में मेरी दुनिया कॉलम के तहत प्रकाशित कार्टून भी अपनी भूमिका ब़खूबी निभा रहा है.

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ज़ख्म कुरेदने की क़वायद

पुरानी यादें भी एक आश्चर्यजनक चीज हैं. हम लोग अपनी पुरानी विजय को ताजा रखना चाहते हैं और सोचते हैं कि बीच का समय समाप्त हो जाए और हम फिर से युवा हो जाएं. इसी तरह की स्थिति लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा में देखी जा सकती है. उन्होंने एक बार फिर से रथ यात्रा करने का फैसला लिया है. वह फिर से अपनी पुरानी रथ यात्रा की सफलता को भुनाना चाहते हैं.

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काला धन बनाम राजनीतिक हथकंडे

भारत दुनिया की नज़रों में 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हो गया था. उस समय हमारे नेताओं, अधिकारियों एवं देशभक्तों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी इस विशाल राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाना. वहीं दूसरी तऱफ देश के अंदर वे शक्तियां भी सक्रिय हो उठीं, जिन्हें भारत की आत्मनिर्भरता और आम जनता से ज्यादा फिक्र इस बात की थी कि वे किस प्रकार कम समय में अधिक धन-संपत्ति का संग्रह कर सकें.

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भाजपा और संघ की दु:ख भरी कहानी

यह कहानी न भारतीय जनता पार्टी की है और न उसे अपना राजनैतिक चेहरा मानने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की है. यह कहानी उस दर्द की है, जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सच्चा स्वयं सेवक और भारतीय जनता पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता पिछले पंद्रह सालों से भोग रहा है.

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गडकरी जी, अध्‍यक्ष की तरह दिखिए

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता का कद किसी उद्योगपति की पत्नी से छोटा हो गया है? भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी आईपीएल के मुंबई और चंडीगढ़ की टीम के मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मौजूद थे. मंच पर और भी लोग थे. जो सबसे प्रमुख अवार्ड था, उसे मिसेज मुकेश अंबानी के हाथों दिया गया और गडकरी के हाथों एक छोटा अवार्ड दिलाया गया.

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मेरी दुनिया

आडवाणी जी, दूखी लग रहे हैं.
दुखी नहीं, आहत हूं। वर्षो झूठ बोल—बोल कर अच्छी खासी छवि बनाई थी. परंतु मेरे झूठ का भांडा फोड दिया विरोधियों ने.
सबको पता चल गया कि… आतंकियों द्वारा संसद पर हमला विमान अपहरण, कंधार और आतंकियों को छोडना…सब हमारी कमजोरियों का नतीजा था.
सबको पता चल गया कि…मैं‘‘लौह पुरूष’’नहीं, सत्ता का भूखा 81 वर्ष का बूढा ‘‘मामूली पुरूष’’ हूं.
मेरे ही व्यक्ति ने मेरे उपर चप्पल फेंकी. मेरा तो ब्लड प्रेशर आउट ऑफ कंट्रोल हो गया.
तब मैंने ईश्वर से याचना की कि मेरी रक्षा करो. और लो…मेरा रक्षक आ गया.
रक्षक? क्या ‘‘राम जी’’ स्वयं आ गए.
अखबार ठीक से पढा करों. ‘‘राम जी’’ नहीं. पैरोल पर मेरे ‘‘वरूण जी’’ आ गए।

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मेरी दुनिया

कसम राम की खाते हैं, मंदिर वही बनाएंगे.
अरे आडवाणी जी,चुनाव आ गया क्या?
यह क्या है?
चुनावी घोषणापत्र. हमने विवादित स्थल पर राम—मंदिर बनाने का फिर वादा किया हैं.
विवादित स्थल पर मंदिर?
हॉ इससे दो समुदायों में तनाव. हिंसा, घृणा व दूरी बढेगी. वाटों का ध्रवीकरण होगा और हमे लाभ होगा.
लेकिन ये सब तो पाप है. हमें नहीं चाहिए मंदिर इस कीमत पर.
हे सतयुग के मर्यादापुरूषोत्तम आपकी मर्यादाएं और सोच आउट—डेटेड हो चुके हैं.
ये कलियुग है. इससे पाप, धोखा फरेब से सारे सुख मिलते हैं. यदा यदा अधर्मस्य….
बस…. बस…. बस….।।।
आप महान हैं।

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