साहित्य में उठाने गिराने का खेल

अगर हम देखें, तो नहीं पढ़ना या कम पढ़ना एक बड़ी समस्या के तौर पर साहित्य में उपस्थित हो गया

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साहित्य के ‘अखाड़े’ में ‘कमज़ोर समानांतर साहित्य उत्सव’

दरअसल अगर हम पूरे आयोजन को लेकर समग्रता में विचार करें, तो यह बात समझ में आती है कि इसकी

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रद्द आयोजनों पर स़फाई

बिहार में विश्व कविता समारोह का प्रस्तावित आयोजन और उसमें अशोक वाजपेयी की केंद्रीय भूमिका लंबे समय तक साहित्य जगत

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स्वार्थसिद्धि से संकल्पसिद्धि की ओर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजनीति में भी अपने गैरपारंपरिक तौर तरीकों से चौंकाते रहे हैं. राजनीति से इतर भी जब वो

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बिछड़े सभी बारी-बारी

हिंदी साहित्य में फेसबुक अब एक अनिवार्य तत्व की तरह उपस्थित है. कई साहित्यकार इस माध्यम को लेकर खासे उत्साहित

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अराजकता का लाइसेंस नहीं स्वायत्तता

समकालीन भारतीय साहित्य इन दिनों संघर्ष, विरोध, प्रतिरोध, प्रदर्शन, प्रति प्रदर्शन, पुरस्कार वापसी आदि जैसे शब्दों से गूंज रहा है.

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