नए भूमि अधिग्रहण क़ानून को लेकर देश भर की निगाहें संसद और केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं. जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलित कई राज्यों में सैकड़ों ग़रीब किसानों एवं आदिवासियों को पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा. उनका दोष स़िर्फ इतना था कि वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पुश्तैनी ज़मीन देने के लिए तैयार नहीं थे. ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 बनाया था.
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विकेंद्रीकरण संघीय व्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करता है, लेकिन पाकिस्तान में तो विकेंद्रीरण कहीं दिखता ही नहीं है. सवाल यह है कि क्या राज्य सभी शक्तियां अपने पास रखने का अधिकारी है और वह स्थानीय निकायों को कोई भी अधिकार देना अस्वीकार कर सकता है? 18वें संविधान संशोधन के अनुसार, अनुच्छेद 270-एए का क्लॉज-1 लोकल गवर्नमेंट ऑर्डिनेंस 2001 को निरस्त करता है.
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भारत को आज़ाद हुए एक युग बीत गया है. सरकार की आर्थिक नीति समाजवादी व्यवस्था पर आधारित है. कांग्रेस, सोशलिस्ट, प्रजा-समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, यहां तक कि नवनिर्मित स्वतंत्र पार्टी और जनसंघ तक भी समाजवादी अर्थव्यवस्था की हिमायत करते हैं. हर पार्टी के नेता यह दावा करते हैं कि उनकी ही कल्पित समाजवादी व्यवस्था सही है, दूसरी पार्टियों की न
Tags: India, Socialism, amendment, economy, law, अर्थव्यवस्था, भारत, व्यवस्था, संशोधन, समाजवाद, क़ानून Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब सोनिया गांधी की बातों को नज़रअंदाज़ करने लगे हैं. मनमोहन सिंह के लिए अब सोनिया गांधी की बातों का कोई मतलब नहीं है. बात थोड़ा चौंकाने वाली है, लेकिन सच है. अब यूपीए सरकार में दस जनपथ का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाता. पहले कहा जाता था कि प्रधानमंत्री ऐसा कोई काम नहीं करते, जो यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को पसंद न हो.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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