मौसम विभाग का पूर्वानुमान, लगातार तीसरे साल सामान्य रहेगा मानसून

मौसम विभाग की तरफ से जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान 97% बारिश

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ऐसे करें घर बैठे मशरुम की खेती

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत काम करने वाले भारतीय बाग़वानी अनुसंधान संस्थान बंगलुरू ने घरेलू स्तर पर मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करने का एक कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत महिलाओं को घर बैठे उपभोग के लिए मशरूम मिलने के अलावा आय अर्जित करने का भी मौक़ा मिलता है.

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नोटबंदी : इस फैसले ने किसानों को और मार दिया

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले भारत में आर्थिक फैसले और विकास के पैमानों का आधार अब ग्रामीण भारत से

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प्रधानमंत्री जी, कृषि और किसान की सुध लीजिए

मन में एक दुविधा है कि आ़िखर अपनी बात कहें, तो किससे कहें? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहें या वित्त

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सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2012 सशक्‍त कृषि नीति बनाने की जरूरत

संसद द्वारा सहकारिता समितियों के सशक्तिकरण के लिए संविधान संशोधन (111) विधेयक 2009 को मंज़ूरी मिलने के बाद भारत की सहकारी संस्थाएं पहले से ज़्यादा स्वतंत्र और मज़बूत हो जाएंगी. विधेयक पारित होने के बाद निश्चित तौर पर देश की लाखों सहकारी समितियों को भी पंचायतीराज की तरह स्वायत्त अधिकार मिल जाएगा. हालांकि इस मामले में केंद्र एवं राज्य सरकारों को अभी कुछ और पहल करने की ज़रूरत है, ख़ासकर वित्तीय अधिकारों और राज्यों की सहकारी समितियों में एक समान क़ानून को लेकर.

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भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

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संशोधित भूमि अधिग्रहण बिलः ग्रामीण विकास या ग्रामीण विनाश

ओडिसा के जगतसिंहपुर से लेकर हरियाणा के फतेहाबाद में ग्रामीण भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर झारखंड के कांके-नग़डी में आईआईएम के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण का लोग विरोध कर रहे हैं. इस पर सरकार का कहना है कि देश को विकास पथ पर बनाए रखने के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक है.

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जनसंवाद यात्रा : औधोगीकरण बनाम कृषि भूमि का मुद्दा उठाया

जनसंवाद यात्रा का प़डाव सूरत ज़िले का मांडवी था, जहां नगर पंचायत मांडवी की ओर से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की एक संयुक्त बैठक का आयोजन शिक्षक भवन में किया गया था. मांडवी ज़िले का यह क्षेत्र अपनी उर्वरा भूमि के लिए प्रसिद्ध है. विगत 20 वर्षों से सभी सरकारों द्वारा लगातार यह आश्वासन दिया जाता रहा है कि नर्मदा नदी में बांध बनने के पश्चात खेतों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा और लोगों के लिए पेयजल उपलब्ध होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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उत्तर प्रदेश : नई औधोगिक नीति से बनेगी नई तस्वीर

हाल के कुछ वर्षों में राज्य में औद्योगिक विकास की गति पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है. मायावती के शासनकाल में न तो कोई नया उद्योग लगा और न चालू उद्योगों को पनपने का कोई मौका दिया गया. अखिलेश सरकार के सामने औद्योगिक विकास एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए वह चिंतित भी हैं. उनकी यह चिंता विधानसभा सत्र के दौरान सा़फ-सा़फ दिखाई पड़ रही थी.

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सलीम हक सीवीसी में जाएंगे

1984 बैच के भारतीय पोस्टल सेवा के अधिकारी सलीम हक़ को सीवीसी का अतिरिक्त सचिव बनाया जा सकता है. यह पद संयुक्त सचिव स्तर का है. वह हरी कुमार की जगह लेंगे.

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राहुल खुल्लर का इंकार

1975 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल खुल्लर ने दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) का चेयरमैन बनने से मना कर दिया है. वह अभी वाणिज्य सचिव हैं. सूत्रों का कहना है कि राहुल खुल्लर ने कैबिनेट सचिव अजीत सेठ से मुलाक़ात की और दूरसंचार नियामक प्राधिकरण का चेयरमैन बनने से इंकार कर दिया. ग़ौरतलब है कि राहुल खुल्लर ने इससे पहले भी ऐसा किया था.

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नरेंद्र भूषण संयुक्त सचिव बनेंगे

1992 बैच के आईएएस अधिकारी नरेंद्र भूषण को कृषि एवं सहकारिता विभाग में संयुक्त सचिव बनाया जा सकता है. वह सुभाष चंद्र गर्ग की जगह लेंगे.

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क्यों नहीं बनते ये चुनावी मुद्दे

चुनाव आते ही सियासी दलों में इस बात की हलचल मच जाती है कि इस बार वे जनता के मुद्दों को ज़रूर देखेंगे, लेकिन चुनाव के परवान चढ़ते ही जनता के विकास के मुद्दे कहीं गुम हो जाते हैं. स़िर्फ जाति धर्म, पैसा, पावर का बोलबाला रह जाता है, लेकिन यूपी की जनता के असल मुद्दे इस बार भी चुनावी मुद्दे नहीं बन पाए. यूपी के तराई इलाक़ों और पूर्वांचल में हर साल बारिश तबाही लेकर आती है.

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जैविक खेती समय की जरूरत

राजस्थान के शेखावाटी इलाक़े के किसान कुछ साल पहले पानी की समस्या से परेशान थे. खेती में ख़र्च इतना ज़्यादा बढ़ गया था कि फसल उपजाने में उनकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती चली गई, लेकिन कृषि के क्षेत्र में यहां एक ऐसी क्रांति आई, जिससे यह इलाक़ा आज भारत के दूसरे इलाक़ों से कहीं पीछे नहीं है. शेखावाटी में आए इस बदलाव के पीछे मोरारका फाउंडेशन की वर्षों की मेहनत है.

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बिहारः क़िस्मत के मारे क़िसान

राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी-बड़ी कंपनियों के मूंग के बीज मंगवा कर किसानों के बीच उनका मुफ्त वितरण कराया. साथ ही खाद, कीटनाशक एवं खरपतवार नाशक भी वितरित किए गए. पौधे ख़ूब लहलहाए, उन्हें देखकर किसान हर्षित थे, लेकिन उन पौधों में दाने नहीं आए.

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भूसरेड्डी जेएस बने

1989 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी संजय आर भूसरेड्डी को कृषि मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग का संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. उन्होंने स्वर्ण माला रावल का स्थान लिया.

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जलवायु परिवर्तनः सबसे ज़्यादा असर ग़रीबों पर

इस बात से सभी सहमत हैं कि हमारे वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों की वृद्धि ही जलवायु परिवर्तन की वजह है. इस नीले ग्रह (पृथ्वी) पर जीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी यही है. यदि कोई संदेह रह गया है तो भारत में मानसून की आंख मिचौली और पूरी दुनिया में जलवायु का अनिश्चित व्यवहार इसके प्रमाण हैं.

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उत्तर प्रदेश: माओवादियों की दस्तक

सोनभद्र एवं चंदौसी के बाद अब माओवादी कौशांबी, फतेहपुर, चित्रकूट एवं महोबा आदि जनपदों में भी दस्तक देने लगे हैं. चित्रकूट में जल, जंगल और ज़मीन पर दबंगों के क़ब्ज़े के कारण हालात गंभीर हो गए हैं. सरकार की भूमिका बड़े जमीदारों जैसी हो गई है. सरकार ने सीलन एक्ट को शहरी क्षेत्र में अप्रभावी बनाकर उद्योगपतियों को भूमि लूटने की खुली छूट दे रखी है.

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कृषि बाबुओं का विरोध

कृषि विभाग के अफसरों ने प्रधानमंत्री के सामने मांग रखी है कि अखिल भारतीय सेवाओं, जैसे ईइएस और ईपीएस की तर्ज़ पर भारतीय कृषि सेवा भी शुरू की जाए.

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बीटी बीज यानी किसानों की बर्बादी

संप्रग सरकार की जो प्रतिबद्धता किसान और खेती से जुड़े स्थानीय संसाधनों के प्रति होनी चाहिए, वह विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रति दिखाई दे रही है. इस मानसिकता से उपजे हालात कालांतर में देश की बहुसंख्यक आबादी की आत्मनिर्भरता को परावलंबी बना देने के उपाय हैं.

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कृषि बाबुओं का विरोध

कृषि विभाग के अफसरों ने प्रधानमंत्री के सामने मांग रखी है कि अखिल भारतीय सेवाओं, जैसे ईइएस और ईपीएस की तर्ज़ पर भारतीय कृषि सेवा भी शुरू की जाए. पहले भी इस तरह की मांग उठती रही है.

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शाहाबादः कहीं बंजर न हो जाए जमीन

सन 1857 की क्रांति के दौरान जब शाहाबाद की धरती ने आग उगलना शुरू किया तब यहां के लोगों को सिंचाई के संसाधन देकर कृषि कार्य कीतरफ मोड़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने एक बड़ी परियोजना की शुरूआत की थी. डेहरी के ऐनकार्ट में सोन नदी पर एक बांध बना और पूरे शाहाबाद में नहरों का जाल बिछाने की कवायद तेज़ हुई.

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आत्‍महत्‍या करने को मजबूर हो रहे किसान

कृषि ॠण माफी पैकेज-2008 के तहत किसानों को केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा 60 हज़ार करोड़ रुपए पैकेज के उपयोग से संबंधित क्रियान्वयन के नीतियों का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा न होकर जब नाबार्ड द्वारा किया गया तो हर किसान चौंक गया.

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केले की खेती ने किया मालामाल

गत वर्ष दो एकड़ में केले की खेती की थी, इस बार तीन एकड़ में. बैंक से रिटायर्ड होने के बाद पूरी तरह से खेती की तऱफ ध्यान लगाया. पहले गन्ना की खेती करता था, जिसमें एक मुश्त रक़म मिल जाती थी. लेकिन रिटायर्ड होने के बाद बढ़ती महंगाई ने खर्च बढ़ा दिया.

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