गठबंधन की कीमत पर क्राइम-करप्शन-कम्युनलिज्म से समझौता नहीं: नीतीश

जैसे-जैसे 2019 का लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है, नए-नए समीकरण सामने आते जा रहे हैं. इस कड़ी में सबकी

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उत्तर प्रदेश में गठबंधंन हुआ फाइनल, कांग्रेस को 105- सपा के पास 298

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर से पर्दा

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ऐसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव

अब जबकि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों के नाम तय हो चुके हैं, तो यह जानना भी ज़रूरी हो जाता है कि राष्ट्रपति का चुनाव आ़िखर होता कैसे है, कौन लोग इस पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं, इस पद के लिए होने वाले चुनाव की प्रक्रिया क्या है, मतदान कैसे होता है, मत का मूल्य कैसे तय किया जाता है और कौन-कौन से लोग मतदान में भाग लेते हैं? आम आदमी राष्ट्रपति चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया को समझ सके, उससे परिचित हो सके, इसलिए चौथी दुनिया इस अंक में राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े हर एक पहलू को आप तक पहुंचा रहा है.

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क्षेत्रीय दलों का गठबंधन एक विकल्प है

जब जवाहर लाल नेहरू सत्तर साल के हो गए तो उन्होंने सेवानिवृत होना चाहा. लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया. उनके अंतिम पांच साल का़फी कठिनाइयों भरे रहे. विशेष तौर पर चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने के मुद्दे और रक्षा मंत्री पर लगने वाले आरोपों के कारण. नेहरू की ताक़त खत्म होने के साथ ही क्षेत्रीय नेताओं के सिंडिकेट का उदय हुआ.

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महाराष्‍ट्रः शिव शक्ति – भीम शक्ति पर आशंका के बादल

राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की आहट देख सभी सियासी दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए घोषणाओं और वादों के पासे फेंके जा रहे हैं. हालांकि इस काम में विपक्षी गठबंधन दिग्भ्रमित नज़र आ रहा है.

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फुकुशिमा भारत के लिए चेतावनी है

विकिलीक्स खुलासों को भूल जाएं और इससे हुए खुलासे की जांच की मांग को भी भूल जाएं. मामला भारत-अमेरिका न्यूक्लियर समझौते के मुद्दे पर संसद में हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मतदान का था. यह मामला हमेशा से एक कूटनीतिक सामरिक गठबंधन का रहा है. इस मौक़े को उस सवाल का जवाब बताया जा रहा था जो भारत की ऊर्जा संबंधी ज़रूरतों को लेकर हमेशा से उठते रहे हैं.

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शांति और विकास की चाहत ने जीत दिलाई

गया ज़िले के दस विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों ने सभी को दंग कर दिया. ज़िले में राजद-लोजपा गठबंधन और कांगे्रस की हालत इतनी खराब होगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था. अमन और विकास की हवा ऐसी चली कि जदयू-भाजपा को दस में से नौ सीटें मिल गईं. अब तो यही कहा जा सकता है कि नक्सलवाद से त्रस्त और विकास से मरहूम लोगों ने विकास की आस में जनादेश दिया है.

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